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लेखक : तमाल बंद्योपाध्याय

आज का अखबार, लेख

ब्याज दर बढ़ाना नहीं है समाधान, रुपया संभालने के लिए RBI को आजमाने कुछ नए विकल्प

नीतिगत दरें तय करने वाली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की संस्था मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की इस सप्ताह (3 से 5 जून) बैठक होने वाली है। चालू वित्त वर्ष में एमपीसी की यह दूसरी बैठक होगी। बड़ा सवाल यह है कि इस बैठक से क्या निकल कर आने वाला है?  अप्रैल में 5 से 8 […]

आज का अखबार, लेख

लोन लेने वाली महिलाओं की बढ़ी तादाद मगर नहीं बनेगी बात, दो-तिहाई अब भी फॉर्मल सिस्टम से बाहर

भारत में उधार लेने वाली महिलाओं पर अब कुल 76 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हो गया है, जो देश की भारतीय बैंकिंग एवं वित्तीय प्रणाली में कुल कर्ज का 26 प्रतिशत है। महिलाओं पर 2017 में करीब 16 लाख करोड़ रुपये कर्ज था, जो 20 प्रतिशत सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ा है। नीति आयोग, […]

आज का अखबार, लेख

बैंक बोर्ड बैठकों में अहम मुद्दों पर ध्यान नहीं, क्यों जरूरी है गवर्नेंस में बड़ा बदलाव?

सुबह के 11:00 बज रहे हैं। तारीख कौन सी थी इसे दरकिनार करते हुए सीधे उस जगह पहुंचते हैं जहां सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक (पीएसबी) का निदेशक मंडल कक्ष (बोर्डरूम) है। महीने के इस दिन बोर्ड सचिवालय सुबह 7 बजे से काम शुरू कर देता है। पूर्वाह्न 11:02 बजे निदेशक अंदर आते हैं। बैंक […]

आज का अखबार, लेख

पीएसबी में प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन संरचना व चुनौतियां

भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) एक अनूठी चुनौती का सामना कर रहे हैं। बैंकिंग क्षेत्र में छह दशक पुराने वेतन समझौते को एक नई प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) और भारतीय बैंक संघ (आईबीए) द्वारा तैयार पीएलआई योजना वरिष्ठ बैंक […]

आज का अखबार, लेख

क्या UPI पर सब्सिडी खत्म करने का समय आ गया है? Tiered MDR व्यवस्था की जरूरत पर बहस

भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से मार्च 2026 में 29.5 लाख करोड़ रुपये के लगभग 22.6 अरब लेनदेन हुए। पूरे वित्त वर्ष 2026 में कुल 241.617 अरब लेनदेन हुए थे जिनका मूल्य लगभग 314.23 लाख करोड़ रुपये था। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने यूपीआई को एक सुरक्षित, त्वरित और अंतर-संचालनीय तत्काल भुगतान प्रणाली […]

आज का अखबार, लेख

IBC में बदलाव: घर खरीदारों पर बढ़ा फोकस, अब अधर में लटके सपनों और अटके कर्ज को मिलेगी नई उम्मीद

ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (संशोधन) अ​धिनियम, 2026 का पारित होना संभवतः एक ऐसा घटनाक्रम है जिसकी जरूरत महसूस की जा रही थी। यह संशोधन विधेयक 31 मार्च को लोक सभा में पारित हो गया और इसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई है। माना जा रहा है कि इससे घर खरीदारों के हितों […]

आज का अखबार, लेख

फॉरेक्स नियंत्रण टिकाऊ नहीं, रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण पर RBI का फोकस

‘विगत चार कारोबारी सत्रों में बैंकों ने विदेशी मुद्रा आर्बिट्राज दांव  की 75 फीसदी पोजीशन समेट ली है। बैंकरों का अनुमान है कि रुपये के मुकाबले लगाए गए 40 अरब डॉलर के दांव में से, लगभग 30 अरब डॉलर की खुली पोजीशन को बंद कर दिया गया है। – 7 अप्रैल’ ‘कुल मिलाकर लगभग 40 […]

आज का अखबार, लेख

वित्त में विदेशी निवेश की सालभर की हलचल: FY26 के अहम बदलावों का एक विस्तृत सारांश

इस स्तंभ में वित्त वर्ष के पहले महीने यानी अप्रैल में आम तौर पर बीते वर्ष बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र में हुए घटनाक्रम पर चर्चा होती है। इस परंपरा को जारी रखते हुए आइए उन रुझानों का विश्लेषण करते हैं जिन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 (वित्त वर्ष 2026) की दशा-दिशा तय की। मगर पहले आंकड़ों का […]

आज का अखबार, लेख

RBI ने बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच दरों में बढ़ोतरी से पहले लिया लंबा विराम

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली मौद्रिक नीति में कोई आश्चर्य का तत्त्व नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की छह सदस्यीय दर निर्धारण संस्था, मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने नीतिगत दर को 5.25 फीसदी पर अपरिवर्तित रखा। यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। एमपीसी ने ‘तटस्थ’ रुख बनाए रखने का भी निर्णय लिया। नीति का […]

आज का अखबार, लेख

RBI MPC Meet: बदलाव नहीं और इंतजार करने वाली नीति पर जोर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दिसंबर के पहले सप्ताह में ही क्रिसमस का तोहफा दे दिया था। केंद्रीय बैंक ने 25 आधार अंकों (बीपीएस) की नीतिगत दर में कटौती की और खुले बाजार संचालन (ओएमओ) और डॉलर-रुपये के खरीद-बेच स्वैप के माध्यम से प्रणाली में पर्याप्त नकदी डालने का वादा किया। […]

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