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Explainer: मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला के लोग अब किस हाल में हैं और वहां क्या चल रहा है?

वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप के बीच तेल उद्योग और अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन आम जनता अभी भी महंगाई और कठिनाइयों का सामना कर रही है

Last Updated- January 09, 2026 | 8:56 PM IST
Nicolas Maduro
वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को न्यूयॉर्क के अदालत में पेश करने ले जाते हुए सुरक्षा बल से जुड़े लोग

व्हाइट हाउस में खड़े होकर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप का बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि ये कदम देश के बुनियादी ढांचे में अरबों डॉलर डालेगा, वहां की तेल इंडस्ट्री को फिर से जिंदा करेगा और लैटिन अमेरिकी देश को समृद्धि की नई राह पर ले जाएगा। लेकिन राजधानी काराकास के एक बड़े स्ट्रीट मार्केट में काम करने वाली यूटिलिटी वर्कर एना काल्डेरोन की जिंदगी में ये वादे अभी दूर की कौड़ी लगते हैं। वो बस इतना चाहती हैं कि सूप बनाने के लिए थोड़ा सामान खरीद सकें, लेकिन कीमतें आसमान छू रही हैं। सेलेरी का दाम कुछ हफ्तों में दोगुना हो गया है, और एक किलो मीट 10 डॉलर से ज्यादा का पड़ रहा है, जो देश की महीने की न्यूनतम मजदूरी से 25 गुना ज्यादा है।

एना कहती हैं, “सब कुछ इतना महंगा हो गया है कि कुछ समझ नहीं आता।”

अमेरिका ने पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने का कदम उठाया है, जिसकी खबर सुनकर वेनेजुएलावासी हैरान हैं। लोग भविष्य की बड़ी-बड़ी बातें सुन रहे हैं, लेकिन जमीन पर हालात वही पुराने हैं। अर्थशास्त्री लुइसा पलासियोस, जो वेनेजुएला में पैदा हुईं और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के ग्लोबल एनर्जी पॉलिसी सेंटर में रिसर्च स्कॉलर हैं, कहती हैं कि लोगों को लगता है कि चीजें बदल गई हैं, लेकिन अभी सड़कों पर दमन और भ्रम ही नजर आता है।

वो बताती हैं, “लोग उम्मीद तो कर रहे हैं कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि रातोंरात सब बदल जाएगा।” पलासियोस खुद तेल इंडस्ट्री में काम कर चुकी हैं और जानती हैं कि असली बदलाव में वक्त लगता है।

वेनेजुएला के ज्यादातर लोग शहरों में रहते हैं, खासकर काराकास में, जहां कैटिया इलाके का मार्केट कभी इतना व्यस्त रहता था कि लोग एक-दूसरे से टकराते थे और ट्रैफिक से बचते थे। लेकिन अब कीमतें बढ़ने से लोग कम आ रहे हैं, और बाजार में सन्नाटा-सा छा गया है। यहां 5 महीने के बच्चे को गोद में लिए नेला रोआ सिगरेट के पैकेट बेचती हैं। उन्हें रोजाना मुद्रा के उतार-चढ़ाव पर नजर रखनी पड़ती है ताकि कीमत सही रख सकें।

नेला कहती हैं, “महंगाई, और महंगाई, साथ में मुद्रा का गिरना। सब कुछ बेकाबू हो गया है।”

मादुरो की गिरफ्तारी की खबर पर उन्हें यकीन ही नहीं हुआ। अब वो सोचती हैं कि आगे क्या होगा। उनके मुताबिक, अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए किसी चमत्कार की जरूरत है। वो कहती हैं, “हमें नहीं पता कि ये बदलाव अच्छा होगा या बुरा। हम अनिश्चितता में जी रहे हैं। देखना पड़ेगा कि ये हमारे जीवन में कितना फर्क लाएगा।”

ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला के तेल की बिक्री से मिलने वाले कुछ पैसे वहां की जनता को दिए जाएंगे। लेकिन अभी ये वादा मुख्य रूप से अमेरिका के हितों पर केंद्रित लगता है, जैसे ज्यादा तेल निकालना, अमेरिकी सामान बेचना और बिजली ग्रिड को ठीक करना। शुक्रवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक होनी है, जहां वेनेजुएला की तेल इंडस्ट्री को अमेरिकी निवेश और तकनीक के लिए और खोलने पर बात होगी। न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने माना कि तेल इंडस्ट्री को दोबारा खड़ा करने में सालों लग सकते हैं।

उन्होंने कहा, “तेल का काम थोड़ा वक्त लेगा।”

लोगों की जिंदगी: दो-तीन नौकरियां और भूखी रातें

वेनेजुएला में ज्यादातर लोग दो-तीन या इससे ज्यादा नौकरियां करके किसी तरह गुजारा कर रहे हैं, लेकिन फिर भी उनके फ्रिज और अलमारियां खाली रहती हैं। बच्चे भूख के कारण जल्दी सो जाते हैं, और माता-पिता को दवा या राशन में से एक चुनना पड़ता है। करीब 80 फीसदी लोग गरीबी की चपेट में हैं। इस वजह से लाखों लोग देश छोड़कर भाग चुके हैं। जो बचे हैं, वे रोज की मुश्किलों से जूझ रहे हैं।

मार्केट में मछली, प्याज और कारों के धुएं की मिली-जुली महक फैली रहती है। एना काल्डेरोन जैसे लोग यहां घूमते हैं, लेकिन बढ़ती कीमतों से परेशान हैं। देश की आधिकारिक मुद्रा बोलिवर तेजी से गिर रही है, जबकि अनौपचारिक रूप से डॉलर का इस्तेमाल हो रहा है। एना कहती हैं, “फर्क बहुत बड़ा है।” वह सूप के लिए सारी चीजें नहीं खरीद पाईं, तो सिर्फ सेलेरी लेकर घर लौट गईं, मीट छोड़ दिया।

वेनेजुएलावासी ऐसी मुश्किलों के आदी हो चुके हैं। वे एक शब्द इस्तेमाल करते हैं – “रिसॉल्वर”, यानी “किसी तरह जिंदगी निकाल लो”। बस में चढ़ने से लेकर बच्चे की दवा खरीदने तक हर काम में हिसाब-किताब लगाना पड़ता है। नेला रोआ जैसी महिलाएं रोज की अनिश्चितता में जी रही हैं, जहां मुद्रा का मूल्य हर घंटे बदलता है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक, वेनेजुएला की महंगाई दर 682 प्रतिशत है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। महीने की न्यूनतम मजदूरी 130 बोलिवर है, जो महज 0.40 डॉलर के बराबर है, और ये 2022 से नहीं बढ़ी। संयुक्त राष्ट्र के मानक के हिसाब से, 2.15 डॉलर प्रतिदिन से कम पर जीना अत्यधिक गरीबी है, और यहां ज्यादातर लोग उससे नीचे हैं। अप्रैल में मादुरो ने आर्थिक आपातकाल घोषित किया था, लेकिन हालात सुधरे नहीं।

विचिता स्टेट यूनिवर्सिटी की अर्थशास्त्री उषा हेले कहती हैं कि जिन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ है, उनके लिए तुरंत कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा। वो कहती हैं “छोटी अवधि में ज्यादातर वेनेजुएलावासियों को आर्थिक राहत नहीं मिलेगी। एक तेल की बिक्री से महंगाई और मुद्रा संकट ठीक नहीं होगा। नौकरियां, कीमतें और विनिमय दरें जल्दी नहीं बदलेंगी।”

Also Read: जिस तरह अमेरिका ने वेनेजुएला से मादुरो को उठा लिया, क्या उसी तरह चीन ताइवान के साथ कर सकता है?

तेल की उम्मीद: दुनिया के सबसे बड़े भंडार लेकिन गिरावट

वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े सिद्ध तेल भंडार हैं, और देश की अर्थव्यवस्था इसी पर टिकी है। 1998 में चुने गए पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज ने तेल की कमाई से सामाजिक सेवाओं को बढ़ावा दिया, जैसे घर और शिक्षा। 1999 से 2011 तक तेल की ऊंची कीमतों से करीब 981 अरब डॉलर की कमाई हुई। लेकिन भ्रष्टाचार, उत्पादन में गिरावट और गलत नीतियों से 2012 में संकट शुरू हो गया।

चावेज की 2013 में कैंसर से मौत के बाद मादुरो उनके उत्तराधिकारी बने। उनके शासन में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक संकट गहराया, तेल उत्पादन और कीमतें गिरती गईं। लाखों लोग गरीबी में धकेल दिए गए, मध्यम वर्ग लगभग खत्म हो गया, और 77 लाख से ज्यादा लोग देश छोड़ चुके हैं।

नोवा साउथईस्टर्न यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री अल्बर्ट विलियम्स कहते हैं कि तेल सेक्टर को पुरानी ऊंचाई पर लाने से पूरे देश पर असर पड़ेगा, क्योंकि ये मुख्य इंडस्ट्री है। इससे रेस्तरां, दुकानें और दूसरे कारोबार खुलेंगे। लेकिन सवाल ये है कि ऐसा होगा या नहीं, कितना वक्त लगेगा, और मादुरो की बनाई सरकार कैसे बदलेगी। “ये अरबों डॉलर का सवाल है,” वो कहते हैं। “लेकिन अगर तेल इंडस्ट्री सुधरी, तो देश सुधरेगा।”

भविष्य की अनिश्चितता: अमेरिकी हित और स्थानीय जरूरतें

ट्रंप का फोकस वेनेजुएला की तेल इंडस्ट्री को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलने पर है। बैठक में ये बात होगी कि कैसे अमेरिकी निवेश और जानकारी से वहां का संघर्षरत तेल क्षेत्र मजबूत बने। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि ये बदलाव सालों में आएगा। पलासियोस जैसे जानकार बताते हैं कि लोग उम्मीद तो रख रहे हैं, लेकिन जमीन पर दमन और भ्रम ही है।

मार्केट में नेला रोआ जैसी महिलाएं रोज की जंग लड़ रही हैं। उनके लिए महंगाई बेकाबू है, और मादुरो की गिरफ्तारी के बाद भी अनिश्चितता बनी हुई है। एना काल्डेरोन की तरह लोग सूप के लिए सेलेरी लेकर घर जाते हैं, लेकिन मीट का सपना देखते हैं। वेनेजुएला के शहरों में जीवन “रिसॉल्वर” पर टिका है, जहां हर कदम पर हिसाब लगाना पड़ता है। उषा हेले की बात मानें तो छोटी अवधि में राहत मुश्किल है, क्योंकि एक-दो तेल सौदों से महंगाई और मुद्रा संकट नहीं सुलझेगा।

विलियम्स का मानना है कि तेल सेक्टर का सुधार पूरे देश को फायदा देगा, लेकिन वक्त लगेगा। चावेज के जमाने की समृद्धि अब दूर की याद है, और मादुरो के शासन ने संकट को और गहरा किया। अब अमेरिकी हस्तक्षेप से नई शुरुआत की बात हो रही है, लेकिन काराकास के बाजारों में अभी वही पुरानी मुश्किलें हैं।

(PTI के इनपुट के साथ)

First Published - January 9, 2026 | 8:56 PM IST

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