देश में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का पंजीकरण 2025 के अंत तक 11.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 13.1 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। यह वृद्धि ओला इलेक्ट्रिक की बिक्री आधी से भी अधिक गिरने, सरकार द्वारा प्रति वाहन सब्सिडी 10,000 से घटाकर 5,000 रुपये करने और आईसीआई मॉडल यानी पेट्रोल-डीजल इंजन वाले वाहनों पर जीएसटी 10 प्रतिशत तक कम किए जाने के बावजूद होगी।
इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्षेत्र में यह वृद्धि इस तथ्य के बिल्कुल विपरीत है कि दोपहिया वाहन बाजार (आइस और इलेक्ट्रिक दोनों मिलाकर) में वाहन के विश्लेषण के 21 दिसंबर तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष केवल 1 प्रतिशत से थोड़ी अधिक वृद्धि हुई है। दिसंबर के शेष दिनों के लिए महीने की प्रति दिन की औसत बिक्री को 31 दिसंबर तक जोड़ा गया है।
इस धारणा के आधार पर इस वर्ष ईदो पहिया का विस्तार पिछले वर्ष की तुलना में 0.6 प्रतिशत अधिक होगा और वर्ष के अंत तक यह 6.8 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। यह वृद्धि कुछ राज्यों- केरल (15.4 %), गोवा (14.4 %), कर्नाटक (13.3 %), महाराष्ट्र (10.2 %) और उड़ीसा (10%) के दम पर दर्ज की गई है। शेष 19 राज्यों में अभी भी ईवी विस्तार की गति 10 प्रतिशत से काफी कम है।
जहां तक कंपनियों के प्रदर्शन की बात है, तो शीर्ष चार में ओला इलेक्ट्रिक एकमात्र ऐसी कंपनी है, जिसकी दोपहिया पंजीकरण में हिस्सेदारी वर्ष 2024 में 35.5 प्रतिशत से घटकर 2025 में 15.4 प्रतिशत रह गई है। विश्लेषण के आधार पर इसका पंजीकरण वर्ष 2024 में 4.07 लाख से घटकर इस वर्ष 1.97 लाख रहने का अनुमान है। इसके विपरीत, प्रतिद्वंद्वी एथर एनर्जी शीर्ष चार कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी में सबसे अधिक वृद्धि हासिल करने में सक्षम रही, जिसकी वृद्धि पिछले वर्ष की 4.7 प्रतिशत से बढ़कर इस वर्ष 15.7 प्रतिशत हो गई।
बजाज की बिक्री में सुस्ती का अंदाजा उसके गृह प्रदेश महाराष्ट्र के आंकड़ों से लगाया जा सकता है जहां पिछले साल के मुकाबले उसके कुल पंजीकरण में इस राज्य में हिस्सेदारी कम हुई है। फिर भी यह 32 प्रतिशत के अच्छए स्तर पर है। टीवीएस के लिए भी उसका शीर्ष राज्य महाराष्ट्र ही है, जहां इस वर्ष कुल पंजीकरण का लगभग 15 प्रतिशत यहीं हुआ है। लेकिन दोनों कंपनियां इस वर्ष अपनी समग्र बाजार हिस्सेदारी को बढ़ाने में सक्षम रहीं। दिलचस्प बात यह है कि बेंगलूरु की एथर एनर्जी ने पश्चिम और उत्तरभारत में आक्रामक रूप से विस्तार कर इस वर्षयह मिथक तोड़ दिया किइस कंपनी की पैठ अधिकतर दक्षिण भारत में ही है।
गुजरात में बाजार हिस्सेदारी 22.3 प्रतिशत करने के साथ कंपनी ने सीधे दूसरे स्थान पर कब्जा किया है। पिछले वर्ष वह इस राज्य में चौथे स्थान पर थी।इतना ही नहीं, उसने गोवा में भी ओला को पछाड़कर 27.6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। उत्तर भारत में एथर अपनी बाजार हिस्सेदारी दोगुनी से अधिक करते हुए जम्मू कश्मीर में सबसे बड़ी कंपनी बन गई है।
उसने राजस्थान में अपनी हिस्सेदारी लगभग दोगुनी (11.7 प्रतिशत तक) कर दी है। चंडीगढ़ में उसकी तीन गुना वृ़द्धि हुई है और उत्तर प्रदेश में 2024 में 3.2 प्रतिशत की तुलना में इस वर्ष 6.2 प्रतिशत तक बढ़त दर्ज की है। लेकिन, ओला के लिए कर्नाटक अभी भी महत्त्वपूर्ण बाजार बना हुआ है, जहां इस वर्ष उसके कुल पंजीकरण का 23 प्रतिशत है, लेकिन हिस्सेदारी पिछले वर्ष के 28 प्रतिशत से कम हो गई है।
दूसरी ओर ओला इलेक्ट्रिक के लिए यह सबसे खराब वर्ष रहा। सभी राज्यों में उसकी पंजीकरण हिस्सेदारी में गिरावट आई है। कुछ प्रदेशों में यह काफी तेज रही है। उदाहरण के लिए दिल्ली में कंपनी पिछले साल 42.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बाजार पर राज कर रही थी।लेकिन अब यहां हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से नीचे आ गई है। उत्तर प्रदेश (2024 में 46 प्रतिशत से 2025 में 21 प्रतिशत), गुजरात और आंध्र प्रदेश (42 प्रतिशत से गिरकर 14.2 प्रतिशत) और तमिलनाडु (इस वर्ष 30.3 बनाम 14.4 प्रतिशत) जैसे मजबूत बाजारों में भी भारी गिरावट आई है।
हीरो मोटोकॉर्प निश्चित रूप से दूसरा आश्चर्य रहा है।उसके इलेक्ट्रिक वाहन विडा का पिछले वर्ष किसी भी राज्य में 10 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सा नहीं था, लेकिन इस वर्ष पहले ही सात राज्यों में इसने यह आंकड़ा पार कर लिया है। उदाहरण के लिएपश्चिम बंगाल में वह 21 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी के साथ तीसरी सबसे बड़ी कंपनी है। इससे ऊपर केवल ओला और बजाज ही हैं।