facebookmetapixel
Advertisement
OMC को भारी चपत: तेल कंपनियों को लगा ₹22,000 करोड़ का बड़ा झटका, बाजार से कम दाम पर बेची रसोई गैसCrude Oil Import: पश्चिम एशिया संकट की भारी चपत, बराबर तेल खरीदने के बाद भी 81.5% बढ़ा भारत का खर्चRBI Regulatory Action: विदेश से जुटाई उधारी की रोज देनी होगी जानकारी, RBI ने बैंकों को दिया कड़ा निर्देशबैंकिंग सेक्टर में हलचल! वारी रिन्यूएबल्स के बड़े सौदे को हरी झंडी, HSBC इंडिया ने दिए ₹1,255 करोड़देश के बड़े कैंसर अस्पताल HCG ऑन्कोलॉजी हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड, नियमों की अनदेखी को लेकर हुई कार्रवाईAmazon ने तय समय से पहले हासिल किया बड़ा लक्ष्य, भारत में बनी ‘वॉटर पॉजिटिव’ कंपनीमहिला श्रम शक्ति में उछाल: असंगठित क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी दो-तिहाई के पार, ई-श्रम पोर्टल पर रिकॉर्ड पंजीकरणबैंकिंग और BFSI सेक्टर में डीपफेक की एंट्री! कैसे वीडियो KYC को चकमा देकर ठग कर रहे करोड़ों की धोखाधड़ीSBI FCNR-B Scheme: SBI का NRI ग्राहकों को बड़ा तोहफा, विदेशी जमा पर मिलेगा 9 गुना तक लोनशेयर बायबैक नियमों में बड़ा बदलाव, 1 अगस्त से खुले बाजार से पुनर्खरीद को SEBI की हरी झंडी

लेखक : ए के भट्टाचार्य

आज का अखबार, लेख

पश्चिम एशिया में शांति, लेकिन भारत के लिए चुनौतियां बरकरार

अमेरिका और ईरान के समझौते के करीब पहुंचने और पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त होने की संभावनाओं से जुड़ी खबर ने बाजारों पर सकारात्मक असर डाला है। इससे होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने की उम्मीद जगी है। कच्चे तेल की कीमतों में भी कमी आई है। शेयर कीमतों ने वापसी की है। उम्मीद है कि […]

आज का अखबार, लेख

Tax Rebates: क्या FY26 के आंकड़े टैक्स रियायतों पर नए सिरे से सोचने का संकेत हैं?

इस सप्ताह जारी वित्त वर्ष 2025-26 के​ केंद्र सरकार की वित्तीय स्थिति के अस्थायी आंकड़ों की सबसे प्रमुख बात स्वाभाविक रूप से राजकोषीय घाटे से संबंधित है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार पांचवे वर्ष राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर कायम रहने में सफल रही हैं। कुछ साल तो उन्होंने इसे बेहतर ही किया है। उनके […]

आज का अखबार, लेख

केवल बाहरी खतरा नहीं, भीतर भी दें ध्यान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को ध्यान में रखते हुए भारतीयों को मितव्ययिता संबंधी कई कदम उठाने की सलाह दी है। अब केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसी रणनीतियां तैयार करनी होंगी जिनकी मदद से कच्चे तेल के बढ़े हुए दामों के कारण उनकी वित्तीय स्थिति पर पड़ने वाले राजकोषीय […]

आज का अखबार, लेख

नए स्वरूप में NITI Aayog और PMEAC भारत की अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर समझने में बन सकते हैं मददगार

अभी कुछ वर्ष पहले तक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त एक सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी को उसके समय-समय पर दिए जाने वाले लाभ संबंधी अनुमान (प्रॉफिट गाइडेंस) के कुशल प्रबंधन के लिए जाना जाता था। सामान्यत: जब कंपनी अपने तिमाही नतीजे घोषित करती, तो आने वाली तिमाहियों के लिए लाभ वृद्धि का अनुमान प्रस्तुत करती। बाद में किए […]

आज का अखबार, लेख

संघर्ष के दौर में भारत के समक्ष चुनौतियां

इसमें दो राय नहीं कि पश्चिम एशिया में छिड़ा संघर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका देगा। इसकी वजह तेल एवं गैस पर भारत की निर्भरता भर नहीं है बल्कि देश की राजकोषीय बाधाएं और भुगतान संतुलन के मोर्चे पर संवेदनशीलता भी इसका कारण है। जैसा कि कई अर्थशास्त्रियों और मीडिया रिपोर्टों ने भी संकेत किया […]

आज का अखबार, लेख

कोविड से सबक: पश्चिम एशिया संकट सुधारों का मौका भी बन सकता है

तमाम विशेषज्ञ और विश्लेषक पश्चिम एशिया की लड़ाई की तुलना कोविड महामारी से कर रहे हैं। सरकार ने भी संसद में कहा है कि इस संघर्ष के कारण उभरे चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात भारत पर गहरा असर डालेंगे। उन्होंने देश को इन हालात से निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत पर भी बल दिया है। […]

आज का अखबार, लेख

आपदा में अवसर: तेल आयात पर निर्भरता घटाने के लिए तुरंत नीति बदलाव जरूरी

तेल संकट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कितना गंभीर है? भारत को मौजूदा हालात से क्या सबक लेना चाहिए, जब कीमतों में बढ़ोतरी और तेल-गैस की किल्लत ने आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि भारत की पेट्रोलियम कंपनियों तथा सरकार की वित्तीय स्थिति पर तेल संकट […]

आज का अखबार, लेख

सरकार को भर्ती योजनाओं की योजना और क्रियान्वयन क्षमता बढ़ानी होगी

वर्ष 2024 के आम चुनाव और नई दिल्ली में सरकार के गठन के तुरंत बाद, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और उनके विभागों में रिक्त पदों को भरने और रोजगार प्रदान करने की आवश्यकता पर काफी चर्चा हुई। संभवतः यह सत्तारूढ़ पार्टी के इस आकलन के बाद हुआ कि रोजगार की कमी उसके कमतर चुनावी प्रदर्शन के […]

आज का अखबार, लेख

16वें वित्त आयोग से दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ी, परिसीमन में अड़चनें हो सकती हैं कम

सोलहवें वित्त आयोग की रिपोर्ट गत एक फरवरी को 2026-27 के बजट की प्रस्तुति के साथ सार्वजनिक की गई थी। उसकी सिफारिशों के साथ व्यापक रूप से टिप्पणियां भी हैं। हालांकि इन टिप्पणियों में एक समान बात नजर आती है। इनसे संकेत मिलता है कि 16वें वित्त आयोग ने कुछ राज्यों की उस मांग को […]

आज का अखबार, लेख

पूंजीगत व्यय की गति और निगरानी की चुनौती

बीते कुछ वर्षों में केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय में हुए इजाफे का आकलन कई तरह से किया जा सकता है। ऐसा आकलन महत्त्वपूर्ण है क्योंकि मौजूदा वित्त वर्ष में रुझानों में काफी बदलाव आया है। वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय केवल 4.2 फीसदी बढ़ा जबकि इसके पिछले पांच सालों में हर […]

1 2 3 11
Advertisement
Advertisement