बिजनेस स्टैंडर्ड - ब्लॉकचेन कारोबार में नौकरियों की बहार
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ब्लॉकचेन कारोबार में नौकरियों की बहार

वीरेश्वर तोमर /  11 04, 2018

तकनीक का विस्तार

►  ब्लॉकचेन संबंधी नौकरियों में सामान्य आईटी क्षेत्र की नौकरियों से 61.8 प्रतिशत अधिक वेतन
►  सर्वे के अनुसार, वर्ष 2018 की पहली तिमाही में ब्लॉकचेन क्षेत्र की नौकरियों में 6,000 फीसदी वृद्धि
►  विश्व आर्थिक मंच का मानना है कि वर्ष 2027 तक वैश्विक जीडीपी का 10 प्रतिशत कारोबार ब्लॉकचेन तकनीक पर विकसित होगा
►  भारत में नीतिगत अनिश्चितता से प्रतिभा पलायन का अंदेशा

बिजनेस स्टैंडर्ड ब्लॉकचेन कारोबार में नौकरियों की बहारब्लॉकचेन तकनीक और क्रिप्टोकरेंसी पिछले एक साल के दौरान काफी चर्चा में रहीं। इस बीच, ऑनलाइन भर्तियां और कंपनियों से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध कराने वाली ऑनलाइन वेबसाइट ग्लासडोर के हालिया अध्ययन में पाया गया कि ब्लॉकचेन और क्रिप्टोकरेंसी क्षेत्र में अमेरिका समेत पूरे विश्व में नौकरियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। साथ ही, ब्लॉकचेन क्षेत्र के शैक्षणिक प्लेटफॉर्म इनक्रिप्ट का अगस्त 2018 का सर्वेक्षण बताता है कि भारत में ब्लॉकचेन और क्रिप्टोकरेंसी क्षेत्र में कानूनी और नीतिगत अनिश्चितता के बीच देश को ब्लॉकचेन क्षेत्र में प्रतिभा पलायन जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। 

ग्लासडोर के अध्ययन के अनुसार अमेरिका में ब्लॉकचेन क्षेत्र में औसत सालाना आय 84,884 डॉलर (लगभग 62 लाख रुपये) है जो वहां की औसत सालाना आय (52,461 डॉलर अथवा लगभग 38.5 लाख रुपये) से 61.8 प्रतिशत अधिक है। अध्ययन में बताया गया, 'पिछले एक साल में क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बाद भी ब्लॉकचेन क्षेत्र में नौकरियों की संख्या लगातार बढ़ रही हैं। एक साल के दौरान अमेरिका में इस तरह की नौकरियों में 300 प्रतिशत की उछाल आई है।' अध्ययन में पाया गया कि ब्लॉकचेन क्षेत्र में नौकरियों के मामले में अमेरिका के बाद लंदन, सिंगापुर, टोरंटो, हॉन्गकॉन्ग और बर्लिन शीर्ष वैश्विक शहरों में शामिल हैं।

इनक्रिप्ट ने अपने सर्वे में लिखा कि भारत में ब्लॉकचेन क्षेत्र नौकरियां, वित्त, नवोन्मेष और वैश्विक पहचान के क्षेत्र में अच्छा योगदान कर सकता है। 'रियलाइजिंग इंडियाज ब्लॉकचेन पोटेंशियल' नाम से जारी की गई रिपोर्ट में इनक्रिप्ट का कहना है कि ब्लॉकचेन की सहायता से सूचना तकनीक (आईटी) क्षेत्र में नया बदलाव लाया जा सकता है और देश में उच्च क्षमता वाली नौकरियों की संख्या बढ़ सकती है। सर्वे के अनुसार, 'वर्ष 2018 की पहली तिमाही में ब्लॉकचेन क्षेत्र की नौकरियों में 6,000 प्रतिशत की उछाल आई है।'

इनक्रिप्ट के संस्थापक और वेंचर कैपिटल निवेशक नितिन शर्मा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'इनक्रिप्ट के इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य भारत में पब्लिक ब्लॉकचेन की क्षमता की पहचान करना था। इसमें अधिकांश बातचीत कारोबारियों, एक्सचेंजों और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े जोखिमों पर की गई। हमने सर्वे में ब्लॉकचेन तकनीक पर काम कर रहे डेवलपर्स और उद्यमियों पर भी ध्यान केंद्रित किया है।' सर्वे में शामिल 84 लोग केवल विदेशी परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं और 86 प्रतिशत लोगोंं का मानना है कि अगर देश में क्रिप्टोकरेंसी के लिए सकारात्मक माहौल नहींं होगा तो वे देश से बाहर चले जाएंगे। साथ ही, 82 प्रतिशत लोगों का मानना है कि वर्तमान परिदृश्य में ब्लॉकचेन स्टार्टअप्स द्वारा जमा की गई पूंजी देश से बाहर चली जाएगी और देश इस क्षेत्र में चल रही वैश्विक प्रतिस्पर्धा मेंं पिछड़ जाएगा। शर्मा कहते हैं, 'सर्वे से पता चलता है कि ब्लॉकचेन क्षेत्र के लिए नियमों पर स्पष्टता लानी होगी अन्यथा भारत कई क्षेत्रों में बड़े अवसर खो सकता है।'

प्रतिभा पलायन

हाल ही में भारत के एक बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज जेबपे ने भारत में अपना कारोबार बंद कर दिया है और अब कंपनी ने स्वयं को माल्टा देश में पंजीकृत करा लिया है। भारत में कारोबार बंद करने वाली जेबपे विश्व के 20 देशों में अपनी सेवाएं दे रही है। फ्रीलांस प्लेटफॉर्म अपवर्क के एक सर्वे के अनुसार वर्ष 2018 की पहली तिमाही में सबसे अधिक तेजी से बढऩे वाले कौशल में ब्लॉकचेन पहले स्थान पर रही। इसमें, गूगल क्लाउड प्लेटफॉर्म दूसरे और वॉल्यूजन सॉफ्टवेयर तीसरे स्थान पर रहा। 

क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज वजीरएक्स के संस्थापक और सीईओ निश्चल शेट्टी का कहना है कि सॉफ्टवेयर क्षेत्र की नौकरियों के मामले में अगले 3-5 वर्ष में ब्लॉकचेन सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक होगा और देश से इस क्षेत्र मेंं प्रतिभा पलायन को रोकने की आवश्यकता है। वह कहते हैं, 'मैं व्यक्तिगत तौर पर कई इंजीनियरों, स्टार्टअप संस्थापकों, कारोबारियों और दूसरे लोगों को जानता हूं, जो ब्लॉकचेन क्षेत्र के सपनों को पूरा करने के लिए भारत से बाहर जा रहे हैं। सॉफ्टवेयर क्षेत्र में ब्लॉकचेन तकनीक के उपयोग संबंधी अस्पष्टता और नकारात्मक वातावरण खतरनाक हो सकता है और हमेंं अपने तरीकों में बदलाव लाने होंगे।'

आईटी क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित कंपनियां ब्लॉकचेन तकनीक आधारित उपायों पर काम कर रही हैं। आईबीएम और माइक्रोसॉफ्ट एजर पहले ही बीएएएस प्लेटफॉर्म तैयार कर चुके हैं। इसके अलावा, 2 साल के प्रायोगिक परीक्षण के बाद वॉलमार्ट ने किसी भी उत्पाद के एक जगह से दूसरी जगह जाने पर पहचान संबंधी ब्लॉकचेन सिस्टम लॉन्च कर दिया है।

ग्लासडोर की रिपोर्ट बताती है कि आईबीएम, ओरेकल, क्रेकन, एक्सेंचर, जेपी मॉर्गन और केपीएमजी कंपनियां ब्लॉकचेन क्षेत्र में नई नौकरियों के मामले में शीर्ष कंपनियां हैं। कई दूसरे ब्लॉकचेन स्टार्टअप भी अपने विस्तार पर काम कर रहे हैं। हालांकि, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी फिनवे के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी रचित चावला कहते हैं कि वर्तमान माहौल में ब्लॉकचेन के साथ ही किसी दूसरे क्षेत्र में भी क्षमता विकसित करना बेहतर रहेगा। वह कहते हैं, 'ब्लॉकचेन तकनीक देश के रोजगार क्षेत्र के लिए काफी फायदेमंद हो सकती है लेकिन किसी भी व्यक्ति को इसके साथ किसी एक पारंपरिक तकनीक का भी प्रशिक्षण लेना चाहिए।' वह आगे कहते हैं, 'कुछ मामलों में ब्लॉकचेन क्षेत्र में देश से प्रतिभा पलायन हो रहा है लेकिन तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और जीवन यापन के मूल्यों में वृद्धि से अगले 5 सालों में हम देखेंगे कि प्रतिभा पलायन के स्थान पर बहुत से लोग भारत का रुख करेंगे।'

आर्थिक योगदान

विश्व आर्थिक मंच ने मार्च 2018 में अनुमान जताया कि वर्ष 2027 तक कुल वैश्विक जीडीपी का 10 प्रतिशत कारोबार ब्लॉकचेन तकनीक पर विकसित होगा। मार्च 2017 में गार्टनर ने कहा था कि वर्ष 2025 तक ब्लॉकचेन क्षेत्र संबंधी कारोबार 176 अरब डॉलर को पार कर जाएगा और वर्ष 2030 तक 3.1 लाख करोड़ डॉलर से अधिक हो जाएगा। शेट्टी कहते हैं, 'हम ब्लॉकचेन क्षेत्र मेंं अभी शुरुआती स्तर पर ही हैं लेकिन इसमें बहुत सी नई भूमिकाएं विकसित हो रही हैं। एशिया में ब्लॉकचेन कंपनियों की संख्या में तेजी आ रही है।'

ब्लॉकचेन तकनीक आधारित परियोजनाओं द्वारा की गई वित्त उगाही, भारतीय आईटी क्षेत्र के कुल आकार से कहीं बड़ी है। कॉइनमार्केटकैप.कॉम के अनुसार, जुलाई 2018 में शीर्ष 100 ब्लॉकचेन परियोजनाओं का कुल बाजार पूंजीकरण 280-300 अरब डॉलर रहा जो भारतीय आईटी उद्योग के आकार का लगभग दोगुना है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2017 में भारतीय आईटी उद्योग का आकार 154 अरब डॉलर का रहा। 

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