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लेखक : नितिन देसाई

आज का अखबार, लेख

सहकारी मॉडल और एग्रीवोल्टेइक्स से बदलेगी खेती, किसानों की आय बढ़ाने यही है नया फॉर्मूला

भारत में किसान अपनी खेती की पद्धतियों को मुख्यतः पारंपरिक तरीकों में सुधार करके आगे बढ़ा रहे हैं। इसके लिए वे बेहतर बीजों, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कर रहे हैं, खेती के कामों में मशीनों का सहारा ले रहे हैं और कुछ मामलों में नई फसलों को भी अपना रहे हैं। कई किसान […]

आज का अखबार, लेख

उदारीकरण के 35 साल बाद भी विनिर्माण में पिछड़ा भारत, स्थापित घरानों के बजाय स्टार्टअप्स पर दें ध्यान

उदारीकरण का वादा और विनिर्माण की चुनौती विनिर्माण नीति में नई स्टार्टअप और तकनीकी वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। बता रहे हैं नितिन देसाई लगभग 35 वर्ष पहले वर्ष 1991 में तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने एक ऐसा बजट पेश किया था जिसने औद्योगिक लाइसेंसिंग का अंत करते हुए ‘उदारीकरण’ […]

आज का अखबार, लेख

भारत की नीतिनिर्माण प्रक्रिया को सिर्फ अनुमान नहीं, रणनीतिक परिदृश्यों पर देना होगा जोर

दुनिया में 1990 के दशक से आर्थिक प्रणाली राजनीतिक दांव-पेच से मुक्त व्यापार और वित्तीय संबंधों पर आधारित थी। इसने चीन में आर्थिक रफ्तार को तेज गति दी और भारत को भी इसका काफी फायदा मिला। विनिर्माण और व्यापार में चीन के असाधारण दबदबे और कुछ हद तक भारत के उभार से जो खुलापन आया, […]

आज का अखबार, लेख

आसान वैश्वीकरण का अंत: भारत को अपने मैन्युफैक्चरिंग मॉडल पर फिर से विचार करना होगा

बीते कुछ सप्ताह में भारत के नीति निर्माताओं को पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग के आर्थिक प्रभाव से निपटना पड़ा। खासतौर पर इसके चलते तेल एवं गैस की उपलब्धता में कमी और कीमतों में इजाफे से। युद्ध विराम ने इससे राहत दी है लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत विफल होने के बाद संकट […]

ताजा खबरें, लेख

वैश्विक दबंगई के बीच भारत की नई कूटनीति: क्या मध्यम शक्तियां रोक पाएंगी अमेरिका का मनमाना रवैया?

अल्पावधि और मध्यम अवधि में भारत की सबसे बड़ी आर्थिक और कूटनीतिक चुनौती है वैश्विक भू-राजनीतिक व्यवस्था में इस समय आ रहा बदलाव। इसकी शुरुआत अमेरिका में एक ऐसी सरकार के आगमन से हुई जो अनैतिक है, लेनदेन में यकीन करती है और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में विधि के शासन तथा बहुपक्षीयता की इज्जत नहीं करती। […]

आज का अखबार, लेख

शिक्षा, कौशल और अंतरजातीय विवाह से समाज का आधुनिकीकरण

हमारे समाज और अर्थव्यवस्था का आधुनिकीकरण परस्पर जुड़ा हुआ है लेकिन दोनों समान गति से आगे नहीं बढ़ रहे हैं। अर्थव्यवस्था जहां चार दशकों से मजबूत वृद्धि हासिल कर रही है, वहीं जाति आधारित भेदभाव और अलगाव तथा कम आय वाले नागरिकों के लिए रोजगार के कम अवसर समाज के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को धीमा […]

आज का अखबार, लेख

कठिन वैश्विक हालात और रोजगार दबाव के बीच बजट में क्या उम्मीदें?

इस सप्ताह के अंत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी। पुराने अनुभवों के आधार पर अनुमान लगाएं तो बजट प्रस्तुति का बड़ा हिस्सा उन योजनाओं के कार्यक्रम संबंधी बदलावों का ब्योरा होगा जो सीधे वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी नहीं हैं बल्कि अन्य मंत्रालयों की हैं। वास्तव में महत्त्वपूर्ण वे निर्णय हैं जो बजट […]

आज का अखबार, लेख

चीन की आर्थिक वृद्धि बताती है कि सरकारी समर्थन नए उद्यमों पर केंद्रित क्यों होना चाहिए

वर्ष1978 में चीन में तंग श्याओफिंग ने एक नया विकास मॉडल प्रस्तुत किया। एक केंद्रीय नियोजित, सरकारी क्षेत्र पर बल देने वाली तथा अंतर्मुखी अर्थव्यवस्था को बदलकर एक ऐसी व्यवस्था बनाई गई जो विदेशी कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करने, स्थानीय निजी कंपनियों को प्रोत्साहित करने तथा तीव्र निर्यात वृद्धि पर आधारित थी। भारत […]

आज का अखबार, लेख

इन्फोटेक विकास का नया दौर: रोजगार और निर्यात से आगे बढ़कर इनोवेशन पर हो जोर

मेरा पिछला स्तंभ इंटरनेट के अंतरराष्ट्रीय संचालन पर केंद्रित था। इस बार मैं भविष्य के सूचना प्रौद्योगिकी विकास को लेकर भारत की राष्ट्रीय रणनीति की बात करूंगा। बीते साढ़े तीन दशक से अधिक समय में देश में सबसे महत्त्वपूर्ण प्रगति नवीन सूचना और संचार सेवाओं की उपलब्धता में हुई है। ये दोनों विषय आपस में […]

आज का अखबार, लेख

वैश्विक इंटरनेट की चुनौती: एआई युग में नए शासनिक सहमति की जरूरत

बीते कुछ दशकों में जो सबसे अहम तकनीकी उन्नति नजर आई है वह नई सूचना प्रौद्योगिकी के विकास से संबंधित है। वर्ष 1990 में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की कुल संख्या करीब 30 लाख थी। इनमें भी अधिकांश लोग अमेरिका में थे। तब से अब तक इंटरनेट के इस्तेमाल में अभूतपूर्व इजाफा हुआ है […]

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