पिछले साल ग्रामीण बाजारों में वाहन बिक्री टॉप गियर में रही। वाहन डीलरों के संगठन फाडा के आंकड़ों के अनुसार 2025 में यात्री वाहनों की बिक्री वृद्धि में ग्रामीण बाजार शहरी इलाके से आगे निकल गई। शहरी बाजारों में यात्री वाहनों की बिक्री 8 फीसदी बढ़ी जबकि ग्रामीण इलाकों में इसमें 12 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। ग्रामीण बाजारों में इस दौरान कुल 44.7 लाख यात्री वाहन बिके, जबकि साल 2024 में कुल 41 लाख वाहनों की बिक्री हुई थी।
इससे भी महत्त्वपूर्ण यह है कि 2025 के दौरान कुल यात्री वाहनों की बिक्री का लगभग 33 फीसदी सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे वैकल्पिक ईंधन श्रेणी में आया। सीएनजी वाहनों की बिक्री हिस्सेदारी 18 फीसदी से बढ़कर 21 फीसदी हो गई और ईवी बिक्री हिस्सेदारी 2.4 फीसदी से बढ़कर 4 फीसदी हो गई। हाइब्रिड की बिक्री 2024 में 8.7 फीसदी थी जो 25 में घटकर 8.2 फीसदी रही। दूसरी ओर कुल वाहन बिक्री में पेट्रोल से चलने वाहनों की बिक्री हिस्सेदारी 2024 में 52 फीसदी थी जो 2025 में घटकर 49 फीसदी रह गई और डीजल वाहनों की बिक्री 18 फीसदी पर स्थिर रही।
दिसंबर महीने में भी यात्री वाहनों की बिक्री में तेजी बनी रही और सालाना आधार पर इस दौरान 26.64 फीसदी की वृद्धि हुई। दिसंबर में ग्रामीण बाजारों में यात्री वाहनों की बिक्री वृद्धि 32.40 फीसदी रही। दिसंबर 2024 में 2,99,799 यूनिट के मुकाबले दिसंबर 2025 में 3,79,671 वाहन बिके। फाडा के अध्यक्ष सीएस विघ्नेश्वर ने कहा, ‘ फसलों की पैदावार अच्छी रही और मॉनसून भी बेहतर रहा। सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य ने भी ग्रामीण खरीदारी में मदद की। इसके साथ ही माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में कटौती, आयकर में राहत और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रीपो दर में कटौती से ग्रामीण बाजारों में बिक्री को दम मिला।’
दोपहिया की बिक्री 7.24 फीसदी, यात्री वाहन की 9.70 फीसदी, वाणिज्यिक वाहन की 6.71 फीसदी और ट्रैक्टरों की बिक्री 11.52 फीसदी बढ़ी है। फाडा के अध्यक्ष ने कहा, ‘शहरी बाजार में वाहनों की खुदरा बिक्री 8.20 फीसदी और ग्रामीण इलाकों में 7.31 फीसदी बढ़ी। यात्री वाहन की मांग ग्रामीण बाजार में ज्यादा रही जो शहरी बाजारों के 8.08 फीसदी की तुलना में 12.31 फीसदी बढ़ी। यह महानगरों से इतर व्यक्तिगत परिवहन के मजबूत प्रसार को रेखांकित करती है।’ फाडा के अनुसार ग्रामीण बाजारों में वे क्षेत्र शामिल हैं जहां 40 फीसदी से अधिक आबादी कृषि पर निर्भर है।
दिलचस्प है कि भारत की वाहनों की कुल खुदरा बिक्री 2.82 करोड़ इकाई रही। विघ्नेश्वर ने कहा, ‘जनवरी से अगस्त तक मांग नरम रही मगर बजट में आयकर कर राहत और ब्याज दरों में कटौती से बाद में बिक्री थोड़ी बढ़ी। जीएसटी दर में कटौती के बाद सितंबर से दिसंबर तक स्पष्ट बदलाव आया।’
दिसंबर 2025 में उद्योग ने 20.3 लाख वाहनों की खुदरा बिक्री की, जो इससे पिछले साल के समान अवधि से 14.63 फीसदी अधिक है। दोपहिया वाहनों की बिक्री 9.50 फीसदी बढ़ी। दोपहिया में ईवी की हिस्सेदारी बढ़कर 7.40 फीसदी हो गई। दिसंबर में वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 24.60 फीसदी बढ़ी।