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अमेरिकी बाजार में भारतीय फार्मा कंपनियों की सुस्ती, कीमतों के दबाव से सन फार्मा और सिप्ला पस्त

सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज ने अमेरिका में काफी हद तक ​स्थिर प्रदर्शन किया और फॉर्मूलेशन की बिक्री तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर महज 0.6 प्रतिशत बढ़ी और 47.7 करोड़ डॉलर हुई

Last Updated- February 08, 2026 | 10:34 PM IST
pharmaceutical
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही के दौरान भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार कमजोर बना रहा। इससे जेनेरिक दवाओं में लगातार मूल्य निर्धारण के दबाव, तीव्र प्रतिस्पर्धा और कंपनियों की विशिष्ट उत्पाद चुनौतियों का पता चलता है। हालांकि कंपनियों ने इसका असर कम करने के लिए जटिल और नवीन उपचारों की शुरुआत की। विश्लेषक अमेरिकी जेनेरिक बाजार के निकट भविष्य के परिदृश्य को लेकर सतर्क हैं।

प्राइमस पार्टनर्स के मुख्य कार्य अ​​धिकारी और सह-संस्थापक निलय वर्मा के अनुसार अमेरिकी जेनेरिक दवाओं में मूल्य निर्धारण का दबाव वित्त वर्ष 27 में पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा, ‘तीव्र प्रतिस्पर्धा, चैनल समेकन और कमोडिटाइजेशन से वित्त वर्ष 27 तक कीमतों पर दबाव बने रहने के असार हैं, जिससे भारतीय फार्मा कंपनियों की सीमिक बढ़त होगी।’ 

अलबत्ता उन्होंने कहा कि पेप्टाइड्स, इंजेक्टेबल्स, बायोसिमिलर और स्पेशियलिटी ड्रग्स जैसे जटिल, विशिष्ट तथा नवीन उत्पादों की ओर धीरे-धीरे बढ़ने से अगले 12 से 24 महीने के दौरान जेनेरिक दवाओं से हुई नरमी की काफी हद तक भरपाई हो सकती है, क्योंकि उनकी मूल्य निर्धारण शक्ति अपेक्षाकृत अधिक है और प्रतिस्पर्धा की तीव्रता भी कम है।

सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज ने अमेरिका में काफी हद तक ​स्थिर प्रदर्शन किया और फॉर्मूलेशन की बिक्री तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर महज 0.6 प्रतिशत बढ़ी और 47.7 करोड़ डॉलर हुई। उसकी नवीन दवाओं के पोर्टफोलियो में जो वृद्धि हुई थी, उसे कुछ दवाओं में बढ़ी प्रतिस्पर्धा के कारण जेनेरिक दवा कारोबार में आई गिरावट ने बराबर कर दिया।

तिमाही के दौरान सन फार्मा की समेकित बिक्री में अमेरिका बाजार की लगभग 27.5 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। इस दौरान कंपनी ने तीन नई जेनेरिक दवाएं पेश कीं और एडवांस्ड क्यूटेनियस स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के लिए अनलॉक्साइट को लेक्से​ल्वी के साथ उतारा। प्रबंधन ने भी संकेत दिया कि इस पर डॉक्टरों की प्रतिक्रिया प्रोत्साहित करने वाली है और वितरकों से शुरुआती ऑर्डर मिले हैं। 

डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के उत्तर अमेरिकी कारोबार में तेज गिरावट आई और तीसरी तिमाही का राजस्व सालाना आधार पर 12 प्रतिशत घटकर लगभग 2,964 करोड़ रुपये रह गया। उसका वित्त वर्ष 26 के पहले नौ महीने का राजस्व भी 12 प्रतिशत घटा।

सिप्ला का उत्तर अमेरिकी कारोबार दबाव में रहा और तिमाही राजस्व सालाना आधार पर 22 प्रतिशत घटकर 1,485 करोड़ रुपये रह गया। इसका मुख्य कारण लैनरियोटाइड आपूर्ति श्रृंखला में चल रही रुकावटें रहीं। भारत का कारोबार दमदार बना रहा, लेकिन अमेरिका की कमजोरी ने समूचे प्रदर्शन को प्रभावित किया।

इसके विपरीत एलेम्बिक फार्मास्युटिकल्स ने अपनी प्रतिस्प​धियों से बेहतर प्रदर्शन किया और व्यापक उद्योग की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद तिमाही के दौरान अपने अमेरिकी जेनेरिक कारोबार में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और यह बढ़कर 553 करोड़ रुपये हो गया।

First Published - February 8, 2026 | 10:34 PM IST

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