भारतीय रिफाइनर होर्मुज स्ट्रेट को दरकिनार करते हुए कच्चे तेल की आपूर्ति के वैकल्पिक मार्गों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनमें पश्चिम अफ्रीका, ओमान और अमेरिका शामिल हैं। साथ ही पश्चिम एशिया में संकट गहराने के कारण निकट भविष्य में स्पॉट खरीद के लिए ‘ऑयल ऑन वॉटर’ पर भी विचार कर रहे हैं। घटनाक्रम से अवगत तीन लोगों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी।
रिफाइनरी के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘होर्मुज स्ट्रेट को पहली बार अवरुद्ध किया गया है। उच्च जोखिम के कारण जहाज फिलहाल इस मार्ग से नहीं गुजर रहे हैं। हमारी तत्काल योजना स्रोतों में विविधता लाने और ऐसे कच्चे तेल को खरीदने की है जो होर्मुज से होकर न गुजरे। हम सुरक्षित जलमार्गों से माल ढुलाई पर भी विचार करेंगे।’
समुद्र में मौजूद कच्चे तेल की वह मात्रा जिसे जहाज पर लादा गया है और जो वर्तमान में समुद्र में है, लेकिन गंतव्य बंदरगाह पर खरीदार को अभी तक वितरित नहीं किया गया है, उसे ‘ऑयल ऑन वॉटर’ कहा जाता है। पश्चिमी देशों द्वारा हाल ही में लगाए गए प्रतिबंधों के कारण, इस तरह की शिपमेंट की मात्रा में भारी वृद्धि हुई है। भारत की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) से भी अपने अनुमानित 25 दिनों के स्टॉक का उपयोग करने की उम्मीद है।
सोमवार को भारत के तेल मंत्रालय ने कहा कि देश में प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और सामर्थ्य सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) ने सरकार और सरकारी ऊर्जा कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कच्चे तेल, एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति स्थिति की समीक्षा की। मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में यह जानकारी दी।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और भारत के तेल मंत्रालय को भेजे गए प्रश्नों का खबर लिखे जाते समय तक कोई उत्तर नहीं मिला है।
येस सिक्योरिटीज के अनुमानों के अनुसार, पश्चिम एशिया में संकट भारत के लिए गंभीर ऊर्जा सुरक्षा जोखिम पैदा करता है क्योंकि देश की लगभग 83 प्रतिशत तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) आपूर्ति, लगभग 51 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति और 56 प्रतिशत तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात होर्मुज से जुड़े मार्गों के माध्यम से प्राप्त होती हैं।
सोमवार को पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ गया, जब ईरान ने अमेरिका और इजरायल के नेतृत्व में हुए सैन्य हमलों के जवाब में जवाबी हमले किए। कच्चे तेल की कीमतें सोमवार को कारोबार शुरू होने के समय लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि शिपिंग कंपनियां होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से बचने की कोशिश कर रही हैं, इसलिए पश्चिम एशिया से आने वाले माल को भारतीय तट तक पहुंचने के लिए केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा मार्ग तय करना पड़ सकता है। तीसरे अधिकारी ने कहा, ‘यदि वैकल्पिक मार्ग अपनाया जाता है, तो भारत को खाड़ी देशों से आने वाली आपूर्ति का केवल एक-चौथाई हिस्सा ही प्राप्त होगा। हमें उम्मीद नहीं है कि होर्मुज स्ट्रेट कुछ दिनों से अधिक समय तक बंद रहेगा। ट्रंप समेत कोई भी ऐसा नहीं चाहेगा।’
बढ़ते तनाव के बावजूद, अधिकारियों ने कहा कि प्रतिबंधों का उल्लंघन करने से बचने के लिए फिलहाल रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता बढ़ाने पर सक्रिय रूप से विचार नहीं किया जा रहा है। हर कंपनी की जोखिम लेने की क्षमता अलग-अलग होती है। हर तरह से स्वच्छ (रूसी) तेल कार्गो प्राप्त करना एक चुनौती है। एचपीसीएल, मंगलूर रिफाइनरी ऐंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (एचएमईएल) सहित भारतीय रिफाइनरियों ने हाल के महीनों में रूसी कच्चे तेल की खरीद नहीं की है।