अमेरिका से जुड़े टैरिफ को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी दबाव देखने को मिला। इसी गिरावट के बीच बीएसई 500 इंडेक्स के 28 शेयरों ने कारोबार के दौरान अपना नया 52-हफ्ते का निचला स्तर छू लिया। इनमें सिगरेट बनाने वाली कंपनी ITC, अदाणी समूह की सीमेंट कंपनी ACC, जूता निर्माता Bata India, सरकारी कंपनियां IRCTC और Mahanagar Gas (MGL) शामिल हैं। इनके अलावा Siemens Energy, Jubilant FoodWorks, Page Industries, United Breweries, BASF India, Jyothy Labs, NCC और Whirlpool जैसी कई कंपनियों के शेयर भी आज निचले स्तर पर पहुंच गए। इन शेयरों में दिन के कारोबार के दौरान 5 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।
शुक्रवार दोपहर 12:39 बजे बीएसई Sensex 0.73 फीसदी की गिरावट के साथ 83,567 अंक पर कारोबार कर रहा था। बीते एक हफ्ते में Sensex करीब 2.6 फीसदी टूट चुका है। इससे पहले 1 दिसंबर 2025 को Sensex ने 86,159.02 का 52-हफ्ते का उच्च स्तर बनाया था। पिछले दो कारोबारी दिनों में Sensex में 1.6 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि बीएसई 500 इंडेक्स 2.1 फीसदी फिसला है।
बाजार की गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका में प्रस्तावित टैरिफ को लेकर चिंता है। एक अमेरिकी सीनेटर के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने एक द्विदलीय बिल को मंजूरी दी है, जिसके तहत रूस के साथ व्यापार जारी रखने वाले देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इसमें रूस से तेल खरीदने वाले देश भी शामिल हैं, जिससे भारत पर खतरा बढ़ गया है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है, जो ट्रंप टैरिफ की वैधता पर फैसला सुनाने वाला है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला शेयर बाजार की दिशा तय करेगा। Geojit Investments के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट डॉ. वी.के. विजयकुमार के अनुसार, इस बात की संभावना ज्यादा है कि कोर्ट का फैसला ट्रंप के खिलाफ जाए। अगर सुप्रीम कोर्ट टैरिफ को पूरी तरह अवैध घोषित करता है, तो भारत में बाजार में तेजी आ सकती है, क्योंकि भारत इन टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है।
8 जनवरी 2026 को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शेयर बाजार में करीब 3,367 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र रहा, जब विदेशी निवेशक बिकवाल बने रहे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 3,701 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को सहारा दिया। हालांकि, वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों का भरोसा अभी कमजोर बना हुआ है।
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व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो ITC का शेयर शुक्रवार को गिरकर 336.75 रुपये के 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया। जनवरी महीने में अब तक ITC का शेयर करीब 16 फीसदी टूट चुका है। इसकी बड़ी वजह सिगरेट पर टैक्स में भारी बढ़ोतरी है। सरकार ने 31 दिसंबर 2025 को तंबाकू और पान मसाला उत्पादों के लिए नया टैक्स ढांचा नोटिफाई किया है, जो 1 फरवरी 2026 से लागू होगा। इस टैक्स बढ़ोतरी से सिगरेट कंपनियों पर दबाव बढ़ने की आशंका है, क्योंकि इससे कानूनी और तस्करी वाली सिगरेट के दामों का अंतर और ज्यादा बढ़ सकता है।