Parag Satpute, Managing Director and Group Chief Executive Officer of Greaves Cotton
हाल में हुआ और अगली कुछ तिमाहियों में लागू होने वाला भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) गैर-टैरिफ रुकावटों को दूर करेगा, नीति को अनुमान लगाने लायक बनाएगा और ग्रीव्स कॉटन को अगले चार से पांच साल में निर्यात को कुल राजस्व के लगभग 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने में मदद करेगा। कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी पराग सतपुते ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। ग्रीव्स कॉटन ऊर्जा, परिवहन और औद्योगिक श्रेणियों में इंजन, इंजन समाधान, इलेक्ट्रिक परिवहन उत्पाद और अन्य इंजीनियरिंग समाधानों का विनिर्माण करती है।
बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में सतपुते ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए का सबसे बड़ा असर यह होगा कि यह लंबे समय के निवेश की योजना बना रहे कारोबारों को स्थिरता प्रदान करेगा। उन्होंने कहा, ‘इससे जो मिलता है, वह है अनुमान लगाने की क्षमता। इस एफटीए से नीतिगत स्थिरता आती है। इसलिए कंपनियां आगे बढ़कर दीर्घकालिक योजना बना सकती हैं।’
उन्होंने कहा कि विनिर्माण कंपनियों को पूंजी लगाने से पहले नियामकीय मंजूरी की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, ‘विनिर्माण उद्योग के लिए हमें उस लाइन की जरूरत होती है, वरना हम निवेश के लिए प्रतिबद्धता नहीं कर पाएंगे।’ उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे निवेश में विनिर्माण क्षमता बढ़ाना, लॉजिस्टिक नेटवर्क को मजबूत करना या यूरोपीय बाजार के लिए मांग के अनुरूप उत्पाद बनाना शामिल हो सकता है।’
सतपुते ने कहा कि टैरिफ के अलावा यह समझौता गैर-टैरिफ बाधा से निपटने में भी मदद करेगा, जिसमें नियामकीय और अनुपालन की जरूरत होती है और अक्सर शुल्क कम होने पर भी व्यापार की छिपी हुई रुकावटों के रूप में काम करती हैं। एक दशक से ज्यादा समय तक यूरोप में काम करने के अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने कहा कि यूरोपीय कंपनियों ने पिछले दो दशकों के दौरान उस बाजार के बड़े स्तर के कारण मुख्य रूप से चीन पर ध्यान केंद्रित किया था। अलबत्ता बदलती भू-राजनीति और चीन की अर्थव्यवस्था में परिपक्वता उस परिदृश्य को बदल रही है।
उन्होंने कहा, ‘यह एफटीए बातचीत का मार्ग खोलेगा और जब यूरोपीय कारोबारी प्रमुखों की बात आएगी, तो भारत बातचीत में और ज्यादा केंद्र में रहेगा।’ कंपनी पर तुरंत असर के बारे में सतपुते ने कहा कि निर्यात में रातों-रात कोई उछाल नहीं आएगी क्योंकि यूरोप जाने वाले उसके उत्पादों को पहले टैरिफ की बड़ी रुकावटों का सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि उन्होंने कहा कि बेहतर नीतिगत सुनिश्चितता से साझेदारों के साथ जुड़ाव ज्यादा सार्थक हो गया है।
फिलहाल ग्रीव्स कॉटन के कुल राजस्व में निर्यात की हिस्सेदारी लगभग 14 प्रतिशत है। कंपनी का लक्ष्य अगले चार से पांच साल के दौरान इस हिस्सेदारी को लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ाना है क्योंकि विदेशी कारोबार और बढ़ेगा। पोर्टफोलियो संयोजन की बात करें, तो अभी परिवहन समाधान राजस्व में 65-70 प्रतिशत, ऊर्जा समाधान लगभग 25 प्रतिशत और औद्योगिक समाधान 10 से 15 प्रतिशत का योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि अगले पांच साल के दौरान ऊर्जा समाधान राजस्व का लगभग 35 प्रतिशत हो जाने की उम्मीद है, जबकि परिवहन समाधान नरम पड़कर लगभग 55 प्रतिशत तक रह सकते हैं।