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तकनीकी तंत्र: अंतरिक्ष में निवेश के असीमित लाभ

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आठ दशक बाद हम उपग्रहों से आने वाली तरंगों की मदद से रेडियो, टेलीविजन और दूरसंचार सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।

Last Updated- August 27, 2023 | 9:52 PM IST
An investment with infinite returns

विज्ञान कथाओं के लेखक आर्थर सी क्लार्क ने ‘डेथ ऐंड द सीनेटर’ नाम की एक लघु कथा लिखी थी। इस कहानी की पटकथा काफी सरल है- अमेरिका में राष्ट्रपति बनने की आकांक्षा रखने वाला एक प्रभावशाली सीनेटर एक ऐसी बीमारी से ग्रसित है, जो जल्द ही उसकी मृत्यु का कारण बनने वाली है। सीनेटर की जान केवल उसी शर्त पर बच सकती है जब उसका इलाज अंतरिक्ष में शून्य गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में किसी स्वास्थ्य सुविधा केंद्र में किया जाए।

मगर अंतरिक्ष में नैशनल एरोनॉटिक्स ऐंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) का कोई अस्पताल (अंतरिक्ष अस्पताल) नहीं है। इसका कारण यह है कि इसी सीनेटर की अध्यक्षता वाली एक समिति ने नासा का बजट कम कर दिया था और शून्य गुरुत्वाकर्षण वाला शोध अस्पताल स्थापित करने के लिए रकम आवंटित करने से इनकार कर दिया था। सोवियत संघ ने अंतरिक्ष में ऐसी सुविधा स्थापित कर रखी है और वह सीनेटर का इलाज वहां करने का प्रस्ताव देता है। मगर यह दक्षिणपंथी विचारधारा रखने वाले इस सीनेटर के लिए राजनीतिक आत्महत्या करने के समान होगा।

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क्लार्क केवल विज्ञान कथाओं के लेखक ही नहीं नहीं थे। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने रॉयल एयर फोर्स के लिए रेडार प्रणाली पर भी काम किया था। उन्होंने अपने सबसे पहले प्रकाशित शोध पत्र में भू-स्थैतिक उपग्रह (जियोस्टेशनरी सैटेलाइट) तंत्र की स्थापना की योजना तैयार की थी। इस तंत्र से वैश्विक संचार को बढ़ावा देना आसान होता। 1945 में प्रकाशित पत्र ‘एक्स्ट्रा-टेरेस्ट्रियल रिलेजः कैन रॉकेट स्टेशंस गिव वर्ल्ड-वाइड रेडियो कवरेज?’ में पृथ्वी के घुमाव के इर्द-गिर्द रेडियो तरंग भेजने के लिए भू-स्थैतिक उपग्रह से रेडियो तरंग उत्पन्न करने की संकल्पना तैयार की गई थी।

आठ दशक बाद हम उपग्रहों से आने वाली तरंगों की मदद से रेडियो, टेलीविजन और दूरसंचार सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। वैश्विक संचार एवं मनोरंजन पूरी तरह उपग्रहों पर निर्भर हैं। वैश्विक संचार तो इसका केवल एक हिस्सा भर है क्योंकि अंतरिक्ष विज्ञान कई रूपों में अरबों लोगों पर सीधा एवं सकारात्मक प्रभाव डालता है।

मौसम का पूर्वानुमान एवं तूफान-चक्रवात आदि की चेतावनी भी अंतरिक्ष में स्थापित कृत्रिम उपग्रहों से संभव हो पाते हैं। सौर ऊर्जा प्रणाली भी सबसे पहले अंतरिक्ष के लिए ही विकसित हुई थी। अंतरिक्ष में अनुसंधान करने गए लोगों के स्वास्थ्य की जांच करने में चिकित्सकों की मदद के लिए ही टेलीमेडिसन एवं संबद्ध उपकरण तैयार किए गए थे। अब इस सुविधा का लाभ सभी ले रहे हैं। जिम में दिखने वाले उपकरण भी शुरू में अंतरिक्ष में इस्तेमाल के लिए तैयार हुए थे।

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शहरी जल आपूर्ति एवं अपशिष्ट पदार्थ निकासी व्यवस्था पुनर्चक्रीकरण (रीसाइक्लिंग) विधियों का इस्तेमाल करती है मगर ये अंतरिक्ष में मानव के अपशिष्ट पदार्थों की रीसाइक्लिंग के लिए ही विकसित हुई थीं। विमानों एवं रेलगाड़ियों में प्लमबिंग के मामले में भी यही बात लागू होती है। कार्बन डाइऑक्साइड गैस जमा कर इसे शुद्ध करने की प्रणाली भी पहले अंतरिक्ष में उपयोग के लिए विकसित हुई थी।

कार में इस्तेमाल होने वाली भू-स्थैतिक तकनीक के साथ बिजली पारेषण का ढांचा तैयार करने, सड़कों के संरेखीकरण एवं शहरों में इमारतों की संख्या का पता लगाने की तकनीक भी सबसे पहले अंतरिक्ष के लिए ही तैयार हुई थीं। ये सभी उपग्रह पर आधारित हैं।

रोबोटिक्स, स्वचालित वाहन, लेजर पावर, कंप्यूटिंग हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर, एग्जॉटिक अलॉयज और उष्मा एवं विकिरण से सुरक्षा देने वाले सिरैमिक्स ये सभी अंतरिक्ष अनुसंधान में मदद के लिए तैयार हुई थीं। अंतरिक्ष ने उन सैकड़ों तकनीकों के विकास में मदद की है जिनका इस्तेमाल हम अपने रोजमर्रा के जीवन में कर रहे हैं।

नासा अपनी विशेष सुविधाओं (पेटेंट) पर सालाना एक अद्यतन रिपोर्ट जारी करता है और इन पेटेंट का लाइसेंस निजी उद्योग को देता है। ऐसे पेटेंट की संख्या हजारों में है। चूंकि, नासा अपने उपकरणों एवं प्रणालियों के लिए निविदाएं जारी करता है इसलिए ऐसी तकनीक एवं पेटेंट तेजी से वाणिज्यिक नागरिक इस्तेमाल में लाई जाती हैं।

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इसका थाह लगा पाना कठिन है कि अंतरिक्ष अनुसंधान एवं इसके लिए विकसित तकनीक ने हमारी कितनी मदद की है। अंतरिक्ष अनुसंधान पर अब तक हुए निवेश के कई गुना फायदे हुए हैं। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अंतरिक्ष कार्यक्रमों के बिना 21वीं शताब्दी की सभ्यता की कल्पना कर पाना असंभव होगा।

मूलभूत विज्ञान में हुई प्रगति और इनसे भविष्य में मिलने वाले लाभ से अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में हुई प्रगति काफी अलग है। चांद, मंगल और बुध पर वायुमंडल की समझ होने से हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिल रही है। बड़े उल्का पिंडों के पृथ्वी से टकराने से रोकने की क्षमता भी विकसित करने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। पृथ्वी के इतिहास में दो बार यह घटना घट चुकी है इसलिए ये बातें केवल लोगों में भय पैदा करने के लिए नहीं हो रही हैं। वह दिन भी अधिक दूर नहीं जब अंतरिक्ष अनुसंधान एवं खनन से भविष्य में लाखों करोड़ डॉलर के उद्योग खड़े हो सकते हैं।

ये बातें सभी जानते हैं और इन्हें लेकर कहीं विवाद या बहस की गुंजाइश नहीं है। हालांकि, जब भी अंतरिक्ष से जुड़ा कोई अभियान लोगों की नजरों में आता है तो कुछ लोग एक बेतुका प्रश्न बैठते हैं कि आखिर हम अंतरिक्ष कार्यक्रम पर इतनी रकम क्यों खर्च कर रहे हैं? इसका जवाब कई बार दिया जा चुका है। ऐसी आलोचनाओं का सटीक उत्तर यह होगा कि हमें अंतरिक्ष कार्यक्रम पर और अधिक रकम खर्च करनी चाहिए। अंतरिक्ष कार्यक्रमों से हमें जितने लाभ मिले हैं और भविष्य में जो संभावनाएं दिख रही हैं उन्हें देखते हुए अधिक से अधिक निवेश करने की शत-प्रतिशत गुंजाइश है।

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First Published - August 27, 2023 | 9:52 PM IST

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