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India-EU FTA के बाद यूरोप आने वाली कारें होंगी सस्ती, 110% से घटकर 40% हो जाएगा इंपोर्ट टैक्स

इससे फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज, BMW जैसी बड़ी यूरोपीय कंपनियों को भारत में अपनी कारें सस्ती बेचने का मौका मिलेगा

Last Updated- January 25, 2026 | 8:08 PM IST
Cars
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अब करीब-करीब तय हो चुका है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के सूत्रों के मुताबिक, भारत EU से आने वाली कारों पर इंपोर्ट टैक्स को बहुत कम करने को तैयार है। अभी कारों पर टैक्स 70% से लेकर 110% तक लगता है, लेकिन अब इसे तुरंत 40% कर दिया जाएगा।

यह फैसला भारत के सबसे बड़े ऑटो मार्केट को खोलने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। मोदी सरकार ने EU के 27 देशों से आने वाली कुछ खास कारों पर यह छूट देने पर सहमति जता दी है। खासकर उन कारों पर, जिनकी कीमत 15,000 यूरो (लगभग 17,739 डॉलर) से ज्यादा है। सूत्रों ने बताया कि समय के साथ यह टैक्स और कम होकर 10% तक पहुंच सकता है। इससे फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज, BMW जैसी बड़ी यूरोपीय कंपनियों को भारत में अपनी कारें सस्ती बेचने का मौका मिलेगा।

कारों के लिए कोटा और EV पर खास नियम

सूत्रों के अनुसार, भारत ने हर साल करीब 2 लाख पेट्रोल या डीजल वाली कारों (कॉम्बस्शन इंजन वाली) के लिए यह 40% टैक्स वाली छूट देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, यह संख्या आखिरी समय में बदल भी सकती है। लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को पहले 5 साल तक इस छूट से बाहर रखा जाएगा। इसका मकसद घरेलू कंपनियों जैसे टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा को EV सेक्टर में निवेश का फायदा मिलता रहे। पांच साल बाद EV पर भी यही टैक्स कटौती लागू होगी।

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भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार मार्केट है, जहां हर साल करीब 44 लाख कारें बिकती हैं। लेकिन यहां ज्यादातर मार्केट सुजुकी (मारुति), टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियों के हाथ में है। ये तीनों मिलकर बाजार के दो-तिहाई हिस्से पर कब्जा जमाए हुए हैं। यूरोपीय कंपनियां अभी सिर्फ 4% से भी कम शेयर रखती हैं। हाई टैक्स की वजह से मर्सिडीज-बेंज, BMW जैसी लग्जरी कार कंपनियां यहां लोकल मैन्युफैक्चरिंग करती हैं, लेकिन ग्रोथ सीमित रह जाती है।

यूरोपीय ब्रांड्स अपनी इंपोर्टेड कारें सस्ती दाम पर बेच सकेंगे

टैक्स कम होने से यूरोपीय ब्रांड्स अपनी इंपोर्टेड कारें सस्ती दाम पर बेच सकेंगे। इससे वे बाजार में ज्यादा मॉडल ला सकेंगे और लोकल प्रोडक्शन बढ़ाने से पहले टेस्ट कर सकेंगे। रेनॉल्ट भारत में वापसी की तैयारी कर रहा है, जबकि फॉक्सवैगन अपनी स्कोडा ब्रांड से नया निवेश प्लान कर रहा है।

भारत का कार मार्केट 2030 तक 60 लाख यूनिट सालाना तक पहुंचने की उम्मीद है। इस डील से दोनों तरफ ट्रेड बढ़ेगा। भारत से टेक्सटाइल और ज्वेलरी जैसे सामान को भी फायदा होगा, खासकर तब जब अमेरिका ने हाल में 50% टैक्स लगा दिया है।

यह डील इतनी बड़ी मानी जा रही है कि इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। मंगलवार को दोनों पक्ष इसे फाइनल करने का ऐलान कर सकते हैं। 

First Published - January 25, 2026 | 8:01 PM IST

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