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वाहन कंपनियों की नजर शहरों के मुकाबले गांव-देहात पर, FY25 में 5 फीसदी तक बढ़ सकती है बिक्री

वाहन उद्योग के प्रतिनिधियों के अनुसार गांव-देहात में यात्री वाहनों की बिक्री परवान चढ़ते देख वहां कारोबारी तंत्र का विस्तार करना जरूरी हो गया है।

Last Updated- March 17, 2024 | 9:34 PM IST
Auto Sales

पिछले कुछ वर्षों में गांव-देहात में शहरों के मुकाबले ज्यादा यात्री वाहन बिक रहे हैं। यह देखकर यात्री वाहन कंपनियां छोटे शहरों एवं नए बाजारों में कारोबार फैलाने में जुट गई हैं। वाहन उद्योग का अनुमान है कि वर्ष 2024-25 में यात्री वाहनों की बिक्री औसतन 3-5 प्रतिशत बढ़ सकती है। इस उद्योग के प्रतिनिधियों के अनुसार गांव-देहात में यात्री वाहनों की बिक्री परवान चढ़ते देख वहां कारोबारी तंत्र का विस्तार करना जरूरी हो गया है। वर्ष 2023-24 में यात्री वाहनों की कुल बिक्री 42 लाख रहने का अनुमान है।

मारुति सूजुकी इंडिया में वरिष्ठ कार्याधिकारी (प्रचार एवं बिक्री) शशांक श्रीवास्तव कहते हैं, ‘पिछले कुछ वर्षों के दौरान ग्रामीण इलाकों में शहरी क्षेत्र की तुलना में यात्री वाहनों की बिक्री अधिक रही है। कोविड महामारी के दौरान जब शहरी इलाकों में बिक्री की रफ्तार पर ब्रेक लग गया था तब गांव-देहात में ऐसे वाहनों की बिक्री फर्राटा भर रही थी। यात्री वाहनों की कुल बिक्री की बात करें तो इसका लगभग 32-33 प्रतिशत हिस्सा गांव-देहात झटक लेते हैं। मतलब साफ है कि हमें देश के ग्रामीण इलाकों में अपना कारोबार फैलाने पर अब औरअधिक ध्यान देना होगा।’

इस समय मारुति की 45 प्रतिशत कारें गांव-देहात में ही बिकती हैं। श्रीवास्तव ने कहा कि वर्ष 2018-19 में आंकड़ा लगभग 38 प्रतिशत रहा था।

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रबंध निदेशक शैलेश चंद्रा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘वित्त वर्ष 2024 में टाटा मोटर्स की कारों की बिक्री वित्त वर्ष 2020 की तुलना में 5 गुना अधिक रही है। इनमें गांव-देहात में बिक्री 40 प्रतिशत तक रही है।’

यह भी पढ़ें: Stock Market: ऑयल ऐंड गैस कंपनियों का रहा सबसे बुरा हाल, दूसरे सेक्टर्स की कैसी रही परफॉर्मेंस

चंद्रा ने कहा कि ग्राहकों के करीब पहुंचने के लिए कंपनी ने बिक्री एवं मरम्मत आदि सुविधाएं तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने ऐसे 800 से अधिक केंद्र (आउटलेट) स्थापित किए हैं जो आस-पास के शहरों के करीब हैं और विशेष तौर पर ग्रामीण ग्राहकों को अपनी सेवाएं देते हैं। चंद्रा ने कहा कि कंपनी ने 135 अनुभव वैन (मोबाइल शोरूम) भी स्थापित किए हैं।

महिंद्रा ऐंड महिंद्रा में मुख्य कार्याधिकारी (ऑटोमोटिव सेक्टर) नलिनीकांत गोलागुंटा ने कहा, ‘ग्रामीण क्षेत्रों में अब सड़क सुविधाओं का काफी विकास हुआ है। सड़कें सुधरने के बाद अब हम कारोबार फैलाने की योजना आगे बढ़ा रहे हैं ताकि ग्राहकों को आसानी हो। इससे हमें भी कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी।’

गोलागुंटा ने कहा कि देश के शहरी एवं ग्रामीण दोनों ही इलाकों में कंपनी की एसयूवी की बिक्री लगातार बढ़ रही है। अलबत्ता गांव-देहात के लिए यात्री वाहन कंपनियां थोड़ी अलग रणनीति अपना रही हैं।

श्रीवास्तव ने कहा, ‘देश के ग्रामीण इलाकों में ग्राहकों की पसंद-नापसंद समझनी पड़ती है और उनकी भावनाओं को भी समझना पड़ता है। डीलरों को नए ग्राहक बनाने के लिए लोगों से व्यक्तिगत स्तर पर जुड़ना पड़ता है। सरपंच या मुखिया अपने क्षेत्रों में खासा प्रभाव रखते हैं। वाहन कंपनियां ग्रामीण क्षेत्रों में कई बड़े कार्यक्रम आयोजित करती हैं और स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों के साथ जुड़ने को कोशिश कर रही हैं।’

देश में 6.50 लाख गांव हैं और इनमें 4.10 लाख गांवों में कम से कम एक मारुति कार है। श्रीवास्तव ने कहा कि मारुति के पास अब भी 2.50 लाख गांवों में पहुंचने की गुंजाइश बची हुई है। श्रीवास्तव के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में यात्री वाहनों की बिक्री में 3 से 5 प्रतिशत दर से इजाफा हो सकता है।

First Published - March 17, 2024 | 9:34 PM IST

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