विनिर्माण को रफ्तार देने की दरकार
भारत में विनिर्माण क्षेत्र की मौजूदा रफ्तार एवं दिशा क्या देश की अर्थव्यवस्था को 2047 तक विकसित बनाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए काफी है? 2023-24 में सकल मूल्य वर्द्धन (जीवीए) में विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा वर्तमान मूल्यों पर 14 प्रतिशत था। अगर हम वर्तमान मूल्यों पर पांच वर्षों के औसत जीवीए पर विचार […]
Budget 2025-26: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण की प्राथमिकताएं
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसी हफ्ते 2025-26 का बजट पेश करेंगी। पुराने रुझान देखें तो उनके भाषण का बड़ा हिस्सा विकास कार्यक्रमों और अन्य मंत्रालयों द्वारा क्रियान्वित की जाने वाली योजनाओं के बारे में होगा। गत वर्ष वित्त मंत्री के बजट भाषण में 165 पैराग्राफ शामिल थे और इनमें से ज्यादातर में व्यय प्रस्तावों की […]
नेहरूवादी मानवतावाद और भारत का विकास
नेहरू के युग (1950-64) में लागू विकास नीति की आलोचना राजनीति में ही नहीं हुई है बल्कि कुछ अर्थशास्त्री भी देश के प्रदर्शन का आकलन करते समय उसकी आलोचना करते हैं। नेहरू के युग की 4 फीसदी वृद्धि दर और 1980 के बाद की 6 फीसदी वृद्धि दर के बीच का बड़ा अंतर अक्सर याद […]
औद्योगिक नीति को नया स्वरूप
नई औद्योगिक नीति केंद्र और राज्य सरकारों का संयुक्त उपक्रम होनी चाहिए। एक ऐसी नीति जो कारोबारियों के अनुकूल होने के बजाय बाजार के अनुकूल हो। बता रहे हैं नितिन देसाई वैश्विक अर्थव्यवस्था में इन दिनों सक्रिय औद्योगिक नीतियों के विस्तार का दौर है जिनके बारे में संदेह है कि वे कंपनी मालिकों को समृद्ध […]
आर्थिक असमानता और जाति का असर: शिक्षा और सामाजिक पूंजी होने के बावजूद कम आय और सीमित अवसर
किसी अर्थव्यवस्था में असमानता प्रायः लोगों को विरासत में मिली वस्तुओं में भिन्नता का नतीजा होती है। असमानता की चर्चा करने पर विरासत में मिली जिस वस्तु का जिक्र सबसे अधिक होता है वह है धन-संपत्ति। किंतु यदि सामाजिक रुतबा या ओहदा अगर आर्थिक व्यवस्था का हिस्सा बन जाए तो वह भी असमानता को जन्म […]
कॉरपोरेट प्रशासन में सुधार की दरकार, विकसित देश बनाने के लिए सरकार को बाजार के अनुकूल होने की जरूरत
आजाद भारत की अर्थव्यवस्था की बात करें तो नीतिगत बदलाव के मोर्चे पर वह दो बड़े चरणों से गुजर चुकी है। पहले की चर्चा इन दिनों ज्यादा नहीं होती और वह है अप्रैल 1951 में योजनागत विकास की शुरुआत, जब पहली पंचवर्षीय योजना शुरू की गई थी। दूसरा जुलाई 1991 में शुरू किया गया आर्थिक […]
‘विकसित भारत@2047’ के लिए वास्तविक चुनौतियां
इन दिनों सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना ‘विकसित भारत@2047’ पर काफी चर्चा हो रही है। इनमें से ज्यादातर चर्चाओं का केंद्र अगले कुछ वर्षों में 7 प्रतिशत सालाना से अधिक औसत आर्थिक वृद्धि दर हासिल करना है ताकि 2,500 डॉलर की हमारी मौजूदा प्रति व्यक्ति सालाना आमदनी बढ़कर 14,000 डॉलर के उच्च आमदनी स्तर पर पहुंच […]
विकास नीति में बढ़े वंचितों पर ध्यान
हमारी विकास संबंधी नीति का मुख्य ध्यान निर्णायक तौर पर वंचितों के लिए अवसरों के विस्तार पर केंद्रित होना चाहिए। बता रहे हैं नितिन देसाई हालिया चुनाव के नतीजे बताते हैं कि देश के मतदाता हमारी मौजूदा और भविष्य की अर्थव्यवस्था को लेकर बहुप्रचारित आशावाद को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। ऐसा भी नहीं […]
Lok Sabha Elections: नई सरकार की क्या हों प्राथमिकताएं
केंद्र में बनने वाली नई सरकार को कुछ ऐसी नीतियों का निर्माण और उन पर अमल करना चाहिए जो देश को समतापूर्ण वृद्धि प्राप्त करने में मददगार साबित हों, बता रहे हैं नितिन देसाई चु नाव में चाहे जिसकी जीत हो, नई सरकार का प्राथमिक ध्यान इस बात पर केंद्रित होगा कि चुनाव घोषणापत्र में […]
मानव विकास को प्राथमिकता जरूरी
संभावना जताई जा रही है कि वर्ष 2047 तक भारत विकसित देशों की सूची में जगह बना लेगा। इस विषय पर चर्चा भी जमकर हो रही है। परंतु, विकसित देश बनने की प्रतिष्ठा अर्जित करने के लिए भारत को विकास से संबंधित अपनी नीतियों में कई बदलाव करने होंगे। विकास नीति के अंतर्गत जिन दो […]








