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इजरायल और अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला: जानें ‘खतरे’ को खत्म करने वाले इस ऑपरेशन की पूरी कहानी

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इजरायल और अमेरिका ने तेहरान पर हमला किया है जिसके बाद खामेनेई के दफ्तर के पास एक बड़ा धमाका हुआ। ईरान ने इसके खिलाफ जवाबी मिसाइलें दागी हैं

Last Updated- February 28, 2026 | 5:53 PM IST
Israel iran conflict
फोटो क्रेडिट: Shutterstock

शनिवार को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान की राजधानी तेहरान पर हवाई हमले किए। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग के मुताबिक, पहला बड़ा धमाका सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के दफ्तर के आसपास हुआ। इस हमले से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि ये हमले अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए हैं, ताकि ईरान की तरफ से आने वाले खतरे को पहले ही खत्म किया जा सके। वहीं, इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने इसे खतरे को दूर करने का कदम बताया। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि ये ऑपरेशन महीनों से प्लान हो रहा था और लॉन्च की तारीख हफ्तों पहले तय की गई थी।

इजरायल ने इस हमले को ‘ऑपरेशन लायंस रोर’ नाम दिया है, जबकि अमेरिका ने इसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ कहा। ये दोनों देश ईरान के सैन्य ठिकानों पर निशाना साध रहे हैं। हमले के जवाब में ईरान ने इजरायल की तरफ मिसाइलें दागीं, जिससे वहां एयर रेड सायरन बज उठे और बचाव के इंतजाम शुरू हो गए। अब डर ये है कि ये झगड़ा पूरे इलाके में फैल सकता है।

तेहरान में हलचल और कनेक्शन की दिक्कतें

तेहरान के लोगों ने रॉयटर्स को बताया कि पहला धमाका खामेनेई के ऑफिस के पास हुआ था। ईरानी सरकारी टीवी ने धमाकों की पुष्टि की, लेकिन वजह नहीं बताई। शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में मोबाइल फोन लाइनें कट गईं, और कुछ जगहों पर इंटरनेट भी कमजोर पड़ गया, जैसा कि ईरानी मीडिया ने रिपोर्ट किया। एक अमेरिकी अधिकारी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि अमेरिकी हमले ईरान के सैन्य ढांचे पर केंद्रित हैं। ईरान के पास 2,000 से ज्यादा मिसाइलें हैं, ज्यादातर छोटी और मध्यम दूरी की, जो पूरे देश में फैले लॉन्च पैड्स से दागी जा सकती हैं।

उधर, उत्तरी इजरायल में भी धमाके हुए, जहां इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरानी मिसाइलों को रोकने की कोशिश की। ये सब अमेरिका के साथ मिलकर किए गए हमले के ठीक बाद हुआ। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, अभी तक कोई नुकसान या हताहत की खबर नहीं आई है। इजरायली सेना ने कहा कि वो ईरानी हमलों का जवाब दे रही है।

Also Read: अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर किया हमला, खामेनेई के दफ्तर के पास बड़ा धमाका; ट्रंप ने किया कंफर्म

भारतीय दूतावासों की सलाह: रहें सावधान

इस तनाव के बीच, इजरायल में भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों को बहुत सतर्क रहने की सलाह दी है। वो कहते हैं कि इजरायली अधिकारियों और होम फ्रंट कमांड के दिशानिर्देशों का पालन करें, शेल्टर्स के पास रहें, आसपास की सुरक्षित जगहों के बारे में पता रखें, और जरूरी न हो तो यात्रा न करें। लोकल न्यूज, सरकारी घोषणाएं और इमरजेंसी अलर्ट पर नजर रखें। अगर कोई दिक्कत हो तो 24×7 हेल्पलाइन +972-54-7520711 पर कॉल करें या cons1.telaviv@mea.gov.in पर ईमेल भेजें।

इसी तरह, ईरान में भारतीय दूतावास ने नागरिकों से कहा कि घर के अंदर ही रहें, बेवजह बाहर न निकलें और हालात पर नजर रखें। इमरजेंसी के लिए नंबर हैं: +989128109115, +989128109109, +989128109102, और +989932179359। दोनों दूतावास लोकल अधिकारियों से संपर्क में हैं और जरूरत पड़ने पर अपडेट देंगे।

हवाई रास्ते बंद, यात्रा पर असर

हमलों के चलते इजरायल के परिवहन मंत्रालय ने पूरे देश का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया और लोगों को एयरपोर्ट्स से दूर रहने को कहा। यात्रियों को फ्लाइट्स दोबारा शुरू होने से 24 घंटे पहले सूचना मिलेगी। ईरान ने भी अपने ऊपर से सभी उड़ानें रोक दीं, क्योंकि धमाके जारी हैं और सुरक्षा अलर्ट हाई है।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। कतर ने सावधानी के तौर पर एयर ट्रैफिक रोक दिया। कुवैत के कुछ हिस्सों में सायरन बज उठे। ये सब मिलकर सिविलियन ट्रैवल पर बड़ा असर डाल रहे हैं, और लोग फंस सकते हैं।

अमेरिकी सेना की तैनाती और बढ़ता तनाव

ये हमले ऐसे समय में हुए जब अमेरिका ने वेस्ट एशिया में फाइटर जेट्स और युद्धपोतों की बड़ी तैनाती की है, ताकि ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर दबाव डाला जा सके। ट्रंप ने कहा कि बातचीत का रास्ता अभी खुला है, लेकिन अमेरिकी फोर्सेस इजरायल के साथ मिलकर काम कर रही हैं।

ईरान ने पहले चेतावनी दी थी कि इलाके में अमेरिकी सैनिक और बेस उनके निशाने पर होंगे, लेकिन अभी तुरंत जवाब की पुष्टि नहीं हुई। तनाव बढ़ रहा है क्योंकि अमेरिका ईरान के न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं को रोकना चाहता है, जबकि तेहरान यूरेनियम संवर्धन को अपना हक बताता है और मिसाइलों या हमास-हिजबुल्लाह जैसे ग्रुप्स को सपोर्ट करने पर बात नहीं करना चाहता। ट्रंप ने न्यूक्लियर बातचीत पर नाराजगी जताई और कहा कि वो खुश नहीं हैं कि चीजें कैसे चल रही हैं।

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First Published - February 28, 2026 | 5:53 PM IST

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