आज के भागदौड़ भरी जिंदगी में, हम अक्सर अपनी सैलरी और करियर को लेकर खुश होते हैं, लेकिन एक चीज अक्सर हमारी नजर से छूट जाती है वो है हमारा स्वास्थ्य। महीने के 1 लाख रुपये की कमाई आपको बहुत बड़ी बात लग सकती है, लेकिन क्या यह आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा के लिए काफी है? एक्सपर्ट के मुताबिक, बढ़ती बीमारियां, लाइफस्टाइल में बदलाव और ‘अप्रत्याशित’ दुर्घटनाओं में हो रही बढ़ोतरी के चलते हेल्थ इंश्योरेंस अब सिर्फ एक फॉर्मेलिटी नहीं रहा, बल्कि यह हर सैलरीड व्यक्ति के लिए असली सुरक्षा कवच बन गया है।
सोचिए, अचानक किसी बीमारी या सर्जरी की स्थिति में हॉस्पिटल बिल लाखों में पहुंच जाए, तो सिर्फ सैलरी पर भरोसा करना कितना सुरक्षित रहेगा? यही कारण है जब एक्सपर्ट्स कहते हैं कि हेल्थ इंश्योरेंस का कवरेज तय करते समय सिर्फ आपकी इनकम को आधार नहीं बनाना चाहिए। उम्र, लाइफस्टाइल, शहर और परिवार की जरूरतें भी उतनी ही अहम हैं।
एक्सपर्ट्स की सलाह है कि 1 लाख रुपये महीने अगर आप कमाते हैं तो आपके पास एक ठीक-ठाक बेस कवरेज होना चाहिए, और जिसे जरूरत पड़ने पर सुपर टॉप-अप विकल्प के जरिए बढ़ाया जा सके। इसलिए सही पॉलिसी खरीदना जरूरी है जो आपके और आपके परिवार को भविष्य के अनचाहे खर्चों से बचा सकता है।
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आनंद राठी इंश्योरेंस ब्रोकर्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रदीप फुंडे कहते हैं कि हेल्थ इंश्योरेंस का कवरेज तय करने में केवल व्यक्ति की सैलरी देखना सही नहीं है।
वह कहते हैं, “हालांकि, किसी की इनकम तय करती है कि वह कितना प्रीमियम दे सकता है, लेकिन मेडिकल खर्च कई अन्य फैक्टर्स पर निर्भर करता है। जैसे हॉस्पिटल का खर्च, शहर, उम्र, लाइफस्टाइल और परिवार का आकार। उदाहरण के लिए, हार्ट सर्जरी या कैंसर का इलाज किसी की सैलरी के हिसाब से सस्ता या महंगा नहीं होता। इसलिए सैलरी को केवल एक सहायक फैक्टर के रूप में देखें, यह एकमात्र मापदंड नहीं होना चाहिए।”
इसी आधार पर, यदि कोई व्यक्ति 1 लाख रुपये प्रति माह कमाता है, तो फुंडे की सलाह है कि उसे कम से कम 10 से 15 लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज लेना चाहिए। यह खासतौर पर मेट्रो और टियर-1 शहरों में जरूरी है, जहां हॉस्पिटल खर्च ज्यादा होता है। इसके अलावा, लोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि हेल्थ इंश्योरेंस विकल्प समय के साथ बदलते रहते हैं। बिना प्रीमियम में अधिक बढ़ोतरी किए, कोई सुपर टॉप-अप प्लान भी ले सकता है, जिसकी रकम 20 से 50 लाख रुपये तक बेस पॉलिसी के ऊपर हो सकती है।
वही Policybazaar.com के हेल्थ इंश्योरेंस के बिजनेस हेड सिद्धार्थ सिंघल कहते हैं कि किसी भी व्यक्ति को अपने वेतन का लगभग 2 से 5% हेल्थ इंश्योरेंस में निवेश करना चाहिए।
वो कहते हैं, “यदि किसी व्यक्ति की मासिक आय 1 लाख रुपये है, तो उसे 2000 से 5000 रुपये हर साल की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेनी चाहिए। साथ ही, पॉलिसीधारक अपनी इनकम में बढ़ोतरी के साथ-साथ अतिरिक्त इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद सकता है या इंश्योरेंस के पैसे को समय-समय पर बढ़ा सकता है, ताकि स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के लिए उसे अधिकतम कवरेज मिल सके।”
फुंडे के अनुसार, हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय कुछ बुनियादी चीजों पर ध्यान देना जरूरी है। सबसे पहले यह देखना चाहिए कि संप इंश्योर्ड पर्याप्त है या नहीं। इसके अलावा, पॉलिसी में क्या-क्या शामिल है और क्या बाहर है (inclusions & exclusions), और वेटिंग पीरियड क्या है, इसे अच्छी तरह समझना चाहिए।
एक और अहम बिंदु है कि इंश्योरर का क्लेम सेटलमेंट रिकॉर्ड कैसा है। प्रीमियम का चुनाव सिर्फ टैक्स बचाने के लिए न करें, बल्कि कवरेज और फायदे के हिसाब से संतुलित होना चाहिए। इसके साथ ही नो-क्लेम बोनस, कैशलेस हॉस्पिटल नेटवर्क और टॉप-अप विकल्प जैसे फीचर्स पॉलिसी में होने चाहिए।
फुंडे ने यह भी सलाह दी कि हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने में देरी न करें और इसे अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग का अहम हिस्सा बनाएं। समय रहते सही पॉलिसी लेने से न सिर्फ इलाज के समय मदद मिलती है बल्कि भविष्य में अचानक आने वाले खर्चों से भी सुरक्षा मिलती है।
वहीं सिंघल कहते हैं कि यदि परिवार के किसी मेंबर को गंभीर बीमारी होने का खतरा है, तो बड़ा हेल्थ इंश्योरेंस लेना उनकी स्वास्थ्य देखभाल के लिए बेहतर हो सकता है।
सिंघल कहते हैं, “सैलरीड पर्सन को हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय सबसे पहले यह देखना चाहिए कि पॉलिसी में क्या-क्या कवर और फायदे मिल रहे हैं, जैसे अस्पताल में भर्ती, OPD सुविधा, प्रेगनेंसी, मानसिक स्वास्थ्य और प्रिवेंटिव सर्विसेज। साथ ही यह भी जरूरी है कि पहले से मौजूद बीमारियों को कब से कवर किया जाएगा, क्योंकि नए प्लान में अक्सर Day 1 PED कवर मिलता है। प्रीमियम इतना होना चाहिए कि आपकी सैलरी में फिट हो और लंबे समय तक आसानी से भरा जा सके, क्योंकि कम प्रीमियम वाले प्लान में खुद से खर्च ज्यादा हो सकता है।”
जबकि फुंडे कहते हैं कहते हैं कि इसके अलावा, यह देखना जरूरी है कि आपके नजदीकी भरोसेमंद अस्पताल नेटवर्क में हों और कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध हो। क्लेम प्रोसेस आसान और तेज होना चाहिए, ताकि आप समय पर पैसे प्राप्त कर सकें। इसके साथ ही, सम इंश्योर्ड और किसी भी तरह की लिमिट, जैसे रूम रेंट या सर्जरी पर कैप, की जांच भी करनी चाहिए।
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फुंडे ने यह भी कहा कि सैलरीड व्यक्ति को कंपनी द्वारा दी गई पॉलिसी पर पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह अक्सर सीमित होती है और नौकरी बदलने पर बदल सकती है। उन्होंने बताया कि पॉलिसी खरीदते समय व्यक्ति को पर्याप्त सम इंश्योर्ड चुनना चाहिए, वेटिंग पीरियड, सब-लिमिट, रूम रेंट कैप और को-पेमेंट क्लॉज को समझना चाहिए। इसके अलावा, लाइफटाइम रिन्यूअल का विकल्प लेना जरूरी है ताकि पॉलिसी उम्र बढ़ने पर भी चालू रहे।
फुंडे कहते हैं, “मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम आपका सबसे बड़ा निवेश है, खर्च नहीं। इसका मकसद सिर्फ टैक्स बचाना नहीं बल्कि परिवार और खुद की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि अपनी मेडिकल हिस्ट्री को ईमानदारी से बताना और पॉलिसी जल्दी खरीदना बाद में क्लेम से जुड़ी परेशानियों से बचाता है।
दोनों एक्सपर्ट्स इस बात से सहमत दिखते हैं कि आज के समय में, 1 लाख रुपये महीने कमाने वाले व्यक्ति के लिए कम से कम 10 से 15 लाख रुपये का बेस हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज और जरूरत पड़ने पर सुपर टॉप-अप विकल्प लेना सबसे सुरक्षित तरीका है। केवल सैलरी या कंपनी की पॉलिसी पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा सही पॉलिसी चुनना और समय पर खरीदना, निवेश के लिहाज से भी सबसे बेहतर रणनीति है और यह आपके और आपके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।