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Republic Day 2026: कर्तव्य पथ पर दिखेगी आत्मनिर्भर और मजबूत भारत की झलक

कर्तव्य पथ पर परेड में इस साल यूरोपीय संघ (ईयू) के नेता, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लिएन मुख्य अतिथि होंगी

Last Updated- January 25, 2026 | 11:14 PM IST
Bhairav ​​Battalion
भारतीय सेना की नई भैरव बटालियन

राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ की थीम पर 77वें गणतंत्र दिवस की परेड में इस बार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के साथ-साथ ‘आत्मनिर्भरता’ के लिए सरकार के प्रयासों की झलक देखने को मिलेगी। कर्तव्य पथ पर परेड में इस साल यूरोपीय संघ (ईयू) के नेता, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लिएन मुख्य अतिथि होंगी। 

परेड में ईयू की सैन्य टुकड़ी भी शामिल होगी, जिसमें तीन वाहनों पर चार ध्वज वाहक होंगे। उनके हाथों में ईयू, ईयू सैन्य स्टाफ, ईयू नौसेना बल अटालांटा (एटलांटा नहीं) और ईयू नौसेना बल एस्पाइड्स के अलग-अलग चार झंडे होंगे। ईयू नौसेना बल अटालांटा हिंद-प्रशांत में सुरक्षा के लिए तैनात दस्ता है जो ईयू की नौसेना कूटनीति को मजबूत करता है, जबकि ईयू नौसेना बल एस्पाइड्स लाल सागर में हूती विद्रोहियों से अंतरराष्ट्रीय नौवहन की रक्षा के लिए तैनात सैन्य बल है।

90 मिनट का कार्यक्रम, 30 झांकियां

इस साल 90 मिनट तक चलने वाली परेड में 30 झांकियां शामिल होंगी, जिनमें 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तथा 13 केंद्र सरकार के वि​भिन्न मंत्रालयों, विभागों और सेवाओं की होंगी। इनका व्यापक विषय ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम’ और ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ है। गुजरात और छत्तीसगढ़ की झांकियों का विषय ‘स्वदेशी-आत्मनिर्भरता-स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम’ है। इसी तरह केरल का ‘वाटर मेट्रो, 100 प्रतिशत डिजिटल साक्षरता और आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर केरल’ है, जबकि पश्चिम बंगाल की झांकी ‘भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में बंगाल’ की झलक पेश करेगी। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की झांकी का विषय ‘वंदे मातरम: राष्ट्र की आत्मा की पुकार’ है।

एयर हेडक्वार्टर के सेवानिवृत्त सैनिकों की झांकी का विषय ‘युद्ध के माध्यम से राष्ट्र निर्माण’ है, और गृह मंत्रालय की झांकी ‘भुज भूकंप: दृढ़ता के 25 वर्ष’ है। रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, कांच के बॉक्स में इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर भी कर्तव्य पथ पर उतरेगा, जो ऑपरेशन सिंदूर के पूरी संचालन प्रक्रिया को संक्षेप में दर्शाएगा।

बयान में कहा गया है, ‘विरासत, विविधता और विकास के इस उत्कृष्ट मिश्रण ने पूरे ऑपरेशन के दौरान जादुई काम किया। ब्रह्मोस मिसाइल ने दुश्मनपर घातक प्रहार किया तो आकाश मिसाइल सिस्टम और एस-400 ने सुरक्षात्मक ढाल प्रदान की। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुदर्शन चक्र विजन को दर्शाती है।’

युद्धक क्षमता का प्रदर्शन

भारतीय वायु सेना की मार्चिंग टुकड़ी के साथ तालमेल बिठाते हुए एक फ्लाईपास्ट किया जाएगा, जिसमें राफेल, मिग-29, एसयू-30 के दो-दो विमान और जगुआर शामिल होंगे, जो ‘सिंदूर फॉर्मेशन’ का प्रतीक होगा। समारोह स्वदेशी रूप से विकसित आर्टिलरी हथियार प्रणाली 105 मिमी लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी के साथ शुरू होगा। खास यह कि दूसरी और तीसरी पीढ़ी के कई सैन्य अधिकारी टुकड़ियों की कमान संभालेंगे।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि परेड में पहली बार भारतीय सेना के चरणबद्ध ‘बैटल एरे फॉर्मेट’ को प्रदर्शित किया जाएगा, जिसमें हवाई उपकरण भी शामिल होंगे। मंत्रालय ने कहा, ‘टोही दल में सक्रिय युद्ध के दौरान पहनी जाने वाली वर्दी में 61वीं कैवलरी शामिल होगी। इसके बाद भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया आर्मर्ड लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल- हाई मोबिलिटी रिकोनिसेंस व्हीकल कर्तव्य पथ पर परेड में चलता दिखेगा। हवाई सहायता प्रदान करने वाला स्वदेशी डीएचआरयूवी एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और इसका सशस्त्र रूप रुद्र प्रहार टोली में नजर आएगा। यह पूरा परिदृश्य युद्ध के मैदान को आकार देता हुआ प्रतीत होगा।’

संग्राम की प्रतीक वेटरन की झांकी के अगले भाग में युद्धक मशीनों को दर्शाती त्रि-आयामी गोलाकार दीवार होगी, जिसने संघर्ष के दौरान निर्णायक काम किया। तीनों सेनाओं की झांकी ‘ऑपरेशन सिंदूर: संयुक्त प्रयास से विजय’ को दर्शाती हुई आगे बढ़ेगी। 

कर्तव्य पथ पर 2,500 कलाकार

इस वर्ष प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले 2,500 कलाकार कर्तव्य पथ पर संबं​धित राज्य की संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ‘वंदे मातरम’ विषय पर प्रस्तुति देगा। इसके अलावा फ्लाई-पास्ट में कुल 29 विमान भाग लेंगे, जिनमें 16 लड़ाकू विमान, चार परिवहन विमान और नौ हेलीकॉप्टर होंगे। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ तथा ‘वंदे मातरम’ को दर्शाने वाले बैनरों और गुब्बारों को उड़ाकर किया जाएगा।

तेजेंद्र कुमार मित्रा द्वारा 1923 में बनाई गई पेंटिंग की श्रृंखला, जिसमें ‘वंदे मातरम’ के छंदों को दर्शाया गया है और ‘बंदे मातरम एल्बम’ (1923) में प्रकाशित किया गया है, कर्तव्य पथ के किनारे व्यू-कटर के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के पैतृक घर और जन्मस्थली के साथ-साथ पूरे देश में 19 जनवरी से 26 जनवरी तक ‘वंदे मातरम’ विषय पर सैन्य बलों ने बैंड का प्रदर्शन किया।

एक और खास बात, कर्तव्य पथ पर परेड के डाइस के सामने की जाने वाली फूलों की सजावट भी वंदे मातरम थीम पर होगी। इसके अलावा कर्तव्य पथ पर लगे स्क्रीन पर वंदे मातरम पर वीडियो चलाए जाएंगे।

 

First Published - January 25, 2026 | 11:14 PM IST

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