क्या UPI पर सब्सिडी खत्म करने का समय आ गया है? Tiered MDR व्यवस्था की जरूरत पर बहस
भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से मार्च 2026 में 29.5 लाख करोड़ रुपये के लगभग 22.6 अरब लेनदेन हुए। पूरे वित्त वर्ष 2026 में कुल 241.617 अरब लेनदेन हुए थे जिनका मूल्य लगभग 314.23 लाख करोड़ रुपये था। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने यूपीआई को एक सुरक्षित, त्वरित और अंतर-संचालनीय तत्काल भुगतान प्रणाली […]
IBC में बदलाव: घर खरीदारों पर बढ़ा फोकस, अब अधर में लटके सपनों और अटके कर्ज को मिलेगी नई उम्मीद
ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2026 का पारित होना संभवतः एक ऐसा घटनाक्रम है जिसकी जरूरत महसूस की जा रही थी। यह संशोधन विधेयक 31 मार्च को लोक सभा में पारित हो गया और इसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई है। माना जा रहा है कि इससे घर खरीदारों के हितों […]
फॉरेक्स नियंत्रण टिकाऊ नहीं, रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण पर RBI का फोकस
‘विगत चार कारोबारी सत्रों में बैंकों ने विदेशी मुद्रा आर्बिट्राज दांव की 75 फीसदी पोजीशन समेट ली है। बैंकरों का अनुमान है कि रुपये के मुकाबले लगाए गए 40 अरब डॉलर के दांव में से, लगभग 30 अरब डॉलर की खुली पोजीशन को बंद कर दिया गया है। – 7 अप्रैल’ ‘कुल मिलाकर लगभग 40 […]
वित्त में विदेशी निवेश की सालभर की हलचल: FY26 के अहम बदलावों का एक विस्तृत सारांश
इस स्तंभ में वित्त वर्ष के पहले महीने यानी अप्रैल में आम तौर पर बीते वर्ष बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र में हुए घटनाक्रम पर चर्चा होती है। इस परंपरा को जारी रखते हुए आइए उन रुझानों का विश्लेषण करते हैं जिन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 (वित्त वर्ष 2026) की दशा-दिशा तय की। मगर पहले आंकड़ों का […]
RBI ने बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच दरों में बढ़ोतरी से पहले लिया लंबा विराम
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली मौद्रिक नीति में कोई आश्चर्य का तत्त्व नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की छह सदस्यीय दर निर्धारण संस्था, मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने नीतिगत दर को 5.25 फीसदी पर अपरिवर्तित रखा। यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। एमपीसी ने ‘तटस्थ’ रुख बनाए रखने का भी निर्णय लिया। नीति का […]
RBI MPC Meet: बदलाव नहीं और इंतजार करने वाली नीति पर जोर
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दिसंबर के पहले सप्ताह में ही क्रिसमस का तोहफा दे दिया था। केंद्रीय बैंक ने 25 आधार अंकों (बीपीएस) की नीतिगत दर में कटौती की और खुले बाजार संचालन (ओएमओ) और डॉलर-रुपये के खरीद-बेच स्वैप के माध्यम से प्रणाली में पर्याप्त नकदी डालने का वादा किया। […]
बैंकों को मार्च अंत में बेहतर आंकड़े दिखाने से परहेज करना होगा
वर्ष 2024 के अप्रैल महीने के पहले हफ्ते में वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में बैंकिंग क्षेत्र के उससे पिछले हफ्ते के महत्त्वपूर्ण व्यावसायिक आंकड़ों की जांच की गई। इस दौरान यह पाया गया कि 31 मार्च (जो […]
सरकारी बैंकों में प्रमोशन के पीछे की कहानी और सुधार की बढ़ती जरूरत
सरकारी क्षेत्र के बैंकर्स के लिए मार्च का महीना बहुत थकाने वाला और भावनात्मक रूप से परेशान करने वाला होता है। उन पर कारोबारी लक्ष्य हासिल करने का दबाव होता है। अप्रैल में भी यह सिलसिला जारी रहता है ताकि सांविधिक लेखा परीक्षण सहज ढंग से हो सके। अधिकांश बैंकों में वार्षिक पदोन्नति प्रक्रिया मार्च […]
गलत बिक्री और 2047 तक सबके लिए बीमा: बैंकएश्योरेंस का रियल्टी चेक
वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) द्वारा हाल में उठाए गए कदम बैंकों द्वारा बीमा पॉलिसियों की अनुचित तरीके से बिक्री पर अंकुश लगाने की राह तैयार कर रहे हैं। इनका मुख्य उद्देश्य पर्यवेक्षण संबंधी कमियां दूर करना, बैंकों को उनके जरिये बेची गई प्रत्येक बीमा पॉलिसी […]
विकसित भारत के लिए बैंकिंग समिति का सुझाव कितना अहम
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को अपने बजट भाषण में ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी एक उच्च स्तरीय समिति’ बनाने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करना और इसे भारत के अगले विकास चरण के अनुरूप बनाना है साथ ही वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता […]








