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इंडियाएआई मिशन का बजट दोगुना करने की तैयारी, सरकार ₹20,000 करोड़ खर्च करने पर कर रही विचार

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले साल इंडियाएआई मिशन के तहत पांच वर्षों के लिए 10,372 करोड़ रुपये आवंटित किए थे।

Last Updated- September 16, 2025 | 11:23 PM IST
artificial intelligence

सरकार इंडियाएआई मिशन के तहत होने वाले खर्च को अगले पांच वर्षों में लगभग दोगुना बढ़ाकर 20,000 करोड़ रुपये करने पर विचार कर रही है क्योंकि कार्यक्रम का दायरा बढ़ रहा है। मामले से अवगत कई सूत्रों ने इसकी जानकारी दी। बढ़े बजट का उपयोग अतिरिक्त ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) जोड़ने के साथ-साथ स्वदेशी आधारभूत मॉडल, लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम), लार्ज रीजनिंग मॉडल (एलआरएम), और स्मॉल लैंग्वेज मॉडल (एसएलएम) बनाने के लिए इंडियाएआई मिशन के तहत ज्यादा स्टार्टअप और कंपनियों को लाने में किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले साल इंडियाएआई मिशन के तहत पांच वर्षों के लिए 10,372 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। इसका उद्देश्य देश के एआई नवोन्मेष पारि​स्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल तैयार करना था। उक्त व्यक्तियों में से एक ने कहा, ‘सरकार अतिरिक्त बजट देने के लिए तैयार है। सरकार इसे दोगुना करना चाहती है और इसके लिए बातचीत चल रही है।’

एक सूत्र ने कहा कि मिशन के तहत कोष को दोगुना किया जाएगा लेकिन इसकी सटीक समयसीमा या आवंटित की जाने वाली धनराशि अभी तय नहीं की गई है। भारत ने एआई क्षेत्र में मुकाम हासिल करने की उम्मीद से स्वदेशी आधारभूत मॉडल विकसित करने के लिए चार स्टार्टअप- सर्वम, सॉकेटएआई, गण एआई और ज्ञानी एआई- का चयन किया है।

सर्वम एआई को 2047: सिटिजन कनेक्ट और एआई4प्रगति जैसे उपयोग मामलों के माध्यम से प्रशासनिक और सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच को बढ़ाने के लिए ओपन सोर्स 120 अरब पैरामीटर एआई मॉडल विकसित करके देश का पहला स्वदेशी एलएलएम पारि​स्थितिकी तंत्र बनाने के लिए चुना गया है।

सॉकेट देश की भाषाई विविधता के अनुरूप भारत का पहला ओपन सोर्स 120 बिलियन पैरामीटर आधारभूत मॉडल विकसित करेगी जो रक्षा, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों को लक्षित करेगा।

ज्ञानी उन्नत तर्क क्षमताओं के साथ बहुभाषी, रीयल-टाइम स्पीच प्रोसेसिंग प्रदान करने वाला वॉयस एआई फाउंडेशन मॉडल बनाएगी और गण एआई टेक्स्ट-टू-स्पीच क्षमताओं को लक्षित करते हुए 70 बिलियन पैरामीटर बहुभाषी फाउंडेशन मॉडल बनाएगी। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि भारत ने अपनी जीपीयू क्षमता को 18,417 से बढ़ाकर लगभग 40,000 कर दिया है।

भारत के महत्त्वाकांक्षी एआई मिशन लक्ष्यों पर प्रतिक्रिया देते हुए एक सूत्र ने कहा कि भू-राजनीतिक परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए इस बात पर सहमति है कि भारत को एआई स्टैक की हर परत में अधिक आत्मनिर्भर होने का प्रयास करना चाहिए।

बजट बढ़ाने का कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब सरकार टेक महिंद्रा, फ्रैक्टल, भारतजेन, जेनलूप तथा चार अन्य उद्यमों सहित आठ और कंपनियों को एलएलएम बनाने के लिए अनुबंध देने की प्रक्रिया में है।

हालांकि वेल्थ मैनेजमेंट फर्म बर्नस्टीन ने सरकार की एआई पहल पर कुछ संदेह जताया है और चेतावनी दी है कि कार्यक्रम के वैश्विक स्तर पर महत्त्वहीन होने का खतरा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आधारभूत मॉडल बनाने वाली गिनी-चुनी स्टार्टअप हैं जो बमुश्किल वैश्विक स्तर पर पंजीकृत हैं। इसमें आशंका जताई गई है कि ज्यादा पूंजी और बेहतर बुनियादी ढांचा वाली अमेरिकी फर्मों के एआई पर हावी होने की आशंका है।

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First Published - September 16, 2025 | 10:02 PM IST

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