टाटा स्टील साल 2030 में अपनी निजी खदानों के नीलामी में आने के बाद लौह अयस्क की बढ़ती लागत से निपटने के लिए एक नई रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत, कंपनी लौह अयस्क की सोर्सिंग के लिए विभिन्न विकल्प तलाशने के अलावा मूल्यवर्धित उत्पादों में निवेश बढ़ाने और लागत घटाने के उपायों पर विचार कर रही है।
टाटा स्टील द्वारा भारत के लिए अपनी दीर्घकालिक रणनीति के तहत कई विस्तार परियोजनाओं की घोषणा के एक दिन बाद कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी टीवी नरेंद्रन ने विश्लेषकों को बताया कि कंपनी 2030 के बाद लौह अयस्क की बढ़ती लागत के प्रभाव को कम करने पर विचार कर रही है। टाटा स्टील की पुरानी निजी खदानों की नीलामी 2030 में होगी।
नरेंद्रन ने बताया कि कलिंगनगर, मेरामांडाली और नीलाचल में टाटा स्टील के विस्तार से उन स्थानों पर वृद्धि संभव हुआ जहां कोई पुरानी क्षमता नहीं थी। उन्होंने कहा, ‘जमशेदपुर में हमारी पुरानी क्षमता है। लेकिन जैसे-जैसे हम जमशेदपुर से आगे विस्तार करते हैं पुरानी क्षमता का प्रभाव हमारे लिए कम होता जाता है।’
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बुधवार को टाटा स्टील ने कई विस्तार परियोजनाओं की घोषणा की थी, जिनमें नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (एनआईएनएल) में लंबी मात्रा वाले उत्पादों की क्षमता में 48 लाख टन की वृद्धि करने की योजना और पश्चिमी और दक्षिणी बाजारों में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए महाराष्ट्र में एक संभावित नए इस्पात संयंत्र की स्थापना शामिल है। एनआईएनएल के बारे में उन्होंने कहा कि अंतिम निवेश राशि मार्च तक तय कर ली जाएगी और अगले कुछ हफ्तों में पर्यावरण मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
इस विस्तार के साथ ही टाटा स्टील की लॉन्ग प्रोडक्ट उत्पादन क्षमता 1 करोड़ टन से अधिक हो जाएगी। फिलहाल यह करीब 54 लाख टन है। नरेंद्रन ने कहा, ‘भारत में बुनियादी ढांचे में निवेश और लॉन्ग प्रोडक्ट उत्पादन में हमारी मजबूत पकड़ को देखते हुए हमें लॉन्ग प्रोडक्ट उत्पादन क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है।’
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टाटा ने थ्रिवेनी अर्थमूवर्स प्राइवेट लिमिटेड (टीईएमपीएल) से थ्रिवेनी पेलेट्स प्राइवेट लिमिटेड (टीपीपीएल) में 50.01 फीसदी हिस्सेदारी 636 करोड़ रुपये तक के मूल्य पर हासिल करने के लिए निश्चित करार भी किया है। टीपीपीएल के पास ब्राह्मणी रिवर पेलेट लिमिटेड (बीआरपीएल) में 100 फीसदी हिस्सेदारी है, जो ओडिशा के जाजपुर में सालाना 40 लाख की क्षमता वाला पेलेट संयंत्र और 212 किलोमीटर लंबी स्लरी पाइपलाइन का संचालन करती है। एलएमईएल के पास टीपीपीएल में शेष 49.99 फीसदी हिस्सेदारी है।