लगातार आठ वर्षों से भारत के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा हासिल करने वाला मध्य प्रदेश का शहर इंदौर जल प्रदूषण के कारण बड़े स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है। यहां के भागीरथपुरा इलाके में सीवेज मिला पेयजल पीने से कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। इस साल 2 जनवरी तक राज्य में 2025-26 के दौरान पानी के नमूनों में बैक्टीरिया पाए जाने के 40 मामले दर्ज किए गए हैं, जो देश भर में कुल मामलों का 0.15 प्रतिशत है।
वैसे वर्ष 2025-26 के दौरान देश भर में दूषित पानी के कुल मामलों में पश्चिम बंगाल का हिस्सा 44.52 प्रतिशत है। इससे पहले 2021-22 में यहां ऐसे मामले 66.29 प्रतिशत दर्ज किए गए थे। इसी अवधि में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी दोगुनी होकर 38.77 प्रतिशत पहुंच गई है।
वर्ष 2021-22 में 15.8 प्रतिशत गांवों में पानी में बैक्टीरिया की शिकायतें आई थीं, लेकिन 2024-25 आते-आते यह आंकड़ा लगभग दोगुना होकर 28.59 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इसी अवधि के दौरान पेयजल में रसायन पदार्थों की मिलावट 84.2 प्रतिशत से कम होकर 71.41 प्रतिशत हो गई है। लेकिन पेयजल में रासायनिक पदार्थों की मिलावट अभी भी प्रमुख खतरा बना हुआ है।
वर्ष 2016-17 में पानी के कुल नमूनों में 16.52 प्रतिशत दूषित निकलते थे जबकि 2024-25 यह आंकड़ा घटकर 4.1 प्रतिशत पर आ गया है। लेकिन इस अवधि में परीक्षण का काम लगभग दोगुना हो गया। पहले जहां 46 लाख नमूने भरे जाते थे, अब यह संख्या 83 लाख पहुंच गई है।