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NPS में आएगा बड़ा बदलाव? विदेशी पेंशन फंड्स लाने की तैयारी में सरकार, PFRDA ने बनाई हाई-लेवल कमेटी

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सरकार NPS को मजबूत बनाने के लिए विदेशी पेंशन फंड्स को भारत लाने की तैयारी कर रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि निवेश बढ़ेगा और भविष्य में नए अवसर बन सकते हैं

Last Updated- July 10, 2026 | 4:30 PM IST
National Pension System (NPS)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत सरकार देश के रिटायरमेंट फंड सिस्टम को और मजबूत व ज्यादा फायदेमंद बनाने की तैयारी में है। इसके लिए सरकार एक नई योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत दुनिया के सबसे बड़े पेंशन निवेशकों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित किया जाएगा। इसका मकसद नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को बेहतर बनाना, देश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए बड़े पैमाने पर फंड जुटाना और भविष्य में पेंशन धारकों के लिए निवेश के नए और सुरक्षित मौके तैयार करना है।

इसके लिए पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है। इस कमेटी का नाम ASCEND (एक्सेलेरेटेड स्केलिंग ऑफ ग्लोबल कैपिटल इकोसिस्टम एंड एनपीएस डेवलपमेंट) रखा गया है। इसका काम ऐसा रोडमैप तैयार करना है, जिससे NPS के तहत काम करने वाले भारतीय पेंशन फंड्स और दुनिया के बड़े अंतरराष्ट्रीय पेंशन फंड्स के बीच बेहतर तालमेल और साझेदारी हो सके।

PFRDA का कहना है कि इस पहल से भारत में लंबे समय के लिए स्थिर निवेश आएगा। साथ ही, NPS के मौजूदा सब्सक्राइबर्स के हितों की पूरी सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाएगा।

आपको बता दें कि फिलहाल NPS के तहत मैनेज होने वाली कुल संपत्ति करीब 185 अरब डॉलर (लगभग 17.5 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच चुकी है। यह रकम भारत के GDP का करीब 5 फीसदी है।

‘ASCEND’ की क्यों पड़ी जरूरत?

भारत में सड़क, रेलवे, पोर्ट्स, हवाई अड्डे और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए भारी निवेश की जरूरत होती है। इन परियोजनाओं की खास बात यह है कि इनमें लगाया गया पैसा कई दशकों तक लगा रहता है। इसलिए इन्हें ‘पेशेंट कैपिटल’ यानी लंबे समय तक टिके रहने वाले स्थिर निवेश की जरूरत होती है।

दुनिया के बड़े ग्लोबल पेंशन फंड्स ऐसे निवेश के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं, क्योंकि उनके पास लोगों की रिटायरमेंट सेविंग्स होती हैं, जिन्हें वे कई दशकों के लंबे समय के लिए निवेश कर सकते हैं।

इसी मौके का फायदा उठाने के लिए PFRDA ने इस कमेटी का गठन किया है। PFRDA का मानना है कि भारत की तेज आर्थिक विकास दर बनाए रखने और देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए लगातार बड़े विदेशी निवेश की जरूरत होगी।

‘ASCEND’ कमेटी इस बात का रोडमैप तैयार करेगी कि विदेशी निवेशकों को भारतीय पेंशन फंड्स के साथ मिलकर काम करने के लिए कैसे आगे बढाया जाए। PFRDA के मुताबिक, यह साझेदारी को-इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म, रणनीतिक साझेदारी (स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) या नए तरह के निवेश मॉडल्स के जरिए की जा सकती है।

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आम NPS सब्सक्राइबर्स को इससे क्या उम्मीदें हैं?

अगर आप NPS के सब्सक्राइबर हैं, तो आपके मन में यह सवाल आना स्वाभाविक है कि इस योजना का आपकी पेंशन या खाते पर क्या असर पड़ेगा। फिलहाल इससे आपके रोजमर्रा के निवेश या अकाउंट मैनेजमेंट में कोई तुरंत बदलाव नहीं होगा। यह पहल मुख्य रूप से लंबे समय में निवेश का माहौल बेहतर बनाने के लिए की जा रही है।

PFRDA का मानना है कि अगर ग्लोबल पेंशन फंड्स भारत में निवेश करते हैं, तो NPS सब्सक्राइबर्स को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं।

  • निवेश के ज्यादा विकल्प: सब्सक्राइबर्स के पैसे को लंबे समय वाले अलग-अलग सेक्टर्स में निवेश करने के और अवसर मिलेंगे।
  • देश के बड़े प्रोजेक्ट्स में होगा निवेश: आम लोगों का पैसा सड़क, रेलवे, बंदरगाह और दूसरे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के निर्माण में लगाया जा सकेगा।
  • बेहतर रिटर्न की उम्मीद: लंबे समय में जोखिम को संतुलित रखते हुए बेहतर और सुरक्षित रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
  • NPS फंड होगा और मजबूत: समय के साथ NPS के तहत मैनेज होने वाली कुल संपत्ति में और बढ़ोतरी हो सकती है।

हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि रिटर्न की कोई गारंटी मिल जाएगी। लेकिन दुनिया के बड़े संस्थानों के निवेश से NPS फंड मैनेजरों के पास निवेश के लिए ज्यादा बड़ा और मजबूत पोर्टफोलियो विकल्प मिल सकता है।

सब्सक्राइबर्स की सुरक्षा का क्या होगा?

विदेशी निवेश को भारत में लाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि निवेशकों की सुरक्षा से कोई समझौता किया जाएगा। PFRDA ने साफ कहा है कि NPS सब्सक्राइबर्स के हित उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता हैं।

PFRDA के मुताबिक, ‘ASCEND’ कमेटी की अहम जिम्मेदारियों में से एक ऐसी नीतियां, नियम और गवर्नेंस फ्रेमवर्क तैयार करना भी होगा, जिससे एक तरफ विदेशी निवेशक भारत में निवेश के लिए आकर्षित हों और दूसरी तरफ भारतीय सब्सक्राइबर्स का पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहे। PFRDA का कहना है कि भविष्य में होने वाली सभी साझेदारियां देश की आर्थिक स्थिरता और मौजूदा नियमों के दायरे में ही आगे बढ़ाई जाएंगी।

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कौन-कौन हैं इस कमेटी के सदस्य?

इस कमेटी की कमान SBI के पूर्व चेयरमैन और NPS ट्रस्ट के मौजूदा चेयरमैन दिनेश खारा को सौंपी गई है। साथ ही कई और एक्सपर्ट को कमेटी में शामिल किया गया है।

कमेटी के अन्य प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं:

  • नारायण रामचंद्रन (चेयरमैन, टीमलीज सर्विसेज)
  • अनंत नारायण (SEBI के पूर्व पूर्णकालिक सदस्य)
  • अश्विन पारेख (मैनेजिंग पार्टनर, अश्विन पारेख एडवाइजरी सर्विसेज)
  • डॉ. अरविंद गुप्ता (ट्रस्टी, NPS ट्रस्ट)
  • सुपर्णा टंडन (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, NPS ट्रस्ट), जो इस कमेटी में सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगी।

अब आगे क्या होगा?

‘ASCEND’ कमेटी को जल्द ही अपनी सिफारिशें और सुझाव सरकार और PFRDA को सौंपने के लिए कहा गया है। इन सिफारिशों के आधार पर ही आगे की नीतियां और नियम तय किए जाएंगे। जब तक इन सुझावों की पूरी जांच-परख नहीं हो जाती, तब तक नियमों में कोई बदलाव लागू नहीं होगा।

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First Published - July 10, 2026 | 4:18 PM IST

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