ईरान युद्ध के बीच बदलते गठबंधनों से भारत की कूटनीति पर बढ़ा दबाव
वर्ष 2023 में मैं सिंगापुर में पश्चिम एशिया पर आयोजित एक सम्मेलन में शामिल हुआ था। वहां खाड़ी देशों, अमेरिका और इजरायल के प्रतिभागी खुद ही अपनी पीठ थपथपा रहे थे। उस क्षेत्र ने एक हद तक शांति और सुरक्षा हासिल कर ली थी। सितंबर 2020 में संपन्न अब्राहम समझौते ने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, […]
पश्चिम एशिया संघर्ष और बहुध्रुवीय मौद्रिक व्यवस्था की संभावनाएं
पश्चिम एशिया में युद्ध ने न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है बल्कि इसने दुनिया के वित्तीय और मुद्रा बाजारों में भी महत्त्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इसने एक ऐसे रुझान को बढ़ाया है जो पिछले कुछ वर्षों से स्पष्ट दिखाई देने लगा है और ऐसे संकेत दिख रहे हैं कि कुछ देश धीरे-धीरे अमेरिकी […]
चीन ने AI में अपनाया अलग रास्ता: लेट-मूवर एडवांटेज से मिल सकता है फायदा
शांघाई में एक हालिया सम्मेलन में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में चीन की रणनीति की झलक देखने को मिली। आयोजन में चीन के एआई संबंधी प्रयासों के अगुआ एकत्रित हुए जो इसके विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और राज्य तथा निजी निगमों के नेटवर्क से संबद्ध हैं। वे यह चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए थे […]
क्या दुनिया फिर औपनिवेशिक मानसिकता की ओर बढ़ रही है?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी हैं, उन्होंने 14 फरवरी को म्युनिख सुरक्षा सम्मेलन में जो बहुप्रतीक्षित भाषण दिया उससे शायद ज्यादातर यूरोपीय श्रोताओं ने राहत की सांस ली होगी। लेकिन ग्लोबल साउथ के उत्तर-औपनिवेशिक और विकासशील देशों के लिए यह गंभीर चिंता का कारण होना चाहिए। उनके वक्तव्य में विजय, […]
डॉलर के दबदबे को चुनौती देती चीन की मुद्रा रणनीति, भारत के लिए छिपे हैं बड़े सबक
बीते कई सालों से चीन के नीति-निर्माता इस बात के लिए जूझते रहे हैं कि चीन की मुद्रा रेनमिनबी (आरएमबी) का अंतरराष्ट्रीयकरण किया जाए और उसे अमेरिकी डॉलर के समक्षा खड़ा किया जा सके। उसके नेता वित्तीय जोखिम और उतार-चढ़ाव के डर से पूर्ण परिवर्तनीयता और एक बाजार आधारित विनिमय दर की इजाजत देने के […]
अमेरिका ने वैश्विक नेतृत्व से कदम पीछे खींचे, हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका जारी रहने के संकेत
कई सप्ताह पहले ऐसी खबर आई थी कि ट्रंप प्रशासन एक राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (एनएसएस) दस्तावेज पर काम कर रहा है जो राष्ट्रपति के रूप में उनके शेष कार्यकाल के दौरान विदेश नीति और रक्षा नीति को लेकर उनके इरादे दर्शाएगा। इसे जारी करने में कुछ देरी ही हुई क्योंकि दस्तावेज के प्रस्तावों पर विभिन्न […]
मजबूत चीन, कमजोर अंदरूनी हालात: सीपीसी की बैठक ने खोले बड़े राजनीतिक संकेत
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की 20वीं केंद्रीय समिति (सीसी) का चौथा पूर्ण अधिवेशन 23 से 25 अक्टूबर 2025 तक पेइचिंग में आयोजित किया गया। यह अधिवेशन कई मायनों में महत्त्वपूर्ण था क्योंकि इसमें ‘आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए 15वीं पंचवर्षीय योजना (एफवाईपी) 2026-2030 तैयार करने से संबंधित सिफारिशें स्वीकार कर ली गईं’। पूर्ण […]
पेरिस शिखर सम्मेलन के एक दशक बाद, बिखर गए दुनिया के जलवायु वादे
आज से 33 वर्ष पहले 1992 में मैं भी उस भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा था जो रियो डी जेनेरियो में अंतिम दौर की वार्ता में शामिल हुआ। यह संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) के रूप में सामने आया। यह वैश्विक जलवायु परिवर्तन के आसन्न संकट से निपटने का एक बहुपक्षीय प्रयास था। विकासशील […]
नेपाल की उथल-पुथल, भारत के लिए सबक: दक्षिण एशियाई एकीकरण पर पुनर्विचार
हाल ही में श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में हुई हिंसक घटनाओं का एक बड़ा कारण युवा पीढ़ी के लिए विकास और रोजगार के अवसरों की कमी रहा है। यह युवा पीढ़ी अधिक शिक्षित है, क्षेत्रीय और वैश्विक रुझानों से अधिक परिचित है और इंटरनेट एवं सोशल मीडिया की बदौलत आपस में और व्यापक दुनिया के […]
यूरोप से सबक: ‘अंगूठी चूमने’ से डॉनल्ड ट्रंप का समर्थन नहीं मिलता
एक बाहरी पर्यवेक्षक के लिए यह देखना कष्टप्रद था कि गत सोमवार को वाॅशिंगटन में यूक्रेन मुद्दे को लेकर हुई बैठक में दुनिया के कुछ सर्वाधिक ताकतवर देशों के नेता अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के समक्ष चापलूसी का प्रदर्शन कर रहे थे। इस बैठक में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमिर जेलेंस्की के अलावा सात अन्य प्रमुख […]









