एयर इंडिया एक्सप्रेस के प्रबंध निदेशक (एमडी) आलोक सिंह पांच साल के कार्यकाल के बाद मार्च में पद छोड़ देंगे। इस दौरान विमानन कंपनी में निजीकरण, एयरएशिया इंडिया के साथ विलय, बेड़े का विस्तार और टाटा समूह के तहत ब्रांड का नवीकरण जैसे कई बड़े बदलाव हुए। सोमवार को कर्मचारियों को लिखे नोट में सिंह ने कहा कि विमानन कंपनी में उनका कार्यकाल 19 मार्च को समाप्त हो जाएगा और उन्होंने महत्त्वपूर्ण परिचालन और संगठनात्मक परिवर्तन की अवधि के दौरान कर्मचारियों के योगदान के लिए धन्यवाद भी दिया।
उन्होंने लिखा, ‘हम मिलकर विमानन कंपनी को परिभाषित परिवर्तन के दौर से लेकर गुजरे है – एक जटिल विलय, एक जटिल एकीकरण, एक नया ब्रांड बनाने और बेड़े को चार गुना बढ़ाने में मार्गदर्शन किया।’
उन्होंने कहा कि विमानन कंपनी ‘एक छोटे स्तर, परिचालन वाली कंपनी से बढ़कर भारत की तीसरी सबसे बड़ी नैरो-बॉडी वाली परिचालक बन गई है, जिसके पास 100 से अधिक विमानों का बेड़ा है, देश भर में परिचालन है और 14 अंतरराष्ट्रीय गंतव्य हैं तथा लगभग 8,300 कर्मचारियों का कार्यबल है। सिंह ने यह भी कहा कि कैप्टन हैमिश मैक्सवेल विमानन कंपनी के नए ‘अकाउंटेबल मैनेजर’ के रूप में पदभार संभालेंगे।
किसी विमानन कंपनी में अकाउंटेबल मैनेजर विमानन नियमों के तहत ऐसा नामित वरिष्ठ अधिकारी होता है, जिसके पास यह सुनिश्चित करने की समूची जिम्मेदारी होती है कि कंपनी सुरक्षा, परिचालन और नियामकीय आवश्यकताओं का पालन करती है। सिंह को 9 नवंबर, 2020 को सरकारी स्वामित्व वाली तत्कालीन एयर इंडिया एक्सप्रेस का मुख्य कार्यकारी नियुक्त किया गया था। उस समय विमानन क्षेत्र वैश्विक महामारी कोविड-19 के परिचालनगत और वित्तीय असर से जूझ रहा था। उन्होंने यात्रा प्रतिबंधों और मांग में अस्थिरता की अवधि के दौरान विमान कंपनी के परिचालन से संबंधित योजना की देखरेख की।