रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में मंगलवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। यह पिछले 19 महीनों में एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट है। रूसी तेल की खरीद को लेकर विवाद और हालिया बढ़त के बाद मुनाफावसूली के चलते शेयरों में भारी गिरावट आई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 4.4 फीसदी गिरकर 1,508 रुपये पर बंद हुए। यह 4 जून, 2024 के बाद सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट है। रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण 95,407 करोड़ रुपये घट गया।
पिछले सप्ताह एक समाचार रिपोर्ट में दावा किया गया था कि रूसी कच्चे तेल से भरे कम से कम तीन टैंकर भारत के पश्चिमी तट पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के संयंत्र को अपना अगला गंतव्य बता रहे हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस रिपोर्ट का खंडन किया। मंगलवार को एक अद्यतन समाचार रिपोर्ट में कहा गया कि रिलायंस से जुड़े रूसी तेल कार्गो को कहीं और उतार दिया गया।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में गिरावट का एक कारण नए उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद मुनाफावसूली भी थी। सोमवार के सत्र में शेयर ने नया रिकॉर्ड बनाया था। 2025 में निफ्टी के 10.5 फीसदी की बढ़त के मुकाबले रिलायंस के शेयर में 29 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका ने कहा, बाजारों में समग्र माहौल कमजोर है। बड़ी कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली हो रही है। रूसी तेल की खरीद को लेकर खबरें और प्रतिबंधों की ट्रंप की नई धमकी अनिश्चितता और बिकवाली का दबाव बढ़ा रही है, जबकि शेयर हाल में नए उच्च स्तर पर पहुंचे हैं। हम रिलायंस को लेकर आशावादी हैं। अगर कमजोर बाजार के माहौल में कोई भी खराब खबर आती है तो इससे घबराहट में बिकवाली हो सकती है।
खुदरा क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर विश्लेषकों की चेतावनियों और सीएलएसए द्वारा रिलायंस को अपने पोर्टफोलियो से हटाने के फैसले का भी बाजार के सेंटिमेंट पर असर पड़ा। सीएलएसए ने मंगलवार को एक रणनीति नोट में कहा कि वे भारत केंद्रित पोर्टफोलियो में इटर्नल और डीमार्ट को शामिल कर रहे हैं और रिलायंस और नेस्ले से बाहर निकल रहे हैं। समग्र उपभोग में कमजोरी और खुदरा क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के असर की चिंताएं भी बाजार के सेंटिमेंट पर हावी रहीं।
सिटी ने एक नोट में टाटा समूह के ट्रेंट पर चिंता जताई कि इस क्षेत्र में तीव्र प्रतिस्पर्धा मौजूदा कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी को कम कर रही है। रिलायंस का खुदरा कारोबार उसके कुल बाजार पूंजीकरण में बड़ा योगदान देता है। विश्लेषकों का कहना है कि निकट भविष्य में आने वाली चुनौतियों के बावजूद वे कंपनी के प्रति आशावादी बने हुए हैं।
इक्विनॉमिक्स के संस्थापक चोकालिंगम ने कहा, रिलायंस के राजस्व में तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल्स का योगदान घट रहा है। कंपनी समझदारी से एफएमसीजी, नई ऊर्जा और डिजिटल कारोबार में विविधता ला रही है और दीर्घकालिक संभावनाओं के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है।