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भारतीय चाय पर ईरान संकट का साया: भुगतान अटके और शिपमेंट पर लगी रोक, निर्यातकों की बढ़ी चिंता

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शिपिंग लाइनें कार्गो स्वीकार करना बंद कर चुकी हैं और युद्ध के जोखिम के कारण अतिरिक्त सरचार्ज पर विचार कर रही हैं। भाड़ा और बीमा लागत भी बढ़ सकती है

Last Updated- March 02, 2026 | 11:14 PM IST
Tea garden
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष ने निकट अवधि में पश्चिम एशिया और उससे आगे भारतीय चाय निर्यात पर अनिश्चितता की छाया डाल दी है।

भारतीय चाय निर्यातक संघ के चेयरमैन अंशुमान कनोरिया ने कहा कि ईरान को भेजी गई चाय के भुगतान अटके हुए हैं, कुछ खेप समुद्र में हैं और भारत में स्टॉक डिस्पैच के लिए तैयार खड़ा है। फिलहाल अनिश्चितता और चिंता का माहौल है। हमें इंतजार करना होगा कि स्थिति किस दिशा में जाती है। उन्होंने कहा कि असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है। पूरा पश्चिमी गोलार्ध प्रभावित है। जो भाड़ा दरें अब तक स्थिर थीं, उनमें उछाल आ सकती है। अमेरिका और यूरोप के लिए शिपिंग और लीड अवधि भी बढ़ने की आशंका है।

एम के शाह एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन हिमांशु शाह ने कहा कि इस समय हालात अव्यवस्थित हैं। इस सप्ताह हमारी कुछ खेप पश्चिम एशिया जानी थीं, लेकिन खरीदारों ने फिलहाल रोकने की सलाह दी है। एम के शाह एक्सपोर्ट्स के उत्पादन का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया जाता है। कंपनी ऑर्थोडॉक्स चाय की प्रमुख उत्पादक और निर्यातक है।  दक्षिण भारत चाय निर्यातक संघ के चेयरमैन दीपक शाह ने बताया कि पूरा पश्चिम एशिया आपूर्ति के लिए होर्मुज स्ट्रेट या खाड़ी के उन बंदरगाहों पर निर्भर है, जिन पर ईरान ने हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार में वास्तविक नुकसान, बंदरगाहों पर फंसे कार्गो और विभिन्न देशों में क्षति का आकलन फिलहाल मुश्किल है।

शिपिंग लाइनें कार्गो स्वीकार करना बंद कर चुकी हैं और युद्ध के जोखिम के कारण अतिरिक्त सरचार्ज पर विचार कर रही हैं। भाड़ा और बीमा लागत भी बढ़ सकती है।

पश्चिम एशिया भारतीय चाय के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण बाजार समूह है। आंकड़ों के मुताबिक 2025 (जनवरी-दिसंबर) के दौरान केवल यूएई, ईरान और इराक को भारत का संयुक्त निर्यात 11.45 करोड़ किलोग्राम रहा, जबकि कुल निर्यात 28.04 करोड़ किलोग्राम था। चाय बोर्ड के उपाध्यक्ष सी मुरुगन ने कहा कि भारत के कुल चाय निर्यात का लगभग 41 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों को जाता है। निश्चित रूप से पश्चिम एशिया संकट के कारण व्यवधान आएंगे। अल्पकाल में इसका असर अमेरिका और यूरोप जैसे अन्य बाजारों पर भी पड़ सकता है।

 उन्होंने बताया कि कुछ खेप ईरान और अन्य खाड़ी देशों तक पहुंच चुकी हैं और निर्यातक अब भुगतान को लेकर चिंता जता रहे हैं।

मुरुगन ने हालांकि यह भी कहा कि ईरान मुख्य रूप से ऑर्थोडॉक्स चाय का बड़ा बाजार है। चीन को हमारा निर्यात भी बढ़ रहा है और वे भी मुख्यतः ऑर्थोडॉक्स किस्में आयात करते हैं। इस हद तक चीन ईरान के लिए निर्धारित कुछ मात्रा को समाहित कर सकता है, लेकिन खाड़ी बाजारों की पूरी भरपाई कोई एक देश नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति के प्रभाव पर टिप्पणी करना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन हम निर्यातकों के संपर्क में हैं और हालात पर करीबी नजर रखे हुए हैं।

जनवरी-दिसंबर 2025 के दौरान चीन को निर्यात 62.4 लाख किलोग्राम से बढ़कर 161.3 लाख किलोग्राम हो गया। ईरान और इराक से मजबूत खरीद के साथ मिलकर इसने 2025 में भारतीय चाय निर्यात को रिकॉर्ड 28.04 करोड़ किलो तक पहुंचाया। एशियन टी कंपनी के निदेशक मोहित अग्रवाल ने कहा कि यदि पश्चिम एशिया में यह संघर्ष न होता तो 2026 में ऑर्थोडॉक्स चाय का निर्यात 30 करोड़ किलोग्राम तक पहुंच सकता था।

उन्होंने कहा, ‘क्षेत्र में मौजूदा तनाव चिंताजनक है। सौभाग्य से उत्तर भारत में यह ऑफ-सीजन है, लेकिन महीने के अंत से शुरू होने वाले नए सीजन को लेकर आशंका बनी हुई है।’

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First Published - March 2, 2026 | 11:14 PM IST

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