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लेख

राजकोषीय सुदृढ़ीकरण अब है केंद्र की बारी

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण महज कुछ सप्ताह में अपना लगातार चौथा बजट पेश करेंगी। स्वतंत्र भारत में अब तक 23 वित्त मंत्री (तीन प्रधानमंत्रियों को छोड़कर) हुए हैं जिन्होंने अपने कार्यकाल में कम से कम एक बजट पेश किया है। परंतु इनमें से केवल आठ को लगातार चार बजट पेश करने का गौरव प्राप्त […]

अंतरराष्ट्रीय

सीओपी26 के मसौदा निर्णय ने जलवायु वित्त पर लक्ष्य को किया स्थानांतरित

सीओपी26 प्रेसीडेंसी द्वारा जारी किए गए मसौदे में जलवायु वित्त के बजट में किसी प्रकार की बढ़ोतरी की पेशकश नहीं की गई है और इसमें विकसित देशों से 2009 में तय किए गए 100 अरब डॉलर प्रति वर्ष के लक्ष्य को पूरा करने का आग्रह किया गया है। यह मसौदा वैश्विक जलवायु सम्मेलन के अंतिम […]

लेख

पारदर्शी कर ढांचा जरूरी

गत सप्ताह केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में क्रमश: 5 रुपये और 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी। इसे दीवाली के दिन लागू किया गया और राजनीतिक रूप से इसे देश को त्योहार के तोहफे के रूप में प्रचारित किया गया। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने कहा कि […]

ताजा खबरें

विनिवेश लक्ष्य पाना सरकार के लिए मुश्किल

बीएस बातचीत बजट को एक ऐसी अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है जो बड़ी तेजी से महामारी के प्रभाव से उबर रही है और जो अब कोविड से पूर्व के स्तर पर पहुंच सकती है। वित्त सचिव टीवी सोमनाथन ने श्रीमी चौधरी के साथ बातचीत में विनिवेश लक्ष्य, उर्वरक सब्सिडी, एलआईसी […]

विशेष

‘जल्दबाजी में न हो निजीकरण’

भले ही सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ पुराने बैंकों का निजीकरण जरूरी हो गया है, लेकिन हमें इसे लेकर भी सतर्क रहना होगा कि यह कार्य जल्दबाजी में न किया जाए। बिजनेस स्टैंडर्ड के ‘बीएफएसआई समिट – बैंक प्राइवेटाइजेशन: अनडूइंग 1969’ में विशेषज्ञों ने कहा कि निजीकरण की नीतियां तय करते हुए सरकार का दृष्टिकोण तयशुदा […]

लेख

राजकोषीय परिस्थिति और राज्यों के समक्ष चुनौती

महालेखा नियंत्रक द्वारा हर महीने के अंत में केंद्र सरकार के राजस्व और व्यय के आंकड़े जारी किए जाते हैं और उस समय उसका विश्लेषण और आकलन किया जाता है। ये अंकेक्षण रहित प्रारंभिक आंकड़े होते हैं लेकिन इनसे केंद्र की वित्तीय स्थिति के बारे में मोटा अनुमान लग जाता है। परंतु वर्ष के दौरान […]

ताजा खबरें

लोगों का ध्यान बजट और सुरक्षा पर : सर्वेक्षण

देश के ऑनलाइन खरीदारों के लिहाज से बजट और सुरक्षा त्योहारी खरीद के प्रमुख केंद्र बिंदु हैं। सामुदायिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकल सर्कल द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में ऐसा पाया गया है। मई 2021 से अब तक उपभोक्ता धारणा में 30 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। जहां एक ओर लोकल सर्कल के सर्वेक्षण में […]

लेख

राजकोषीय संतुलन

केंद्र सरकार अक्टूबर में अगले वर्ष के बजट निर्माण और चालू वर्ष के संशोधित अनुमान पेश करने की कवायद शुरू कर रही है। इस प्रक्रिया में सरकार पिछले वर्ष की तुलना में अधिक बेहतर स्थिति में नजर आ रही है। राजकोषीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और राजस्व संग्रह में सुधार ने अधिकांश विश्लेषकों […]

कमोडिटी

बारिश से महंगी हुईं सब्जियां

देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही बारिश ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। बारिश से उत्पादक इलाकों में सब्जियों की फसल को नुकसान हुआ है। इससे मंडियों में आवक गिरने से इनके दाम चढ़ रहे हैं। बीते 10 दिन में हरी सब्जियों के दाम 50 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। सबसे ज्यादा तेजी […]

लेख

कुछ सकारात्मक आश्चर्य

शुरुआती दौर में निर्मला सीतारमण को नौसिखिया मानकर लोग जितना सोच रहे थे, वह उसकी तुलना में काफी बेहतर वित्त मंत्री साबित हो रही हैं। उनकी शुरुआत खराब रही क्योंकि 2019 के बजट में उनका सामना ऐसे आंकड़ों से था जो वास्तविकता से दूर थे। ऐसा उनके पूर्ववर्ती वित्तमंत्री द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों की वजह से […]