भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा 27 जनवरी को हो सकती है। थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का कहना है कि यह समझौता घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंचाने की बजाय व्यापार बढ़ाएगा और लागत घटाएगा। GTRI के अनुसार, वैश्विक व्यापार में टैरिफ, भू-राजनीति और सप्लाई चेन के बदलाव के बीच भारत-EU का रिश्ता साफ-सुथरा और मजबूत दिखता है। दोनों एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि वैल्यू चेन के अलग-अलग स्तरों पर काम करने वाले साथी हैं।
GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत श्रम-केंद्रित, डाउनस्ट्रीम और प्रोसेसिंग वाले सामान निर्यात करता है, जबकि EU कैपिटल गुड्स, एडवांस टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल इनपुट्स देता है। इस वजह से FTA से लागत कम होगी और व्यापार फैलेगा, जबकि घरेलू इंडस्ट्री को कोई खतरा नहीं है। वित्त वर्ष 2025 में भारत-EU का सामान व्यापार 136 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया। टैरिफ कटौती से इनपुट कॉस्ट घटेगी, वैल्यू चेन मजबूत बनेगी और वॉल्यूम बढ़ेगा।
भारत EU को स्मार्टफोन, कपड़े, जूते-चप्पल, टायर, दवाएं, ऑटो पार्ट्स, रिफाइंड ईंधन और कटे हीरे जैसे सामान निर्यात करता है। ये ज्यादातर EU की किसी तीसरे देश से होने वाले आयात की जगह लेते हैं, न कि EU की अपनी मैन्युफैक्चरिंग से टक्कर लेते हैं। EU ने ऐसी गतिविधियां पहले ही ऑफशोर कर दी हैं। इससे साफ है कि FTA से भारतीय निर्यात बढ़ेगा, लेकिन EU की लोकल इंडस्ट्री पर असर नहीं पड़ेगा।
दूसरी तरफ, EU से भारत को हाई-एंड मशीनरी, एयरक्राफ्ट, कोर इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, केमिकल्स, क्वालिटी मेडिकल डिवाइसेज और मेटल स्क्रैप मिलते हैं। ये भारत की फैक्टरियों, रिसाइक्लिंग इंडस्ट्री और MSME क्लस्टर्स को सपोर्ट करते हैं, जिससे प्रोडक्टिविटी और निर्यात क्षमता बढ़ती है। टैरिफ खत्म होने से इनपुट कॉस्ट कम होगी, इंडस्ट्री को क्राउड आउट नहीं करेगी।
Also Read: मुक्त व्यापार समझौते के करीब भारत और यूरोपीय यूनियन, 27 जनवरी को हो सकता है बड़ा ऐलान
वित्त वर्ष 2025 में भारत ने EU से 60.7 अरब डॉलर का सामान आयात किया, जो ज्यादातर कैपिटल, टेक्नोलॉजी और इनपुट-इंटेंसिव प्रोडक्ट्स हैं। 13 अरब डॉलर के साथ हाई-एंड मशीनरी सबसे बड़ा आयात था, जिसमें टर्बोजेट्स (810 मिलियन डॉलर), इंडस्ट्रियल कंट्रोल वॉल्व्स (418 मिलियन डॉलर) और स्पेशलाइज्ड इंडस्ट्रियल मशीन्स (343 मिलियन डॉलर) शामिल हैं। भारत ऐसी एडवांस कैपिटल इक्विपमेंट बड़े पैमाने पर नहीं बनाता, इसलिए इंडस्ट्रियल और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर्स के लिए ये आयात जरूरी हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स आयात 9.4 अरब डॉलर का रहा, जिसमें मोबाइल फोन पार्ट्स (3.7 अरब डॉलर) और इंटीग्रेटेड सर्किट्स (890.5 मिलियन डॉलर) लीड करते हैं। भारत को स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस असेंबल करने के लिए ये कंपोनेंट्स चाहिए, क्योंकि घरेलू IC और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग अभी सीमित है। इसके अलावा, एयरक्राफ्ट 6.3 अरब डॉलर, मेडिकल डिवाइसेज और साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स 3.8 अरब डॉलर, और दवाएं 1.4 अरब डॉलर की आईं, ज्यादातर स्पेशलाइज्ड फॉर्म्युलेशंस। ये हाई-टेक प्रोडक्ट्स हैं, जिन्हें भारत ज्यादातर नहीं बनाता और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग इकोनॉमीज से लेना पड़ता है।
इसके अलावा, वेस्ट और स्क्रैप का आयात 2.1 अरब डॉलर का था, जिसमें एल्युमिनियम स्क्रैप (632 मिलियन डॉलर) और ब्रास स्क्रैप (534 मिलियन डॉलर) प्रमुख हैं। ये भारत की रिसाइक्लिंग इंडस्ट्री और MSME के लिए की-फीडस्टॉक हैं। घरेलू स्क्रैप की कमी के कारण आयात पर निर्भरता है।
शराब व्यापार अभी छोटा है। भारत ने EU को 1.4 मिलियन डॉलर की वाइन और 24.5 मिलियन डॉलर की स्पिरिट्स निर्यात कीं। EU से आयात ज्यादा रहा, वाइन 7.9 मिलियन डॉलर और स्पिरिट्स 87.8 मिलियन डॉलर का, जो यूरोप की प्रीमियम अल्कोहल में मजबूती दिखाता है।
(PTI के इनपुट के साथ)