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SEBI ने 30 दिन पुराने प्राइस डेटा के इस्तेमाल का दिया प्रस्ताव, शिक्षा और जागरूकता बढ़ाने का प्रयास

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इसका मकसद बाजार डेटा का दुरुपयोग रोकना और शैक्षिक सामग्री की प्रासंगिकता के बीच संतुलन बनाना है

Last Updated- January 06, 2026 | 9:31 PM IST
SEBI
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शैक्षिक और निवेशक जागरूकता गतिविधियों के लिए सूचीबद्ध कंपनियों के प्राइस डेटा को साझा करने और उनका उपयोग करने के लिए 30 दिन की समान अवधि का प्रस्ताव दिया है। इसका मकसद बाजार डेटा का दुरुपयोग रोकना और शैक्षिक सामग्री की प्रासंगिकता के बीच संतुलन बनाना है। बाजार नियामक ने ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म, ऐप और वेबसाइटों के प्रसार को रोकने के प्रयास में प्राइस डेटा के इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर कई मसौदे जारी किए हैं।

मंगलवार को जारी एक परामर्श पत्र में सेबी ने कहा कि इस प्रस्ताव का मकसद उस ढांचे में स्प्ष्टता और एकरूपता लाना है जिसके तहत केवल शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं द्वारा शेयर बाजार के भावों के आंकड़ों के उपयोग को नियंत्रित किया जाता है। नियामक ने इस प्रस्ताव पर 27 जनवरी  तक लोगों से टिप्पणियां मांगी हैं।

अभी शैक्षिक मकसदों के लिए प्राइस डेटा के उपयोग को नियंत्रित करने वाले दो अलग-अलग परिपत्र हैं। मई 2024 के एक परिपत्र के अनुसार शेयर बाजारों को शिक्षा और जागरूकता गतिविधियों के लिए कम से कम एक दिन के अंतराल के साथ भावों के आंकड़े साझा करने की इजाजत है जबकि जनवरी 2025 के एक परिपत्र में यह कहा गया है कि विशुद्ध रूप से शिक्षा से जुड़े संस्थान भावों के आंकड़ों का उपयोग तभी कर सकते हैं जब वह कम से कम तीन महीने पुरानी हो। सेबी ने कहा कि, हालांकि दोनों परिपत्रों का मकसद अलग-अलग है, लेकिन उनके एक साथ लागू होने से हितधारकों के बीच भ्रम की स्थिति हो गई है।

नियामक ने कहा कि शिक्षा के लिए लाइव या लगभग वास्तविक समय के प्राइस डेटा का उपयोग करने से निवेशक शिक्षा और निवेश सलाहकार या अनुसंधान गतिविधियों के बीच की रेखा धुंधली हो सकती है क्योंकि आगे के उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाने के लिए मौजूदा कीमतों का विश्लेषण करना विनियमित सलाहकार कार्यों के तहत आता है।

सेबी ने कहा कि उसे यह प्रतिक्रिया मिली थी कि एक दिन का अंतराल बहुत कम है और इससे एक्सचेंज डेटा का दुरुपयोग हो सकता है, जबकि तीन महीने के अंतराल से शैक्षिक सामग्री उतनी असरदार नहीं रह पाती। 

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First Published - January 6, 2026 | 9:31 PM IST

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