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Excise Policy Case: आबकारी नीति केस में बड़ा उलटफेर, केजरीवाल और सिसोदिया बरी

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दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी कर दिया, जबकि CBI ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

Last Updated- February 28, 2026 | 11:42 AM IST
Kejriwal and Manish Sisodiya(1)
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (फाइल फोटो)

अदालत ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया तथा 21 अन्य लोगों को आबकारी नीति मामले में शुक्रवार को बरी कर दिया। पिछले साल फरवरी में दिल्ली विधान सभा चुनावों में हार के बाद से राजनीतिक गुमनामी में डूबी आम आदमी पार्टी (आप) और उसके संयोजक केजरीवाल के लिए यह फैसला किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है।

दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का मामला न्यायिक जांच में टिक नहीं सका। यह किसी तरह भरोसे के काबिल नहीं था। दिल्ली में तत्कालीन आप सरकार द्वारा बनाई गई और लागू की गई तथा आरोप लगने के बाद रद्द हो चुकी आबकारी नीति में कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही सीबीआई ने बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय में राउज एवेन्यू अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की है। उसने कहा कि निचली अदालत ने फैसला सुनाते हुए जांच के कई पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया।

लगातार 10 साल तक दिल्ली पर शासन करने के बाद आप बीते साल फरवरी में संपन्न हुए विधान सभा चुनाव हार गई थी, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने केजरीवाल तथा आप सरकार पर आबकारी नीति मामले सहित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और उन्हें अपना चुनावी मुद्दा बनाया।

अदालत द्वारा फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद केजरीवाल ने भावुक होते हुए संवाददाताओं से कहा, ‘अदालत ने साबित कर दिया है कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आप ‘कट्टर ईमानदार’ हैं। आबकारी मामले में साजिश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर आप को खत्म करने के लिए रची गई थी।’ मामले में ‘क्लीन चिट’ मिलने के बाद आप प्रमुख ने यह भी कहा कि वे ईडी द्वारा दर्ज किए गए मामलों के संबंध में आरोप मुक्त करने के लिए अदालत में आवेदन दाखिल करेंगे।

फैसले के बाद दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने आप नेतृत्व की रिहाई के समय पर सवाल उठाया। दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि इस तरह की रिहाई अक्सर राज्यों में विधान सभा चुनावों के साथ मेल खाती है, क्योंकि गुजरात विधान सभा चुनाव नजदीक हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव सहित अन्य विपक्षी दलों ने रिहाई का स्वागत किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत का फैसला केंद्र द्वारा जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का प्रमाण है।

आप नेतृत्व के बरी होने के बाद भाजपा ने कहा कि दिल्ली के मतदाताओं ने केजरीवाल और आप को सत्ता से हटाकर पहले ही जवाब दे दिया है। भाजपा ने आप नेतृत्व की रिहाई को तकनीकी मामला बताया। अगले साल फरवरी-मार्च तक पंजाब और गोवा में चुनाव होने वाले हैं। पंजाब में आप सत्ता में है और कांग्रेस उसकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी है। गोवा में भी चुनाव हैं, जहां कांग्रेस को पीछे धकेलते हुए आप मजबूती से उभरी है। गुजरात में भी 2027 में ही चुनाव हो सकते हैं, जहां आप ने 2022 के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचाया था। हिमाचल प्रदेश में भी आप ने पिछले विधान सभा में पूरा जोर लगाया था।

भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि मामले में सबूत के तौर पर सैकड़ों मोबाइल फोन और सिम कार्ड नष्ट कर दिए गए। त्रिवेदी ने कहा, ‘अब उन्हें क्यों नष्ट किया गया और कैसे इससे मामले में सबूतों की कमी हुई, सीबीआई ऐसे तकनीकी मुद्दों की जांच करेगी और अपनी अगली कार्रवाई तय करेगी।’ मोदी और शाह पर केजरीवाल द्वारा लगाए गए आरोपों के बारे में पूछे जाने पर भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि शराब घोटाले पर पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस कांग्रेस के अजय माकन ने की थी।

तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता उन 21 लोगों में शामिल हैं, जिन्हें इस मामले में क्लीन चिट दी गई है। अपने फैसले में विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘इस अदालत को यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री किसी भी आरोपी व्यक्ति के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला भी नहीं बताती है, गंभीर संदेह तो दूर की बात है। तदनुसार, आरोपी नंबर 1-23 को वर्तमान मामले में उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से बरी किया जाता है।’

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First Published - February 28, 2026 | 11:42 AM IST

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