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ITR भरने के बाद कितने दिन में खाते में आता है रिफंड? जानें देरी की वजहें और क्या कहते हैं एक्सपर्ट

ITR फाइल करने के बाद रिफंड मिलने का समय हर करदाता के लिए अलग हो सकता है, लेकिन सही जानकारी और समय पर e-Verification से देरी से बचा जा सकता है।

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मानसी वार्ष्णेय   
Last Updated- July 09, 2026 | 4:30 PM IST

ITR Refund: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने के बाद ज्यादातर टैक्सपेयर्स के मन में सबसे पहला सवाल यही होता है कि रिफंड उनके बैंक खाते में कब तक आएगा। पिछले कुछ वर्षों में आयकर विभाग ने रिटर्न प्रोसेसिंग और रिफंड जारी करने की प्रक्रिया को पहले की तुलना में काफी तेज बनाया है। ई-फाइलिंग, ऑटोमेशन और डिजिटल वेरिफिकेशन की वजह से अब बड़ी संख्या में करदाताओं को पहले के मुकाबले कम समय में रिफंड मिलने लगा है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को एक तय समय-सीमा के भीतर ही रिफंड मिल जाएगा।

असल में ITR रिफंड मिलने का समय हर करदाता के मामले में अलग-अलग हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि रिटर्न सही तरीके से भरा गया है या नहीं, ई-वेरिफिकेशन समय पर हुआ है या नहीं, बैंक खाते की जानकारी सही है या नहीं और आयकर विभाग को रिटर्न में दी गई जानकारी को लेकर किसी तरह की अतिरिक्त जांच की जरूरत है या नहीं। यदि इनमें से किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी होती है, तो रिफंड आने में देरी हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में अधिकांश मामलों में रिफंड में देरी की वजह सिस्टम की धीमी प्रक्रिया नहीं, बल्कि करदाताओं की ओर से की गई छोटी-छोटी गलतियां होती हैं। गलत बैंक खाता, अधूरा ई-वेरिफिकेशन, Form 26AS, AIS और ITR में अंतर जैसी वजहें प्रोसेसिंग को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में रिटर्न दाखिल करने के बाद भी करदाताओं की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती, बल्कि उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रिटर्न से जुड़ी सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी हों।

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हर मामले में एक जैसी नहीं होती रिफंड की समय-सीमा

आयकर विभाग किसी भी ITR को प्रोसेस करने से पहले उसमें दर्ज सभी जानकारियों का मिलान करता है। इसमें करदाता की आय, टीडीएस, टैक्स भुगतान, बैंक खाते की जानकारी और अन्य वित्तीय विवरणों की जांच की जाती है। यदि सभी जानकारियां विभाग के रिकॉर्ड से मेल खाती हैं, तो रिटर्न की प्रोसेसिंग तेजी से पूरी हो सकती है। वहीं, किसी भी तरह का अंतर मिलने पर प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग सकता है।

यही वजह है कि कुछ लोगों को कुछ ही दिनों में रिफंड मिल जाता है, जबकि कुछ मामलों में इसके लिए कई सप्ताह या उससे अधिक समय भी लग सकता है।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

My Legal Expert के संस्थापक और एडवोकेट अश्विनी कुमार कहते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में आयकर विभाग ने डिजिटलीकरण और ऑटोमेशन के जरिए ITR रिफंड की प्रोसेसिंग में काफी सुधार किया है। इसके बावजूद यह मान लेना सही नहीं होगा कि सभी करदाताओं को एक निश्चित समय के भीतर रिफंड मिल जाएगा।

उनके मुताबिक, ITR रिफंड मिलने का समय कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करता है। इनमें समय पर ई-वेरिफिकेशन, रिटर्न में दी गई जानकारी की सटीकता, आय और टैक्स क्रेडिट का सही मिलान, बैंक खाते का प्री-वैलिडेशन और यह बात भी शामिल है कि रिटर्न को विभाग ने किसी अतिरिक्त जांच या स्क्रूटनी के लिए चुना है या नहीं।

अश्विनी कुमार ने बताया कि व्यवहारिक तौर पर सबसे ज्यादा देरी उन मामलों में देखने को मिलती है, जहां करदाता समय पर ई-वेरिफिकेशन नहीं करते या फिर उनके द्वारा दाखिल किए गए रिटर्न और आयकर विभाग के रिकॉर्ड के बीच अंतर पाया जाता है। कुछ मामलों में विभाग अतिरिक्त जांच पूरी होने तक रिफंड रोक भी सकता है।

उनका कहना है कि करदाता यदि रिटर्न दाखिल करते समय पूरी सावधानी बरतें, समय पर ई-वेरिफिकेशन करें और बैंक खाते को पहले से प्री-वैलिडेट करा लें, तो रिफंड में देरी की संभावना काफी कम हो जाती है। यदि सामान्य समय से अधिक देरी हो रही हो, तो आयकर पोर्टल पर रिफंड स्टेटस नियमित रूप से जांचना चाहिए और विभाग की ओर से मांगी गई किसी भी जानकारी या स्पष्टीकरण का जल्द जवाब देना चाहिए।

ई-वेरिफिकेशन में देरी बन सकती है सबसे बड़ी वजह

Ezeepay (MJ Digital Services) के एमडी एवं सीएमओ राशिद अली का कहना है कि ITR दाखिल करने के बाद सबसे जरूरी प्रक्रिया उसका ई-वेरिफिकेशन है। जब तक रिटर्न का वैध ई-वेरिफिकेशन पूरा नहीं होता, तब तक आयकर विभाग उसकी प्रोसेसिंग शुरू नहीं करता।

उनके अनुसार, कई करदाता रिटर्न फाइल तो कर देते हैं, लेकिन ई-वेरिफिकेशन समय पर नहीं करते। यही वजह रिफंड में देरी का सबसे आम कारण बन जाती है। इसलिए रिटर्न दाखिल करने के तुरंत बाद ई-वेरिफिकेशन पूरा करना बेहद जरूरी है।

Form 26AS, AIS और TIS का मिलान जरूरी

राशिद अली ने बताया कि आयकर विभाग अब केवल ITR में दी गई जानकारी पर निर्भर नहीं रहता। विभाग Form 26AS, Annual Information Statement (AIS) और Taxpayer Information Summary (TIS) में उपलब्ध डेटा से भी उसका मिलान करता है।

यदि ITR में घोषित आय और इन दस्तावेजों में उपलब्ध जानकारी के बीच अंतर मिलता है, तो विभाग पहले उस अंतर की जांच करता है। इस प्रक्रिया के कारण भी रिफंड जारी होने में अतिरिक्त समय लग सकता है।

बैंक खाते की छोटी गलती भी रोक सकती है रिफंड

विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार रिफंड केवल इसलिए अटक जाता है क्योंकि बैंक खाते से जुड़ी जानकारी सही नहीं होती।

यदि बैंक खाता प्री-वैलिडेटेड नहीं है, IFSC कोड गलत दर्ज किया गया है, बैंक खाता संख्या में त्रुटि है या PAN और बैंक रिकॉर्ड में जानकारी मेल नहीं खाती, तो रिफंड सीधे खाते में ट्रांसफर नहीं हो पाता। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले बैंक खाते की सभी जानकारियों की अच्छी तरह जांच कर लेना जरूरी है।

ज्यादा रिटर्न दाखिल होने पर भी बढ़ सकता है इंतजार

रिफंड में देरी की एक वजह यह भी हो सकती है कि किसी विशेष अवधि में बड़ी संख्या में करदाता एक साथ ITR दाखिल कर देते हैं। ऐसे समय में प्रोसेसिंग का दबाव बढ़ जाता है और रिफंड जारी होने में सामान्य से अधिक समय लग सकता है।

इसके अलावा, यदि आयकर विभाग को किसी रिटर्न में अतिरिक्त जानकारी की जरूरत महसूस होती है या किसी विवरण की जांच करनी होती है, तो संबंधित रिटर्न की प्रोसेसिंग तब तक लंबित रह सकती है, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती।

रिफंड जल्दी चाहिए तो इन बातों का रखें ध्यान

विशेषज्ञों का कहना है कि करदाता कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर रिफंड में होने वाली अनावश्यक देरी से बच सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से सभी आय स्रोतों की सही जानकारी देना, TDS का मिलान Form 26AS, AIS और TIS से करना, बैंक खाते को प्री-वैलिडेट करना, PAN से बैंक खाते को लिंक रखना और रिटर्न दाखिल करने के तुरंत बाद ई-वेरिफिकेशन पूरा करना शामिल है।

इसके साथ ही यदि आयकर विभाग की ओर से कोई नोटिस, स्पष्टीकरण या अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाते हैं, तो उनका जवाब बिना देरी दिए देना चाहिए।

रिटर्न फाइल करने के बाद स्टेटस पर रखें नजर

ITR फाइल करने के बाद केवल रिटर्न जमा कर देना ही पर्याप्त नहीं है। करदाताओं को समय-समय पर आयकर पोर्टल पर जाकर अपने रिटर्न और रिफंड का स्टेटस भी जांचते रहना चाहिए। यदि किसी कारण से प्रोसेसिंग लंबित है या विभाग ने कोई कार्रवाई मांगी है, तो समय रहते उसका जवाब देकर रिफंड मिलने की प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है।

ITR रिफंड की कोई एक तय समय-सीमा नहीं है। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि रिटर्न कितनी सटीकता से दाखिल किया गया है, ई-वेरिफिकेशन समय पर हुआ है या नहीं और सभी जरूरी जानकारियां आयकर विभाग के रिकॉर्ड से मेल खाती हैं या नहीं। सही दस्तावेज, सटीक जानकारी और समय पर पूरी की गई औपचारिकताएं ही रिफंड को बिना किसी अनावश्यक देरी के प्राप्त करने का सबसे प्रभावी तरीका हैं।

First Published : July 9, 2026 | 4:30 PM IST