CGHS ने अब परामर्श, मेडिकल जांच, रेफरल, विशेष जांच और आंखों की जांच से जुड़े नियमों को स्पष्ट किया है। (प्रतीकात्मक फोटो)
केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) के दायरे में आने वाले सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों को डॉक्टर से परामर्श के बाद मेडिकल जांच कराते समय अस्पताल के चयन को लेकर सावधानी बरतनी होगी। CGHS ने स्पष्ट किया है कि 3,000 रुपये तक की जांच और फॉलो-अप इलाज आम तौर पर उसी सूचीबद्ध अस्पताल में कराया जाना चाहिए, जहां शुरुआती परामर्श लिया गया था।
यह स्पष्टीकरण संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से मेडिकल रिइम्बर्समेंट के दावों को निपटाने में बार-बार सामने आ रही समस्याओं को लेकर पूछे गए सवालों के बाद आया है। पिछले सप्ताह जारी एक ऑफिस मेमोरेंडम में UPSC ने कहा कि दावों की जांच के दौरान सामने आ रही समस्याओं को देखते हुए उसने CGHS से कई नियमों पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।
CGHS ने अब परामर्श, मेडिकल जांच, रेफरल, विशेष जांच और आंखों की जांच से जुड़े नियमों को स्पष्ट किया है।
सामान्य नियम यह है कि लाभार्थी का फॉलो-अप इलाज उसी अस्पताल में होना चाहिए, जहां उसने पहली बार परामर्श लिया था। उदाहरण के लिए, अगर कोई सीजीएचएस लाभार्थी किसी सूचीबद्ध अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेता है और डॉक्टर कोई जांच कराने की सलाह देता है, तो सामान्य तौर पर वह जांच उसी अस्पताल में करानी चाहिए।
सीजीएचएस ने खास तौर पर स्पष्ट किया है कि 3,000 रुपये तक की जांच उसी सूचीबद्ध अस्पताल में कराई जानी चाहिए, जहां शुरुआती परामर्श हुआ था।
हालांकि, कुछ परिस्थितियों में लाभार्थी किसी दूसरे सीजीएचएस सूचीबद्ध अस्पताल, स्वास्थ्य संस्थान या डायग्नोस्टिक सेंटर में जांच कराना चाह सकता है। ऐसे मामलों में सीजीएचएस वेलनेस सेंटर से पहले रेफरल या अनुमोदन लेना जरूरी होगा।
इसका मतलब है कि अगर किसी अस्पताल में डॉक्टर ने जांच लिखी है तो लाभार्थी यह मानकर नहीं चल सकता कि वह अपनी मर्जी से किसी दूसरे सेंटर पर जांच कराकर बाद में रिइम्बर्समेंट के लिए दावा कर सकता है।
महंगी मेडिकल जांच के मामले में रेफरल से जुड़े नियम और महत्वपूर्ण हो जाते हैं। स्पष्टीकरण के मुताबिक, 3,000 रुपये से ज्यादा लागत वाली जांच के लिए सीजीएचएस का रेफरल जरूरी है। इनमें सीटी स्कैन, MRI और PET स्कैन जैसी महंगी जांच शामिल हो सकती हैं।
इसलिए कोई महंगी जांच कराने से पहले लाभार्थी को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उसके पास जरूरी सीजीएचएस रेफरल या अनुमति है। ऐसा करने से बाद में रिइम्बर्समेंट क्लेम करते समय आने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है।
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सीजीएचएस ने डॉक्टर के परामर्श की वैधता अवधि भी स्पष्ट की है। एक परामर्श सात दिन तक मान्य रहेगा, बशर्ते बाद में लिया जाने वाला परामर्श उसी मेडिकल स्पेशियलिटी से संबंधित हो।
मसलन, अगर किसी लाभार्थी ने सोमवार को हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लिया है तो उसी स्पेशियलिटी में अगले सात दिन तक यह परामर्श मान्य रहेगा। इस स्पष्टीकरण का मकसद यह साफ करना है कि इस अवधि में फॉलो-अप इलाज के लिए नए परामर्श की जरूरत है या नहीं।
सीजीएचएस ने आंखों के परामर्श शुल्क में शामिल जांच को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। आंखों की कंसल्टेशन फीस में तीन तरह की जांच रिफ्रैक्शन, टोनोमेट्री, और फंडस जांच शामिल हैं।
स्पष्टीकरण से यह साफ होता है कि आंखों के परामर्श के दौरान इन जांचों के लिए अलग से शुल्क लिया जाना है या वे पहले से परामर्श शुल्क में शामिल हैं।
एक अन्य जरूरी नियम उन जांच और मेडिकल प्रक्रियाओं से जुड़ा है, जो सीजीएचएस की निर्धारित सूची में शामिल नहीं हैं। अगर किसी सीजीएचएस सूचीबद्ध अस्पताल का विशेषज्ञ डॉक्टर ऐसी जांच या प्रॉसिजर कराने की सलाह देता है जो निर्धारित सूची में शामिल नहीं है, तो उसके लिए संबंधित विभाग या कार्यालय से पहले अनुमति लेना जरूरी होगा।
इसलिए केवल डॉक्टर की सलाह के आधार पर ऐसी प्रक्रिया नहीं करानी चाहिए। लाभार्थी को पहले जरूरी प्रशासनिक मंजूरी लेनी होगी।
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नए स्पष्टीकरण का मतलब यह नहीं है कि मेडिकल रिइम्बर्समेंट के लिए 3,000 रुपये की अधिकतम सीमा तय कर दी गई है। बल्कि 3,000 रुपये की राशि यह तय करने के लिए एक सीमा के तौर पर इस्तेमाल की जा रही है कि जांच के लिए किस प्रक्रिया का पालन करना होगा।
ये स्पष्टीकरण पेंशनधारकों और सेवारत सरकारी कर्मचारियों के लिए अहम हैं क्योंकि इलाज सीजीएचएस के तहत कवर होने के बावजूद प्रक्रिया से जुड़े नियमों का पालन नहीं करने पर मेडिकल रिइम्बर्समेंट क्लेम में परेशानी आ सकती है।
यूपीएससी के मेमोरेंडम में कहा गया है कि मौजूदा निर्देशों में स्पष्टता की कमी के कारण बार-बार सामने आ रही समस्याओं को देखते हुए ये स्पष्टीकरण मांगे गए थे। ऐसे में लाभार्थियों के लिए मेडिकल जांच से पहले रेफरल और मंजूरी की जरूरत की जांच करना उतना ही जरूरी है, जितना मेडिकल बिल और डॉक्टर की पर्ची संभालकर रखना।