क्रेडिट कार्ड से महंगी खरीदारी को EMI में बदलना आजकल बहुत आम हो गया है। लोग सोचते हैं कि इससे बड़ा सामान आसानी से घर लाया जा सकता है, बिना एक साथ सारा पैसा देने खर्च किए। लेकिन इस सुविधा के चक्कर में कुल मिलाकर ज्यादा पैसे भी चुकाने पड़ सकते हैं, अगर सही से सोच-विचार न किया जाए।
क्रेडिट कार्ड EMI में आप किसी बड़ी रकम की खरीद को कुछ महीनों की बराबर किस्तों में बांट देते हैं। ज्यादातर बैंक 3 से 24 महीने तक का विकल्प देते हैं।
एकमुश्त पूरा बिल चुकाने की बजाय हर महीने एक फिक्स्ड रकम देनी होती है। इसमें ब्याज और कुछ अतिरिक्त चार्ज भी जुड़ जाते हैं। सबसे अहम बात, पूरी खरीदारी की राशि आपके कार्ड की क्रेडिट लिमिट से लॉक रहती है। मतलब, जब तक आखिरी किस्त नहीं चुक जाती, उतनी लिमिट इस्तेमाल नहीं कर पाते।
बैंक इस सुविधा के लिए कई विकल्प देते हैं। आप ऑनलाइन शॉपिंग या दुकान पर पेमेंट करते समय ही EMI चुन सकते हैं। बाद में भी मोबाइल बैंकिंग ऐप या नेट बैंकिंग से किसी ट्रांजेक्शन को EMI में बदल सकते हैं। कई बार कार्ड कंपनी खुद मैसेज या नोटिफिकेशन भेजती है, जिसमें पोस्ट-पर्चेज EMI का ऑफर होता है। बस उसे स्वीकार करना होता है।
EMI मिलने के लिए आपकी उपलब्ध क्रेडिट लिमिट, खरीदारी की रकम, पिछले भुगतान का रिकॉर्ड और कार्ड का प्रकार देखा जाता है।
Also Read: होम लोन की सुरक्षा अब जेब पर नहीं होगी भारी! ऑनलाइन इंश्योरेंस से करें 72% तक की बचत, जानें कैसे
छोटी-छोटी किस्तें देखकर लोग खुश हो जाते हैं, लेकिन असल खर्च ज्यादा निकल आता है। ज्यादातर बैंक 12 से 24 फीसदी सालाना ब्याज लगाते हैं, जो समय और बैंक पर निर्भर करता है। एक बार में प्रोसेसिंग फीस भी कट जाती है, जो खरीदारी की रकम का 1 से 3 फीसदी तक हो सकती है। अगर बीच में ही पूरी EMI चुकानी हो, तो फोरक्लोजर चार्ज भी देना पड़ सकता है।
कई बार जीरो-कॉस्ट EMI दिखाई देती है। लेकिन ज्यादातर मामलों में दुकानदार डिस्काउंट देकर ब्याज कवर करता है, लेकिन ब्याज पूरी तरह माफ नहीं होता।
फायदे की बात करें तो बड़ी खरीद को छोटे हिस्सों में बांटने से कैश फ्लो आसान रहता है। इमरजेंसी या रोज के खर्च के लिए पैसे बच जाते हैं। अप्रूवल भी ज्यादातर पहले से होता है, ज्यादा डॉक्यूमेंट नहीं लगते।
लेकिन इसके साथ ही कमियां भी कम नहीं हैं। कार्ड की बाकी लिमिट कम हो जाती है। कई बार रिवॉर्ड पॉइंट्स या कैशबैक नहीं मिलता। अगर एक से ज्यादा EMI चल रही हों, तो हर महीने का बोझ बढ़ जाता है और पेमेंट में दिक्कत आ सकती है।
EMI तब ठीक रहती है, जब सामान या सर्विस जरूरी हो, जैसे मेडिकल खर्च, अस्पताल का बिल या घरेलू जरूरी सामान आदि खरीदना हो तो। अगर तुरंत पैसे नहीं हैं, तो यह राहत दे सकती है।
कुछ स्पेशल ऑफर में कम ब्याज या अच्छी डील मिलती है, तब भी फायदा होता है। लेकिन सिर्फ दिखावटी या एक्स्ट्रा चीजों के लिए EMI लेना ठीक नहीं है। इससे कई किस्तों का दबाव पड़ सकता है, खासकर जब अलग-अलग कार्ड्स पर ऐसी सुविधा ली जा रही हो।