facebookmetapixel
42% चढ़ सकता है महारत्न कंपनी का शेयर, ब्रोकरेज ने बढ़ाया टारगेट; Q3 में ₹4011 करोड़ का हुआ मुनाफाईरान की ओर बढ़ रहा है ‘विशाल सैन्य बेड़ा’, ट्रंप ने तेहरान को फिर दी चेतावनीदुनिया में उथल-पुथल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के क्या हाल हैं? रिपोर्ट में बड़ा संकेत30% टूट चुका Realty Stock बदलेगा करवट, 8 ब्रोकरेज का दावा – ₹1,000 के जाएगा पार; कर्ज फ्री हुई कंपनीसिर्फ शेयरों में पैसा लगाया? HDFC MF की रिपोर्ट दे रही है चेतावनीIndia manufacturing PMI: जनवरी में आर्थिक गतिविधियों में सुधार, निर्माण और सर्विस दोनों सेक्टर मजबूतसोना, शेयर, बिटकॉइन: 2025 में कौन बना हीरो, कौन हुआ फेल, जानें हर बातट्रंप ने JP Morgan पर किया 5 अरब डॉलर का मुकदमा, राजनीतिक वजह से खाते बंद करने का आरोपShadowfax Technologies IPO का अलॉटमेंट आज होगा फाइनल, फटाफट चेक करें स्टेटसGold and Silver Price Today: सोना-चांदी में टूटे सारे रिकॉर्ड, सोने के भाव ₹1.59 लाख के पार

Closing Bell: बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स 605 अंक टूटकर बंद, निफ्टी 25,683 पर; रियल्टी, कंज्यूमर और ऑटो शेयरों में बड़ी गिरावट

Stock Market Closing Bell: विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, अमेरिका में टैरिफ बढ़ाने को लेकर हलचल और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आज बाजार में भारी गिरावट के मुख्य कारण रहे

Last Updated- January 09, 2026 | 4:18 PM IST
stock market
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

Stock market Update, 09 January 2026: शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। बाजार लगातार पांचवें दिन गिरा और यह सितंबर 2025 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट साबित हुई। शुक्रवार को सबसे ज्यादा बिकवाली रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऑटो शेयरों में देखने को मिली।

कारोबार बंद होने पर सेंसेक्स 604.72 अंक यानी 0.72% गिरकर 83,576.24 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 193.55 अंक या 0.75% टूटकर 25,683.30 के स्तर पर आ गया।

पूरे हफ्ते की बात करें तो निफ्टी में 2.45% और सेंसेक्स में 2.4% की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट 26 सितंबर 2025 को खत्म हुए हफ्ते के बाद सबसे खराब रही। इसी दौरान बाजार में डर दिखाने वाला इंडेक्स इंडिया VIX इस हफ्ते 15.6% उछल गया, जो मई 2025 के बाद सबसे तेज बढ़त है।

सेंसेक्स के शेयरों में एशियन पेंट्स, HCL टेक, BEL, Eternal, रिलायंस इंडस्ट्रीज और SBI सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयर रहे। वहीं NTPC, अदाणी पोर्ट्स, ICICI बैंक, भारती एयरटेल और सन फार्मा सबसे ज्यादा गिरने वालों में शामिल रहे।

ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव दिखा। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.79% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.81% की गिरावट दर्ज की गई। इनमें हिताची एनर्जी इंडिया, GE वर्नोवा एंड T&D, एलेकॉन इंजीनियरिंग, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज और गोदरेज प्रॉपर्टीज सबसे कमजोर शेयरों में रहे।

किस सेक्टर का कैसा रहा हाल?

सेक्टर के हिसाब से देखें तो निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 2.2% और निफ्टी केमिकल्स इंडेक्स 1.16% गिरकर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। दूसरी ओर, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी IT इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए।

तकनीकी तौर पर भी बाजार की हालत कमजोर बनी हुई है। निफ्टी लगातार पांचवें दिन दबाव में रहा और 25,700 के नीचे फिसल गया, साथ ही डेली चार्ट पर बेयरिश कैंडल बनी। हालांकि बीच में बाजार ने संभलने की कोशिश की, लेकिन 25,960 के पास मौजूद 50-DMA के आसपास उसे कड़ा रेजिस्टेंस मिला।

Also Read: शेयर बाजार में हड़कंप! ACC, ITC, Bata समेत 28 बड़े शेयर 52-हफ्ते के निचले स्तर पर

अब निफ्टी के लिए अगला अहम सपोर्ट 25,540 के आसपास 100-DMA पर है। अगर इंडेक्स इस लेवल के ऊपर टिका रहता है, तो 25,900 तक रिकवरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि, मोमेंटम इंडिकेटर्स और ऑस्सीलेटर डेली और वीकली दोनों चार्ट पर सेल सिग्नल दे चुके हैं, जो बाजार की अंदरूनी कमजोरी दिखाते हैं। इसके अलावा, इंडिया VIX हफ्ते में करीब 16% उछलकर 11 के पास बंद हुआ, जो निवेशकों के लिए अब भी चिंता का विषय बना हुआ है।

मार्केट में गिरावट के क्या हैं बड़े कारण?

शेयर मार्केट में इस गिरावट के कई बड़े कारण रहें। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली ने बाजार को कमजोर बनाया। बीते गुरुवार को FII ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 3,367 करोड़ रुपये निकाल लिए। यह लगातार चौथा सत्र था जब विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की, जिससे बाजार पर साफ दबाव दिखा।

इसके अलावा निवेशकों की नजर अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े फैसले पर बनी हुई है। इस फैसले में यह तय होगा कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ कानूनी हैं या नहीं। अगर अदालत इन टैरिफ को गलत ठहराती है, तो अमेरिकी सरकार को इंपोर्ट करने वाली कंपनियों को करीब 150 अरब डॉलर तक की रकम वापस करनी पड़ सकती है।

साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। ब्रेंट क्रूड बढ़कर करीब 62 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। तेल के महंगे होने से भारत का आयात खर्च बढ़ता है और महंगाई बढ़ने का दबाव बनता है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है। वहीं दूसरी ओर, रुपया डॉलर के मुकाबले 7 पैसे गिरकर करीब 89.97 के स्तर पर आ गया है।

पिछले कुछ दिनों से बाजार पर टैरिफ को लेकर चिंता फिर से बढ़ गई है। ट्रंप की ओर से संकेत मिले हैं कि रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर और सख्त टैरिफ लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा, रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने वाले नए प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी मिलने की खबरों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

First Published - January 9, 2026 | 8:06 AM IST

संबंधित पोस्ट