facebookmetapixel
भारत ने अमेरिका के बयान को किया खारिज, कहा: PM मोदी ने ट्रंप से 2025 में आठ बार फोन पर बातचीत कीकेंद्र सरकार ग्रोक चैटबॉट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर कर रही विचार, IT मंत्रालय कर रहा समीक्षाQ3 में मुनाफा कम मगर आय वृद्धि को दम: कॉरपोरेट इंडिया की मिली-जुली तस्वीरED छापे के खिलाफ ममता बनर्जी ने निकाली 10KM लंबी रैली, भाजपा और अमित शाह पर लगाए गंभीर आरोपउत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल की मंडियों में आलू की कीमतें तेजी से गिरीं, किसानों को नहीं मिल रही लागतटैरिफ तनाव से बाजार धड़ाम: सेंसेक्स-निफ्टी में तीन महीने की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावटESOP प्रस्तावों पर Groww कर रही विरोध का सामना, गवर्नेंस पर उठे सवालमौसम, मजदूर व लागत की मार: दार्जिलिंग चाय पर गहराया संकट, 2025 में पैदावार और घटने के स्पष्ट संकेतबैंकों में पड़ी लावारिस जमा राशि पर सरकार सख्त, 14 जनवरी से दावे निपटान की रफ्तार का होगा आकलनUnion Budget 2026 से बड़ी उम्मीद, खपत बढ़ाने और MSMEs को रफ्तार देने पर हो जोर: निर्मल के. मिंडा

SEBI ने 30 साल पुराने स्टॉक ब्रोकर नियमों में बड़ा बदलाव कर उद्योग को दी राहत, अब दोहराव होगा कम

इसके तहत नियामक कई मामलों में लचीला रुख मुहैया कराएगा जिनमें दूसरे वित्तीय नियामकों के ढांचे के तहत गतिविधियां शामिल हैं

Last Updated- January 06, 2026 | 9:18 PM IST
SEBI
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

बाजार नियामक ने 30 साल पुराने स्टॉक ब्रोकर नियमों में बदलाव किए हैं। इसके बाद व्यापक छूटें मिल सकती हैं और ये उससे भी अधिक हो सकती है जिनका परामर्श पत्र में प्रस्ताव नहीं है। इसके तहत नियामक कई मामलों में लचीला रुख मुहैया कराएगा जिनमें दूसरे वित्तीय नियामकों के ढांचे के तहत गतिविधियां शामिल हैं। 

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने दिसंबर 2025 की अपनी बोर्ड बैठक में स्टॉक ब्रोकर नियमनों की समीक्षा को मंजूरी दे दी थी। उसने नियमन का आकार 59 पृष्ठ से घटाकर 29 पृष्ठ कर दिया था। अंतिम नियमन और अधिसूचना का इंतजार है। नियामक ने अगस्त 2025 में इस मसले पर परामर्श पत्र जारी किया था। अब इसमें उद्योग जगत से मिले कई सुझावों को शामिल किया गया है।

बोर्ड की बैठक में हुई चर्चाओं के दस्तावेज में कहा गया है, स्टॉक ब्रोकरों को अन्य वित्तीय नियामकों या किसी अन्य प्राधिकरण के नियामक ढांचे के तहत गतिविधियों की अनुमति देने के लिए एक सक्षम प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव है। ये गतिविधियां अलग कारोबारी इकाई (एसबीयू) के माध्यम से की जा सकती हैं। 

इससे पहले सेबी ने एसबीयू पर एक परिपत्र जारी किया था, विशेष रूप से गिफ्ट सिटी में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) में स्टॉक ब्रोकरों को परिचालन की अनुमति देने के लिए।

अंतिम नियमों में निजी कारोबार और ग्राहकों की ओर से किए जाने वाले कारोबार में स्पष्टता लाने के लिए प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग की परिभाषा में संशोधन भी शामिल हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, कर्मचारी शब्द की परिभाषा को भी हटाया जाएगा, ताकि इस शब्द का स्वाभाविक अर्थ समझा जा सके। 

क्वालिफाइड स्टॉक ब्रोकर (क्यूएसबी) के रूप में पात्र होने के मानदंडों में भी संशोधन किया जा रहा है, जिसमें अनुपालन स्कोर और शिकायत निवारण स्कोर जैसे मानदंडों को हटा दिया गया है। विशेष मामलों में नियमनों के प्रवर्तन से छूट के लिए सेबी 12 महीने की समय अवधि को हटा सकता है और अगर अतिरिक्त समय की आवश्यकता हो तो ब्रोकरों को योजना के परीक्षण के लिए लचीलापन दे सकता है।

परामर्श पत्र में सेबी ने नियामकीय सैंडबॉक्स के लाइव वातावरण के लिए सीमित विस्तार का प्रस्ताव रखा था जो 12 महीने से अधिक नहीं होगा। सैंडबॉक्स में  नई योजनाएं, प्रक्रियाएं, सेवाएं, कारोबारी मॉडलों का परीक्षण शामिल है। एक अन्य बड़ा बदलाव स्टॉक ब्रोकर या क्लियरिंग सदस्य द्वारा शुल्क भुगतान में चूक होने पर ब्याज दर में संशोधन है। आयकर अधिनियम के अनुसार इसे मौजूदा 15 फीसदी सालाना ब्याज दर से संशोधित करके प्रति माह 1 फीसदी किया जा सकता है।

इसके अलावा, धोखाधड़ी या बाजार दुरुपयोग की रोकथाम और पता लगाने के लिए संस्थागत तंत्र को लागू करने की जवाबदेही निदेशक मंडल और ऑडिट समिति पर तय की जाएगी।

धोखाधड़ी या बाजार दुरुपयोग की रोकथाम और पता लगाने के लिए संस्थागत तंत्र के संबंध में संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्टिंग की अवधि को भी धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के अनुरूप किया जा सकता है। पंजीकरण सरेंडर करके स्टॉक ब्रोकर के बाहर निकलने की प्रक्रिया को भी नियामक सुगम बना सकता है, जिस पर अभी प्रशासनिक काम चल रहा है। संशोधित नियमन का मकसद दोहराव कम करना और भाषा को सरल बनाना है।

First Published - January 6, 2026 | 9:18 PM IST

संबंधित पोस्ट