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SEBI ने बदले 30 साल पुराने स्टॉकब्रोकरों के नियमों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिलेगा बढ़ावा

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इस बदलाव में नियामक भाषा को सरल किया गया, पुराने प्रावधानों को हटा दिया गया और स्पष्ट परिभाषाएं पेश की गई हैं

Last Updated- January 08, 2026 | 6:15 PM IST
SEBI

मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने अपने तीन दशक से ज्यादा पुराने स्टॉकब्रोकर नियमों में बदलाव किया है। नए नियम ब्रोकरों को अन्य फाइनैंशियल रेगुलेटर्स के फ्रेमवर्क के तहत काम करने की अनुमति देते हैं। इसका मकसद अनुपालन आसान बनाना और कारोबार करने में सुगमता (ease of doing business) प्रदान करना है।

नए नियम, सेबी (स्टॉक ब्रोकर्स) रेगुलेशन 1992 को बदलकर सेबी (स्टॉक ब्रोकर्स) रेगुलेशन 2026 (SB Regulation) बनाया गया है। इस बदलाव में नियामक भाषा को सरल किया गया, पुराने प्रावधानों को हटा दिया गया और स्पष्ट परिभाषाएं पेश की गई हैं।

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नए स्टॉकब्रोकर नियमों में क्या बदलेगा

नए नियम के तहत, सेबी ने बुधवार को अपने नोटिफिकेशन में कहा, “एक स्टॉक ब्रोकर किसी अन्य फाइनैंशियल सेक्टर रेगुलेटर या किसी अन्य खास प्राधिकरण के रेगुलेटर फ्रेमवर्क के तहत काम कर सकता है, जैसा कि बोर्ड द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है। ऐसी गतिविधि संबंधित फाइनैंशियल सेक्टर रेगुलेटर या प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आएगी।”

साथ ही, SB Regulations को ग्यारह अध्यायों में बांटा गया है। ये नियम स्टॉकब्रोकरों से जुड़े सभी मुख्य पहलुओं को विस्तार से कवर करते हैं।

नियमों का आसान बनाने पर सेबी का जोर

पुनर्गठन के हिस्से के रूप में, सेबी ने कुछ ऐसे शेड्यूल हटा दिए हैं जिनकी अब जरूरत नहीं है और जरूरी शेड्यूल को सीधे नियमों में अध्याय के रूप में शामिल किया गया है, ताकि पढ़ने और समझने में आसानी हो।

इसके अलावा, कुल संरचना को सरल बनाने के लिए दोहराए जाने वाले प्रावधान हटाए गए हैं और अंडरराइटिंग, आचार संहिता और स्टॉकब्रोकरों के लिए अनुमति प्राप्त अन्य गतिविधियों से जुड़े सेक्शन को सुधाक कर फिर से व्यवस्थित किया गया है।

स्पष्टता बढ़ाने के लिए, सेबी ने कई प्रमुख परिभाषाओं में संशोधन किया है, जिनमें क्लियरिंग मेंबर, प्रोफेशनल क्लियरिंग मेंबर, प्रॉप्रायटरी ट्रेडिंग मेंबर, प्रॉप्रायटरी ट्रेडिंग और डिजाइनैटेड डायरेक्टर से संबंधित परिभाषाएं शामिल हैं।

(PTI इनपुट के साथ)

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First Published - January 8, 2026 | 6:08 PM IST

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