पिछले दिनों आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने बच्चों के लिए आईसीआईसीआई प्रू स्मार्टकिड 360 पॉलिसी पेश की है। कई दूसरी बीमा कंपनियों के पास भी ऐसी पॉलिसी हैं, जो बच्चों की उच्च शिक्षा और शादी जैसे अहम मौकों पर पैसे की जरूरत पूरी करने में माता-पिता की मदद कर सकती हैं।
बच्चों के बीमा या चाइल्ड इंश्योरेंस प्लान को खास तौर पर लंबे अरसे के बाद आने वाले किसी तय लक्ष्य के लिए बचत करने के लिहाज से बनाया जाता है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के मुख्य उत्पाद अधिकारी विकास गुप्ता कहते हैं, ‘इस तरह के बीमा में प्लान बच्चे की उम्र के किसी खास पड़ाव पर तयशुदा रकम मिलती है। आम तौर पर पैसे तब मिलते हैं, जब बच्चा 18 या 21 साल का हो जाता है और शिक्षा के लिए सबसे ज्यादा रकम की जरूरत पड़ती है।’ इन प्लान में पॉलिसी पूरी होने पर परिपक्वता लाभ के तौर पर रकम भी मिलती है। कुछ प्लान में कॉलेज में दाखिले जैसे अहम मौकों पर थोड़ी-बहुत रकम निकालने की सुविधा भी होती है।
एडलवाइस लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य वितरण अधिकारी अनूप सेठ बताते हैं, ‘इस तरह के प्लान में आम तौ पर माता-पिता के जीवन का बीमा किया जाता है मगर लाभार्थी संतान होती है।’
बच्चों की बीमा पॉलिसी दो तरह की होती हैं। बजाज लाइफ इंश्योरेंस के पॉलिसी प्रबंधन एवं रणनीति प्रमुख मधु बुरुगुपल्ली ने कहा, ‘गारंटीशुदा लाभ देने वाली पॉलिसी में निश्चित फायदा मिलता है और बाजार से जुड़ी योजनाओं वाली पॉलिसी लंबे अरसे में ज्यादा फायदा दिलाने की कोशिश करती हैं। माता-पिता दोनों में से किसी को भी चुन सकते हैं।’
प्रीमियम माफी इन पॉलिसियों की खास बात है। यह फायदा पॉलिसी में पहले से शामिल हो सकता है या राइडर के तौर पर खरीदा भी जा सकता है। गुप्ता समझाते हैं, ‘अगर दुर्भाग्य से माता-पिता की मौत हो जाती है या वे अपाहिज हो जाते हैं तो उसके बाद के सभी प्रीमियम बीमा कंपनी खुद भरती है।’ पॉलिसी उस सूरत में भी परिपक्व होने तक जारी रहती है। मौत हो जाए तो नॉमिनी को जीवन बीमा की पूरी राशि दे दी जाती है। खास पड़ावों पर होने वाला भुगतान और परिपक्व होने पर दूसरे लाभ फिर भी मिलते हैं।
इन बीमा पॉलिसियों के खरीदारों को पहले से तय अंतराल पर प्रीमियम चुकाना ही चाहिए। बुरुगुपल्ली कहते हैं कि इसमें लंबे समय तक नियमित बचत से रकम कई गुना बढ़ जाती है।’ ऐसी पॉलिसी में बच्चों से जुड़े खास लक्ष्य पूरे हो जाते हैं। गुप्ता समझाते हैं कि माता-पिता न रहें तब भी इस पॉलिसी में बच्चों के लक्ष्य पूरे हो जाते हैं।’
सेठ फायदा बताते हुए कहते हैं, ‘अगर आज ब्याज दर ज्यादा है तो इस तरह की पॉलिसी में माता-पिता को अगले 10-20 साल तक इसी ब्याज दर पर रिटर्न मिलता रहता है। जमा पर ब्याज दर घटने के समय उन्हें इसका फायदा हो जाता है।’
चाइल्ड इंश्योरेंस प्लान में कुछ कमियां भी हैं। पारंपरिक पॉलिसी में आपको रिटर्न मामूली ही मिलता है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) में पंजीकृत निवेश सलाहकार और सहजमनी डॉट कॉम के संस्थापक अभिषेक कुमार कहते हैं, ‘आम तौर पर इस प्रकार की पॉलिसी में सालाना 4 से 6 फीसदी रिटर्न ही मिलता है तो शिक्षा में हर साल आ रही 10-12 फीसदी महंगाई के मुकाबले बहुत कम रहता है।’ इस प्रकार की पॉलिसी बीमा कराने वालों को लंबे अरसे के लिए बांध देती हैं और ज्यादा बदलाव की गुंजाइश भी नहीं होती। मगर बाजार से जुड़ी पॉलिसियों में रिटर्न छोटी अवधि में घटता-बढ़ता रहता है।
कुछ निवेशकों के लिए टर्म इंश्योरेंस के साथ म्युचुअल फंड में भी निवेश करना ज्यादा कारगर हो सकता है। कुमार कहते हैं, ‘टर्म इंश्योरेंस कम खर्च में ज्यादा रकम का जीवन बीमा दिला देता है और सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये निवेश करने पर म्युचुअल फंड ज्यादा तरलता देते हैं और लंबे अरसे में उनसे बेहतर रिटर्न भी मिल सकता है।’ माता-पिता की मौत होने पर टर्म इंश्योरेंस से मिली रकम बच्चों के खास मकसद पूरे करने में काम आ सकती है।
कुछ लोगों के लिए चाइल्ड प्लान काम के हो सकते हैं। कुमार की सलाह है, ‘चाइल्ड इन्श्योरेंस प्लान जोखिम से बचने वाले ऐसे माता-पिता के लिए सही हैं, जो बचत में ज्यादा अनुशासित नहीं रह पाते मगर रिटर्न के बजाय गारंटीशुदा बीमा कवरेज और मानसिक शांति को तवज्जो देते हैं।’ रूराश फाइनैंशियल्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी रंजीत झा के मुताबित ऐसी पॉलिसी आम तौर पर स्थिर आय वाले उन माता-पिता के लिए अधिक फायदेमंद है जो अपने बच्चे की शिक्षा के लिए धन इकट्ठा करने के लिए गंभीर हैं।
मगर कुछ माता-पिता इसे नजरअंदाज भी कर सकते हैं। कुमार ने कहा, ‘अच्छी वित्तीय समझ रखने वाले जो अनुशासित निवेशक एसआईपी बनाए रख सकते हैं और ज्यादा रिटर्न चाहते हैं, उन्हें टर्म इंश्योरेंस के साथ म्युचुअल फंड बेहतर लग सकता है।’
चाइल्ड इंश्योरेंस प्लान खरीदने जा रहे माता-पिता को कुछ बातों पर अवश्य गौर करना चाहिए। जेनराली सेंट्रल लाइफ इंश्योरेंस के अपॉइंटेड एक्चुअरी आदित्य मल्ल कहते हैं, देख लीजिए कि जीवन बीमा कवर कितना है और कितने अरसे तक निवेश करते रहना होगा।’ झा की राय में यह देखना जरूरी है कि प्रीमियम माफी की सुविधा मिल रही है या नहीं। साथ ही यह भी देख लेना चाहिए कि भुगतान के समय में फेरबदल की गुंजाइश है या नहीं और बच्चों की जरूरत उससे पूरी हो रही है या नहीं। मल्ल के हिसाब से बच्चे के जन्म के फौरन बाद या अधिक से अधिक पांच साल की उम्र होने तक ये पॉलिसी खरीद लेनी चाहिए।