दिसंबर के पहले सप्ताह में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने क्रिसमस से पहले ही खुशखबरी दी। केंद्रीय बैंक ने नीतिगत ब्याज दर में 25 आधार अंक की कटौती की तथा ओपन मार्केट ऑपरेशंस (ओएमओ) और डॉलर-रुपये की खरीद-बिक्री स्वैप के माध्यम से प्रणाली में पर्याप्त नकदी डालने का वादा किया।
उसके बाद पिछले शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष की आखिरी नीति और केंद्रीय बजट के बाद पहली नीति प्रत्याशित रही। ऐसा होना स्वाभाविक भी था। जैसा कि कहावत है, ‘अगर कोई चीज सही काम कर रही है, तो उसे बदलने की ज़रूरत नहीं’। हम इसे ‘अस्थायी नीति’ कह सकते हैं।
भारतीय केंद्रीय बैंक की दर निर्धारण संस्था मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक के अंत में नीतिगत दर 5.25 फीसदी पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया गया और रुख ‘तटस्थ’ बना रहा। नीतिगत दर पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। हालांकि, एमपीसी के छह सदस्यों में से एक, राम सिंह का रुख अलग था और वह दर में ‘उदार’ रुख के पक्ष में थे।
दर और रुख दोनों में यथास्थिति बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप थी। फिर भी, कुछ बाजार प्रतिभागियों द्वारा तरलता उपायों की अपेक्षा के चलते 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 6.65 फीसदी से बढ़कर 6.74 फीसदी हो गई। बैंकों के कैश रिजर्व रेशियो में कटौती की भी पुरजोर मांग उठी। आरबीआई ने ऐसा करने से परहेज किया। इतनी जल्दी क्या है? दिसंबर 2025 के पहले सप्ताह में हुई एमपीसी की पिछली बैठक के बाद से दैनिक औसत प्रणाली तरलता या नकदी लगभग 70,000 करोड़ रुपये के अधिशेष की रही है। फिलहाल, अधिशेष कम से कम 2 लाख करोड़ रुपये है।
हालांकि किसी विशिष्ट तरलता उपाय की घोषणा नहीं की गई, मल्होत्रा के बयान में कहा गया: ‘आगे चलकर, आरबीआई तरलता प्रबंधन में सक्रिय रहेगा और अर्थव्यवस्था की उत्पादक आवश्यकताएं पूरी करने और मौद्रिक नीति के संचरण को सुगम बनाने के लिए बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता सुनिश्चित करेगा। तरलता प्रबंधन के लिए पहले से ही उपाय किए जाएंगे, जिनमें सरकारी अधिशेष में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव, चलन में मौजूद मुद्रा में परिवर्तन, विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप आदि के लिए पर्याप्त गुंजाइश होगी।’
उम्मीदों के मुताबिक, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए अपने वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि अनुमानों को 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 6.9 फीसदी और दूसरी तिमाही के लिए 6.8 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है।
जीएसटी को तर्कसंगत बनाने, सेवाओं के क्षेत्र में तेजी, मौद्रिक नीति में नरमी और कम मुद्रास्फीति से निजी उपभोग बढ़ना चाहिए, साथ ही अमेरिका, यूरोपीय संघ, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ व्यापार समझौतों से निर्यात को भी लाभ मिल सकता है।
आरबीआई ने खुदरा मुद्रास्फीति के अपने अनुमानों को भी बढ़ा दिया है। वित्त वर्ष 2026 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति दर अब 2.1 फीसदी और चौथी तिमाही के लिए 3.2 फीसदी रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए सीपीआई पर आधारित मुद्रास्फीति दर 4 फीसदी और दूसरी तिमाही के लिए 4.2 फीसदी रहने का अनुमान है। दिसंबर में, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति दर 2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था, जो अक्टूबर में अनुमानित 2.67 फीसदी से कम था।
यह चौथी बार था जब आरबीआई ने अपने मुद्रास्फीति अनुमान में कटौती की थी। उस समय वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए अनुमान 3.9 फीसदी और दूसरी तिमाही के लिए 4 फीसदी था। केंद्रीय बैंक अप्रैल में आने वाली अपनी नीति में पूरे वर्ष के जीडीपी वृद्धि और सीपीआई-आधारित मुद्रास्फीति के अनुमान जारी करेगा।
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति 4 फीसदी और दूसरी तिमाही में 4.2 फीसदी रहने का अनुमान है, ऐसे में नीतिगत मोर्चे पर लंबे समय तक कोई बदलाव होने की संभावना नहीं है। यदि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति आरबीआई के अनुमानों के अनुरूप रहती है, तो मौजूदा नीतिगत दर पर, वास्तविक दर 1 फीसदी से थोड़ी अधिक होगी। नीतिगत घोषणा के बाद मीडिया से बातचीत में मल्होत्रा ने कहा कि अगले नौ महीनों से एक वर्ष तक नीतिगत दर में शायद कोई बदलाव न हो।
पिछले साल फरवरी और दिसंबर के बीच, आरबीआई ने नीतिगत ब्याज दर को 6.5 फीसदी से घटाकर 5.25 फीसदी कर दिया था। दिसंबर में, मल्होत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था के ‘वास्तविक गोल्डीलॉक्स काल’ की बात की थी। इस बार भारतीय अर्थव्यवस्था पर उनका क्या दृष्टिकोण है?
दरअसल यह अभी भी उसी ‘अनुकूल स्थिति’ में है, या उससे भी बेहतर, क्योंकि अंतर्निहित मुद्रास्फीति नियंत्रण में बनी हुई है, जबकि वृद्धि की गति और मजबूत हो रही है। इस समय वृद्धि-मुद्रास्फीति की गतिशीलता को देखते हुए किसी भी तरह की कार्रवाई की जरूरत नहीं दिखती। आरबीआई स्थिति पर नजर रखेगा और देखेगा कि आगे क्या होता है, साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि उत्पादक उद्देश्यों और सभी बाजारों में मौद्रिक संचरण के लिए प्रणाली में पर्याप्त नकदी बनी रहे। मल्होत्रा ने कहा, ‘यह हमारा कर्तव्य है।’
मौद्रिक उपायों के अलावा, आरबीआई ने इस नीतिगत बैठक का उपयोग कुछ अन्य चीजों को आगे बढ़ाने के लिए किया है, जिनमें ग्राहक संरक्षण भी शामिल है, जो भारतीय वित्तीय प्रणाली का केंद्रीय विषय बनकर तेजी से उभर रहा है।
रिजर्व बैंक तीन मसौदा दिशानिर्देश जारी करेगा। ये दिशानिर्देश वित्तीय उत्पादों की गलत बिक्री, ऋण वसूली और वसूली एजेंटों की नियुक्ति, तथा अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहकों की देयता को सीमित करने से संबंधित हैं। योजना के तहत ग्राहकों को लेनदेन में धोखाधड़ी होने पर लगभग 25,000 रुपये तक का मुआवजा देने के लिए एक ढांचा तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही, डिजिटल भुगतान की सुरक्षा बढ़ाने के संभावित उपायों पर एक चर्चा पत्र भी प्रकाशित किया जाएगा, इसमें वरिष्ठ नागरिकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
(लेखक जन स्मॉल फाइनैंस बैंक लिमिटेड के वरिष्ठ सलाहकार और लेखक हैं)