संघर्ष के दौर में भारत के समक्ष चुनौतियां
इसमें दो राय नहीं कि पश्चिम एशिया में छिड़ा संघर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका देगा। इसकी वजह तेल एवं गैस पर भारत की निर्भरता भर नहीं है बल्कि देश की राजकोषीय बाधाएं और भुगतान संतुलन के मोर्चे पर संवेदनशीलता भी इसका कारण है। जैसा कि कई अर्थशास्त्रियों और मीडिया रिपोर्टों ने भी संकेत किया […]
कोविड से सबक: पश्चिम एशिया संकट सुधारों का मौका भी बन सकता है
तमाम विशेषज्ञ और विश्लेषक पश्चिम एशिया की लड़ाई की तुलना कोविड महामारी से कर रहे हैं। सरकार ने भी संसद में कहा है कि इस संघर्ष के कारण उभरे चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात भारत पर गहरा असर डालेंगे। उन्होंने देश को इन हालात से निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत पर भी बल दिया है। […]
आपदा में अवसर: तेल आयात पर निर्भरता घटाने के लिए तुरंत नीति बदलाव जरूरी
तेल संकट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कितना गंभीर है? भारत को मौजूदा हालात से क्या सबक लेना चाहिए, जब कीमतों में बढ़ोतरी और तेल-गैस की किल्लत ने आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि भारत की पेट्रोलियम कंपनियों तथा सरकार की वित्तीय स्थिति पर तेल संकट […]
सरकार को भर्ती योजनाओं की योजना और क्रियान्वयन क्षमता बढ़ानी होगी
वर्ष 2024 के आम चुनाव और नई दिल्ली में सरकार के गठन के तुरंत बाद, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और उनके विभागों में रिक्त पदों को भरने और रोजगार प्रदान करने की आवश्यकता पर काफी चर्चा हुई। संभवतः यह सत्तारूढ़ पार्टी के इस आकलन के बाद हुआ कि रोजगार की कमी उसके कमतर चुनावी प्रदर्शन के […]
16वें वित्त आयोग से दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ी, परिसीमन में अड़चनें हो सकती हैं कम
सोलहवें वित्त आयोग की रिपोर्ट गत एक फरवरी को 2026-27 के बजट की प्रस्तुति के साथ सार्वजनिक की गई थी। उसकी सिफारिशों के साथ व्यापक रूप से टिप्पणियां भी हैं। हालांकि इन टिप्पणियों में एक समान बात नजर आती है। इनसे संकेत मिलता है कि 16वें वित्त आयोग ने कुछ राज्यों की उस मांग को […]
पूंजीगत व्यय की गति और निगरानी की चुनौती
बीते कुछ वर्षों में केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय में हुए इजाफे का आकलन कई तरह से किया जा सकता है। ऐसा आकलन महत्त्वपूर्ण है क्योंकि मौजूदा वित्त वर्ष में रुझानों में काफी बदलाव आया है। वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय केवल 4.2 फीसदी बढ़ा जबकि इसके पिछले पांच सालों में हर […]
BS Exclusive: खास घटना नहीं व्यापक बुनियाद पर बना है बजट- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को व्यापार, निर्यात, विनिर्माण समेत समूची भारतीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से बहुत बड़ी घटना माना जा रहा है, जिसका देश पर बहुआयामी प्रभाव पड़ सकता है। मगर समझौते की घोषणा से एक दिन पहले केंद्रीय बजट पेश कर चुकी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मानती हैं कि समझौता कुछ वक्त पहले हो जाता […]
बजट 2026-27: राजकोषीय मजबूती के आंकड़ों के पीछे की कहानी और बाकी बड़े सवाल
वर्ष 2026 के बजट के राजकोषीय आंकड़े उम्मीदों के साथ-साथ कई सवाल भी पैदा करते हैं। जैसा कि चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान में दर्शाया गया है, सकल राजकोषीय घाटे का आंकड़ा सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का 4.4 फीसदी है और इसी में आशाएं निहित हैं। सराहनीय बात यह है कि यह लक्ष्य […]
कई मोर्चों पर ‘पहली बार’ वाला बजट, पर भविष्य के लिए अलग सोच जरूरी
वर्ष 2026-27 का आम बजट 1 फरवरी को पेश किया जाना है। इस बजट में कई ऐसी बातें शामिल होंगी जो पहली बार घटित होंगी। इनमें सबसे जाहिर बात यह है कि पहली बार बजट रविवार को पेश किया जाएगा। इससे पहले देश के किसी भी वित्त मंत्री ने रविवार को बजट नहीं पेश किया […]
टैक्स बदलाव से ज्यादा व्यय और राजकोषीय सुधारों पर केंद्रित होता आम बजट
बीते कुछ साल में केंद्रीय बजट की प्रकृति में परिवर्तन आया है। अब उनमें करों पर कम और सरकार के राजकोषीय रुख, योजनाओं और व्यय पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। बजट का मुख्य ध्यान सरकार की उन योजनाओं पर है जिनका उद्देश्य ऋण या राजकोषीय घाटे को कम करना, क्षेत्रीय नीतियों में बदलाव […]









