प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
घर लेना हर किसी का सपना होता है, लेकिन अधिकतर लोगों को इसके साथ कई सालों की EMI भी चुकानी होती है। असली चिंता तब होती है जब सोचते हैं कि अगर घर का लोन चुकाने वाले व्यक्ति के साथ कुछ अनहोनी हो जाए तो परिवार क्या करेगा? क्या उन पर पूरा कर्ज आ जाएगा या उनके पास कोई सहारा होगा?
यहीं पर होम लोन इंश्योरेंस काम आता है। यह ऐसा सुरक्षा कवच है जो मुश्किल समय में परिवार को कर्ज के बोझ से बचा सकता है। अब तक यह इंश्योरेंस ज्यादातर बैंक के जरिए, लोन के साथ जोड़कर मिलता रहा है, जिसमें विकल्प कम और प्रीमियम ज्यादा होता है। लेकिन अब ऑनलाइन होम लोन इंश्योरेंस कम खर्च, ज्यादा पारदर्शिता और बेहतर लचीलापन (Flexibility) के साथ एक नया विकल्प बनकर सामने आया है। सही जानकारी के साथ लिया गया फैसला घर के सपने को सुरक्षित रख सकता है।
अब तक लोन इंश्योरेंस अधिकतर ऑफलाइन तरीके से ही बेचा जाता रहा है। आमतौर पर जब ग्राहक बैंक से लोन लेते हैं, तो उसी के साथ इंश्योरेंस भी जोड़कर दे दिया जाता है।
इस प्रक्रिया में ग्राहकों के पास चुनने के विकल्प बहुत कम होते हैं और प्रीमियम अक्सर ज्यादा होता है। कई बार लोगों को यह साफ तौर पर समझ भी नहीं आता कि वे किस कवरेज के लिए कितना पैसा दे रहे हैं। ऊपर से, पेमेंट की शर्तें भी काफी सख्त होती हैं, जिससे लचीलापन (Flexibility) कम हो जाता है।
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पॉलिसीबाजार के मुताबिक, आज का जागरूक ग्राहक चाहता है कि उसकी इंश्योरेंस पॉलिसी सस्ती हो और सालों तक उसकी जेब पर भारी न पड़े। ऑनलाइन होम लोन इंश्योरेंस इसी जरूरत को ध्यान में रखकर बनाया गया है। चूंकि यह सीधे ग्राहक तक पहुंचता है, इसलिए इसमें एजेंट कमीशन और बीच के खर्च नहीं जुड़ते।
एक्सपर्ट भी यही मानते हैं। आनंद राठी इंश्योरेंस ब्रोकर्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप फुंडे कहते हैं, “ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रीमियम में बड़े अंतर की असली वजह डिस्ट्रीब्यूशन चैनल हैं। ऑनलाइन पॉलिसियां सस्ती इसलिए होती हैं क्योंकि उनमें बिचौलियों का कमीशन, एजेंट फीस और कागजी प्रक्रिया का खर्च शामिल नहीं होता। इंश्योरेंस कंपनियां इन बचतों का फायदा सीधे ग्राहकों को कम प्रीमियम के रूप में देती हैं।”
पॉलिसीबाजार के मुताबिक, अगर आंकड़ों पर नर डालें तो 20 साल के लोन पीरियड में ऑनलाइन इंश्योरेंस, ऑफलाइन विकल्प की तुलना में 72% तक सस्ता पड़ता है।
एक उदाहरण (30 साल का व्यक्ति, 1 करोड़ रुपये का कवर, 20 साल का समय):
| तुलना | ऑफलाइन (बैंक/एजेंट) | ऑनलाइन (डायरेक्ट) |
| GST | 18% | 0% |
| मासिक प्रीमियम | ₹2,492 | ₹729 |
| कुल प्रीमियम | ₹5,98,249 | ₹1,65,200 |
GST का गणित: सितंबर 2025 से इंडिविजुअल्स लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी को 18% GST से फ्री कर दिया गया है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अक्सर सीधे व्यक्तिगत पॉलिसियां देते हैं, जबकि ऑफलाइन बैंक-बंडल प्लान अक्सर ‘ग्रुप इंश्योरेंस’ होते हैं, जिन पर अभी भी GST लग सकता है। यही वजह है कि ऑनलाइन प्लान और भी किफायती हो जाते हैं।
पॉलिसीबाजार के मुताबिक, जानकारी की कमी के कारण आज भी कई लोग महंगे ऑफलाइन प्लान्स में फंसे रहते हैं। इसी अंतर को पाटने के लिए पॉलिसीबाजार ने भी ग्राहक-केंद्रित (Customer-Centric) ऑनलाइन होम लोन इंश्योरेंस लॉन्च किया है। इसे ग्राहक अपनी जरूरत के मुताबिक अलग से खरीद सकते हैं। यह पूरी तरह से किफायत, साफ शर्तों और विकल्प की आजादी पर आधारित है।
ऑनलाइन इंश्योरेंस का एक बड़ा फायदा यह है कि क्लेम का पैसा सीधे परिवार यानी नॉमिनी को मिलता है, बैंक को नहीं। फुंडे कहते हैं, “जब रकम सीधे परिवार के हाथ में आती है, तो उन्हें फैसले लेने की आजादी मिलती है। वे खुद तय कर सकते हैं कि पहले लोन चुकाना है, घर का खर्च संभालना है या बच्चों की पढ़ाई पर पैसा लगाना है। मुश्किल वक्त में इससे कागजी झंझट कम होता है और परिवार को जल्दी आर्थिक सहारा मिल जाता है।”
अगर आप अपना होम लोन तय समय से पहले चुका देते हैं, तो उससे जुड़ी ऑनलाइन इंश्योरेंस पॉलिसी को भी बंद या जरूरत के हिसाब से बदला जा सकता है।
कुछ मामलों में आप इसे अलग से चलने वाले टर्म प्लान में बदल सकते हैं, ताकि आपके परिवार की सुरक्षा जारी रहे। वहीं, सिंगल प्रीमियम पॉलिसी में इंश्योरेंस कंपनी के नियमों के मुताबिक बची हुई अवधि का कुछ पैसा (प्रो-राटा रिफंड) वापस मिल सकता है।
फुंडे का कहना है कि अगर आप इंश्योरेंस खरीद रहे हैं तो इससे पहले आपको तीन बातों का ध्यान रखना जरूरी है: