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उत्तराखंड में हिमखंड टूटने से भारी तबाही

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Last Updated- December 12, 2022 | 8:41 AM IST

उत्तराखंड में हिमखंड (ग्लेशियर) टूटने और उसके बाद अचानक बाढ़ आने से भीषण तबाही होने की आशंका है। रविवार को आई इस प्राकृतिक आपदा से राज्य में चार जल विद्युत परियाजनाओं को नुकसान पहुंचा है और 150 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं।  हिमखंड टूटने के बाद चमोली जिले में अलकनंदा नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी आ गया। स्थानीय खबरों के अनुसार एनटीपीसी के तपोवन विष्णुगाड़ जल विद्युत संयंत्र में कई कर्मी एकाएक आई बाढ़ में फंस गए हैं। मगर समाचार लिखे जाने तक  कंपनी ने इस बात की पुष्टि नहीं की। इस घटना पर राज्य सरकार की तरफ से जारी बयानों में कहा गया है कि चमोली जिले में जोशीमठ के पास बर्फ की चट्टान टूटी है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्विटर पर कहा, ‘राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहे हैं और एनटीपीसी तथा ऋषिगंगा से लापता हुए कर्मचारियों को बचाने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं।’ इस घटना पर एनटीपीसी ने कहा, ‘उत्तराखंड में तपोवन के निकट हिमखंड टूटने से हमारी एक निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजना को नुकसान पहुंचा है। राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं।’ सबसे अधिक नुकसान अलकनंदा नदी पर तैयार हो रही 130 मेगावॉट क्षमता वाली निजी परियोजना ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट को पहुंचा है। इस परियोजना के मलबे से नीचे नदी पर बने दूसरे संयंत्रों को भी नुकसान पहुंचा है। उद्योग जगत के सूत्रों ने कहा कि 520 मेगावॉट की तपोवन परियोजना के साथ सरकार नियंत्रित टीएचडीसी की पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना और जेपी समूह की विष्णुप्रयाग परियोजना को भी नुकसान पहुंचा है। पीपलकोटी में 111-111 मेगावॉट क्षमता वाले चार संयंत्र हैं। उधर देश की सबसे बड़ी जल विद्युत कंपनी एनएचपीसी लिमिटेड ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र में उसकी कोई जल विद्युत परियोजना नहीं है और सभी बिजलीघर सुरक्षित हैं।   
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी बयान में कहा गया, ‘टिहरी बांध से पानी छोडऩा बंद कर दिया गया है ताकि ऋषि गंगा और अलकनंदा में आया पानी नीचे बह जाए। सभी गांव और निचले इलाके खाली करा दिए गए हैं।’ अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए बदरीनाथ नदी से पानी रोक दिया गया है और सरकार ने श्रीनगर और ऋषिकेश बांध से भी पानी निकाल देने के लिए कहा है ताकि अलकनंदा नदी का पानी उनमें रोका जा सके। राज्य सरकार के कार्यालय ने कहा कि पुलिस, सेना, आईटीपीबीपी और राज्य आपदा मोचन बल भी मौके पर तैनात हैं।
विशेषज्ञों ने भविष्य में इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के आवंटन में बेहद सावधानी बरतने की सलाह दी है। बड़ी जल विद्युत एवं ढांचागत परियोजनाओं के दुष्प्रभावों पर काम करने वाली एक गैर-सरकारी संस्था माटू जन संगठन के विमल भाई ने कहा, ‘यह सावधान करना नहीं बल्कि दौड़ते व्यक्ति को रोकने की कोशिश करना और उसे बताना है कि तुम गलत दौड़ रहे हो। चमोली बांध ही तीन बार टूट चुका है। 125 लोगों के लापता होने की खबर है। इसके लिए पूरी तरह नीति निर्धारक जिम्मेदार हैं।’ इससे पहले जून 2013 में भारी वर्षा और अचानक बाढ़ से उत्तराखंड में 5,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई थी।

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First Published - February 7, 2021 | 11:14 PM IST

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