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लेखक : तमाल बंद्योपाध्याय

अन्य समाचार, आज का अखबार, लेख

बैंकों को मार्च अंत में बेहतर आंकड़े दिखाने से परहेज करना होगा

वर्ष 2024 के अप्रैल महीने के पहले हफ्ते में वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में बैंकिंग क्षेत्र के उससे पिछले हफ्ते के महत्त्वपूर्ण व्यावसायिक आंकड़ों की जांच की गई। इस दौरान यह पाया गया कि 31 मार्च (जो […]

आज का अखबार, लेख

सरकारी बैंकों में प्रमोशन के पीछे की कहानी और सुधार की बढ़ती जरूरत

सरकारी क्षेत्र के बैंकर्स के लिए मार्च का महीना बहुत थकाने वाला और भावनात्मक रूप से परेशान करने वाला होता है। उन पर कारोबारी लक्ष्य हासिल करने का दबाव होता है। अप्रैल में भी यह सिलसिला जारी रहता है ताकि सांविधिक लेखा परीक्षण सहज ढंग से हो सके। अधिकांश बैंकों में वार्षिक पदोन्नति प्रक्रिया मार्च […]

आज का अखबार, लेख

गलत बिक्री और 2047 तक सबके लिए बीमा: बैंकएश्योरेंस का रियल्टी चेक

वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) द्वारा हाल में उठाए गए कदम बैंकों द्वारा बीमा पॉलिसियों की अनुचित तरीके से बिक्री पर अंकुश लगाने की राह तैयार कर रहे हैं। इनका मुख्य उद्देश्य पर्यवेक्षण संबंधी कमियां दूर करना, बैंकों को उनके जरिये बेची गई प्रत्येक बीमा पॉलिसी […]

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विकसित भारत के लिए बैंकिंग समिति का सुझाव कितना अहम

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को अपने बजट भाषण में ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी एक उच्च स्तरीय समिति’ बनाने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करना और इसे भारत के अगले विकास चरण के अनुरूप बनाना है साथ ही वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता […]

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रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में भारत के छोटे लेकिन स्थिर कदम

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मासिक बुलेटिन में जनवरी 2026 से देश के कुल निर्यात और आयात की रुपये में बिलिंग और निपटान से संबंधित दो सारणियां शामिल की जाने लगीं। हालांकि फिलहाल भारत के कुल अंतरराष्ट्रीय व्यापार का लगभग 5 फीसदी हिस्सा ही रुपये में तय होता है, फिर भी यह आंकड़ा ऐसे बदलाव […]

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एक बार फिर निजी बैंकों पर भारी सरकारी बैंक, तिमाही मुनाफा रिकॉर्ड ऊंचाई पर

इससे पहले कि हम उनके मुनाफे की बात करें, आइए पहले नजर डालते हैं परिसंपत्ति गुणवत्ता पर जो बैंकों को मुनाफे वाला बनाने में अहम भूमिका निभाती है। दिसंबर तिमाही में 30 सूचीबद्ध सार्वभौमिक बैंकों में से केवल 3 का फंसा हुआ कर्ज यानी एनपीए 1 फीसदी से अधिक रहा। सभी 3 निजी क्षेत्र के […]

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मिस-सेलिंग की असली कहानी: बैंक इंसेंटिव ढांचे का नतीजा

मध्य भारत के एक कस्बे में मौजूद एक बड़े सरकारी बैंक की शाखा गत वर्ष कम लागत वाले चालू और बचत खातों (कासा) तथा खुदरा सावधि जमा में न्यूनतम वृद्धि हासिल करने में भी नाकाम रही। वास्तव में उसने तीन प्रमुख कारोबारी मानकों पर वार्षिक वृद्धि लक्ष्यों को हासिल नहीं किया। कासा और सावधि जमा […]

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बैंकिंग साख: सूक्ष्म वित्त के लिए एक नए मॉडल की दरकार

केंद्रीय बजट 2026-27 में लघु व्यवसायों को इक्विटी सहायता प्रदान करने और लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) को चैंपियन बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई विकास कोष का प्रस्ताव रखा गया है। यह एसएमई क्षेत्र के लिए खुशखबरी है। ऐसे उद्यमों (विशेषकर लघु उद्यमों) को ऋण देने वाले कुछ संस्थान-सूक्ष्म वित्त संस्थान (एमएफआई)-बजट […]

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अर्थव्यवस्था की ​बढ़ती रफ्तार और काबू में महंगाई के बीच लंबे समय तक दरों में बदलाव के आसार नहीं

दिसंबर के पहले सप्ताह में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने क्रिसमस से पहले ही खुशखबरी दी।  केंद्रीय बैंक ने नीतिगत ब्याज दर में 25 आधार अंक की कटौती की तथा ओपन मार्केट ऑपरेशंस (ओएमओ) और डॉलर-रुपये की खरीद-बिक्री स्वैप के माध्यम से प्रणाली में पर्याप्त नकदी डालने का वादा किया।  उसके […]

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बजट, सरकारी उधारी और आरबीआई: वित्त वर्ष 2027 के बढ़ते दबावों को संभालने की चुनौती

आगामी बजट एक नए युग की शुरुआत करेगा। राजकोषीय मजबूती का आधार घाटे और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात से हटकर ऋण और जीडीपी अनुपात पर केंद्रित होगा। ऋण-जीडीपी अनुपात मध्यम अवधि में वित्त वर्ष2026 के 56.1 फीसदी से घटकर वित्त वर्ष 2031 तक 50 फीसदी (1 फीसदी कम या ज्यादा) तक पहुंच सकता […]

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