वित्त मंत्रालय एक उच्च स्तरीय बैठक में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा लावारिस संपत्तियों के निपटान में की गई प्रगति की समीक्षा बुधवार 14 जनवरी को करने जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर यह जानकारी दी।
अधिकारी ने कहा, ‘वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) में संयुक्त सचिव (बैंकिंग) की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता (डीईए) कोष में स्थानांतरित लावारिस जमा राशि की स्थिति और बैंकों में दावों के निपटान की गति का आकलन किया जाएगा।’अधिकारी ने आगे कहा कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा में भाग लेंगे।
खबर प्रकाशित होने के लिए जाने तक इस सिलसिले में वित्त मंत्रालय को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला था।
अधिकारी ने आगे उल्लेख किया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 31 मार्च, 2025 तक 63,939 करोड़ रुपये की लावारिस जमा राशि को डीईए फंड में स्थानांतरित कर दिया था। सरकारी सूत्रों ने कहा कि 25 सितंबर से 31 अक्टूबर, 2025 के बीच एक महीने की दावा निपटान अवधि के दौरान बैंक 1071 करोड़ रुपये के दावों को निपटाने में सफल हुए थे। व्यक्तिगत ऋणदाताओं में दावों के निपटान में स्टेट बैंक का हिस्सा सबसे अधिक था, जिसने 760.7 करोड़ रुपये के दावे स्वीकार किए गए। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक डीईए फंड में 20,225 करोड़ रुपये स्थानांतरित किए गए थे।