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दुनिया को शांति का संदेश दे रहा भारत, महिलाओं की भागीदारी को 2047 तक विकसित भारत की नींव: राष्ट्रपति

अपने भाषण के दौरान राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर की हालिया सफलता का जिक्र करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया

Last Updated- January 25, 2026 | 11:07 PM IST
Droupadi Murmu
गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश को संबोधित किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दुनिया के विभिन्न देशों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच रविवार को कहा कि भारत विश्व में शांति का संदेश फैला रहा है, जो मानवता के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और महिला सशक्तीकरण समेत विभिन्न मुद्दों पर बात की और वंदे मातरम तथा देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था जैसे विषयों पर चर्चा करते हुए मजबूत भारत की तस्वीर पेश की।

राष्ट्रपति मुर्मू ने शांति के ‘संदेशवाहक’ के रूप में भारत की स्थिति को रेखांकित करते हुए वै​श्विक स्तर पर सद्भाव के प्रति प्राचीन सभ्यतागत प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया। उन्होंने कहा, ‘हमारी परंपरा में समस्त सृष्टि में शांति की प्रार्थना की जाती रही है। पूरे विश्व में शांतिपूर्ण व्यवस्था स्थापित होने से ही मानवता का भविष्य सुरक्षित रह सकता है। उन्होंने कहा, ‘दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष के वातावरण में भारत शांति का संदेश फैला रहा है।’

अपने भाषण के दौरान राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर की हालिया सफलता का जिक्र करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पिछले साल हमारे देश ने आतंकी ढांचों के खिलाफ सटीक हमले किए और उन्हें नष्ट कर दिया। इसमें कई आतंकवादियों का अंत हो गया।’

उन्होंने रक्षा के क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता के बारे में कहा कि रक्षा क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भर के कारण ही ऑपरेशन सिंदूर में ऐतिहासिक सफलता मिली। राष्ट्रपति ने सियाचिन बेस कैंप की अपनी यात्राओं और सुखोई, राफेल तथा पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा, ‘सेना, वायु सेना और नौसेना की ताकत के आधार पर लोगों को हमारी रक्षा-तैयारी पर पूरा भरोसा है। राष्ट्रपति ने भारत की सैन्य तैयारी को उसकी मजबूती से शांति की वकालत करने की क्षमता से जोड़ा।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में नारी शक्ति के आधार​शिला के रूप में उभरने की सराहना की। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के विकास के लिए महिलाओं की सक्रिय और सशक्त भागीदारी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों से लेकर अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र तक, आधुनिक भारत की कहानी बेटियों द्वारा लिखी जा रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 10 करोड़ से अधिक महिलाएं वर्तमान में जमीनी स्तर की अर्थव्यवस्था को दोबारा परिभाषित कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि अब पंचायती राज संस्थानों में लगभग 46 प्रतिशत प्रतिनिधि महिलाएं हैं और नारी शक्ति वंदन अधिनियम राजनीतिक सशक्तीकरण को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है। राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बात पर प्रकाश डाला कि महिलाएं सशस्त्र बलों, अंतरिक्ष अनुसंधान और उद्यमिता में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे ‘वंदे मातरम’ ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जनता को एकजुट करने के लिए भाषाई बंधनों को पार किया। उन्होंने टिप्पणी की कि विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवादों ने गीत को एकता के एक सार्वभौमिक प्रतीक के रूप में और मजबूत किया है।  

राष्ट्रपति ने कहा, ‘उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक हमारी प्राचीन सांस्कृतिक एकता का ताना-बाना हमारे पूर्वजों द्वारा बुना गया था। ‘वंदे मातरम’ के माध्यम से एकता की इस भावना को बढ़ावा देने का हर प्रयास अत्यधिक सराहनीय है।’

उन्होंने गरीबी उन्मूलन में भारत की परिवर्तनकारी प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा कि लाखों नागरिक जो दशकों से गरीबी से जूझ रहे थे, अंततः गरीबी रेखा से ऊपर उठ गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकसित भारत का मार्ग समावेशी होना चाहिए, जिसमें आदिवासी और हाशिए के समुदायों पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा, ‘गरीबों के कल्याण के लिए इस तरह के प्रयास महात्मा गांधी के सर्वोदय (सभी के लिए प्रगति) के आदर्श को ठोस आकार देते हैं।’

राष्ट्रपति मुर्मू ने यह भी घोषणा की कि भारत का संविधान अब आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध सभी 22 भाषाओं में उपलब्ध है और कहा कि इस मील के पत्थर का उद्देश्य संवैधानिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना है, जिससे नागरिकों को अपनी मातृभाषा में राष्ट्र के मूलभूत दस्तावेज के साथ जुड़ने की अनुमति मिलती है।

राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रकाश डाला कि राष्ट्रीय लक्ष्यों को अब अभूतपूर्व सार्वजनिक भागीदारी के माध्यम से प्राप्त किया जा रहा है, जिससे सरकारी अभियान शक्तिशाली जन आंदोलनों में बदल रहे हैं। विकसित भारत के निर्माण को साझा जिम्मेदारी बताते हुए उन्होंने हर गांव और शहर में स्थानीय संस्थानों से प्रगतिशील परिवर्तन के उपकरण के रूप में कार्य करने का आह्वान किया। राष्ट्रपति ने कहा कि आज का भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।  

First Published - January 25, 2026 | 11:07 PM IST

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