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जापान की दिग्गज कंपनी एमओएल की भारत पर नजर, तेल जहाजों में संयुक्त निवेश की तैयारी

जापान की शिपिंग कंपनी Mitsui O.S.K. Lines भारतीय तेल विपणन कंपनियों के साथ मिलकर जहाजों के संयुक्त स्वामित्व और भारत में अपने बेड़े के विस्तार पर बातचीत कर रही है।

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शुभांगी माथुर   
Last Updated- February 28, 2026 | 10:29 AM IST

टोक्यो की मित्सुई ओएसके लाइन्स (एमओएल) तेल के जहाजों के संयुक्त स्वामित्व के लिए भारत की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) से बातचीत कर रही है। शिपिंग कंपनी के कार्यकारी अधिकारी (दक्षिण और पश्चिम एशिया क्षेत्र) आनंद जयरामन ने बिजनेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी।

गोवा में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, ‘जहाज के मालिक के तौर पर हम भारत के जहाज विनिर्माण उद्योग और उसके पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर करीब से नजर रख रहे हैं। हम भारत के कुछ शिपयार्ड के साथ नियमित रूप से बातचीत कर रहे हैं। जैसे-जैसे और ज्यादा देश जहाज बनाना शुरू करेंगे, हमें फायदा होगा।’

सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ( सभी तेल विपणन कंपनियां) के साथ संयुक्त उद्यम बनाने जो रही हैं, ताकि उनके लिए जहाज खरीदे और चलाए जा सकें।

दो बड़े एथेन कैरियर (वीएलईसी) बनाने के लिए एमओएल ने पिछले महीने सरकार की कंपनी ऑयल ऐंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन के साथ 15 साल का करार किया था। एमओएल ने सरकारी कंपनी गेल इंडिया के साथ भी लंबे समय का तरलीकृत प्राकृतिक गैस कैरियर का करार किया।

जयरामन ने कहा कि जापानी कंपनी अगले चार या पांच साल में भारत के झंडे वाले (भारत में पंजीकृत) जहाजों के अपने बेड़े को 60 से 70 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना बना रही है, क्योंकि भारत सरकार शिपिंग उद्योग के विकसित करने पर काम कर रही है। बेड़े के आकार के लिहाज से दुनिया के दूसरी सबसे बड़े की मालिक एमओएल के पास भारत के झंडे वाले 13 जहाज हैं।

जयरामन ने कहा, ‘भारत के जहाजरानी क्षेत्र के आत्मनिर्भर बनने की उम्मीद है। जहाजरानी और जहाज विनिर्माण उद्योग के विस्तार के लिए सरकार की पहल बहुत अच्छा कदम है। भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है और हम अपने लिए मौका देख रहे हैं।’

First Published : February 28, 2026 | 10:29 AM IST