बजट 2026-27 अनिवार्य रूप से मांग और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को निरंतर वृद्धि देने वाला होना चाहिए। ऐसा विशेष तौर पर वैश्विक अनिश्चितता से निपटने के लिए किया जाए। एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने नई दिल्ली में रुचिका चित्रवंशी से बातचीत में यह भी कहा कि भारत अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त नहीं गंवाए और नई श्रम संहिताओं के तहत वेतन को क्रमिक ढंग से बढ़ाने की जरूरत है। पेश हैं मुख्य अंश:
सरकार को मौजूदा माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों के बाद प्रस्तावित बजट में क्या अधिक सुधार करने चाहिए?
जीएसटी और आयकर सुधार दोनों से ही खर्च करने की क्षमता बेहतर हुई है। लोग अपने से शिक्षा और स्वास्थ्य पर अब कहीं अधिक खर्च कर रहे हैं। सरकार को इन दो क्षेत्रों में अधिक खर्च करना चाहिए। इससे उपभोक्ताओं को अधिक धन मिल सकेगा। आगामी बजट में उपभोक्ता मांग और आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। इससे मार्केट और आर्थिक वृद्धि बेहतर हो पाएगी। नौकरी की सुरक्षा भी चिंता का विषय है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि विश्व की अर्थव्यवस्था में भारत चमकता सितारा है। लेकिन कारोबार की आसानी, एमएसएमईके लिए विशेष तौर पर प्रक्रिया को आसान करना अनिवार्य है।
एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए क्या सुझाव हैं?
एमएसएमई क्षेत्र को धन जुटाने, बहुमंजिला फैक्टरी की आवश्यकता है। इन बहुमंजिला फैक्टरियों में उपकरण या मशीन लगाकर (प्लग ऐंड प्ले) शीघ्र उत्पादन किया जा सके। सरकार को शुल्क की मार झेल रहे क्षेत्रों में विशेष तौर पर वस्त्र, रत्न व आभूषण और समुद्री खाद्य को समयबद्ध मदद देनी चाहिए। हमें बिजली और लागत को कम करने के लिए पहलों का विस्तार करना चाहिए। इसके तहत एमएसएमई के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के वितरण को बढ़ावा दिया जाए, डिजिटल आधारभूत ढांचे व खाता एग्रीगेटरों का उपयोग करके अधिक नकदी ऋण मुहैया करवाया जाए। सरकार एमएसएमई के लिए ऋण की लागत घटाए। इसके तहत एमएसएमई को ऋण प्रदान करने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को लक्षित ऋण प्रदान किया जाए।
उद्योग जगत नए श्रम कानूनों से वेतन पर पड़ने वाले प्रभाव की चिंताओं को कैसे हल कर रहा है?
मुख्य चिंता लागत को लेकर है। दरअसल भारत का सबसे बड़ा श्रम की लागत का लाभ है। इसमें कोई शक नहीं कि श्रम पर अधिक पैसा खर्च करना होगा। हालांकि यह तर्कसंगत होना चाहिए अन्यथा हम चीन में श्रम लागत बढ़ने दौरान अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को कमजोर कर सकते हैं। वेतन में वृद्धि चरणबद्ध तरीके से होनी चाहिए, अचानक नहीं। वेतन 3-4 वर्षों की अवधि में बढ़ाया जा सकता है। हमने इस संबंध में सरकार को अपने सुझाव दिए हैं।
क्या उद्योग के लिए एआई बड़ी चिंता है?
भारत ने डिजिटलीकरण के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण प्रगति की है। चिंता नौकरी को लेकर इतना नहीं है जितना विशेष तौर पर निर्यात के लिए उत्पाद की गुणवत्ता से संबंधित है। एआई का उपयोग उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जाए, न कि नौकरी की कटौती के लिए। हमें एआई का इस्तेमाल गुणवत्ता, लागत व निर्यात बढ़ाने के लिए करना चाहिए।