Climate Insurance for Small Business: जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ भविष्य की चेतावनी नहीं रहा, बल्कि यह छोटे व्यापारियों और दुकानदारों की रोजमर्रा की जिंदगी को सीधे प्रभावित कर रहा है। बाढ़, भीषण गर्मी, भारी बारिश और चक्रवात जैसी घटनाएं पहले के मुकाबले अधिक आ रही है और ज्यादा तीव्रता से हो रही हैं। इसका सबसे बड़ा असर देश के छोटे व्यापारियों और MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) पर पड़ रहा है, जिनकी आमदनी रोज के कारोबार पर टिकी होती है।
EDME इंश्योरेंस ब्रोकर्स की हेड (इंटरनेशनल बिजनेस एंड क्लाइमेट रिस्क) नेहा यादव का कहना है कि अधिकतर छोटे व्यापारी सीमित बचत के साथ काम करते हैं। ऐसे में अगर किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से दुकान या कारखाना कुछ दिनों के लिए भी बंद हो जाए, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार कुछ दिन का नुकसान ही महीनों की कमाई पर भारी पड़ जाता है।
नेहा यादव कहती हैं, “क्लाइमेट इंश्योरेंस छोटे व्यापारियों के लिए एक ऐसा सुरक्षा साधन है, जो उन्हें प्राकृतिक आपदाओं से उबरने में मदद करता है। इस बीमा के तहत बाढ़, तेज बारिश, गर्मी या चक्रवात जैसी घटनाओं से दुकान, गोदाम, मशीनरी और सामान को हुए नुकसान को कवर किया जा सकता है। इतना ही नहीं, अगर किसी आपदा की वजह से कारोबार अस्थायी रूप से बंद करना पड़े और आमदनी रुक जाए, तो क्लाइमेट इंश्योरेंस से आय के नुकसान की भरपाई भी की जा सकती है।”
यादव के मुताबिक, इस तरह का बीमा छोटे व्यापारियों को जल्दी दोबारा कारोबार शुरू करने में मदद करता है। बिना बीमा के कई व्यापारी मरम्मत या दोबारा स्टॉक खरीदने के लिए पैसों का इंतजाम नहीं कर पाते, जिससे दुकान लंबे समय तक बंद रहती है। इसका नतीजा यह होता है कि ग्राहक दूसरी जगह चले जाते हैं और कारोबार को दोबारा खड़ा करना मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में तो छोटे व्यवसाय पूरी तरह से उबर ही नहीं पाते।
आज के समय में क्लाइमेट इंश्योरेंस के ऐसे समाधान भी मौजूद हैं, जो खास तौर पर छोटे व्यापारियों और MSME के लिए बनाए गए हैं। इनमें से एक है पैरामीट्रिक इंश्योरेंस। यह पारंपरिक बीमा से अलग होता है, क्योंकि इसमें नुकसान का लंबा आकलन करने की जरूरत नहीं पड़ती।
नेहा यादव कहती हैं, “पैरामीट्रिक इंश्योरेंस में पहले से तय मौसम से जुड़े संकेतकों, जैसे तय सीमा से ज्यादा बारिश या तापमान बढ़ने पर, अपने आप भुगतान सक्रिय हो जाता है। इससे बीमा राशि जल्दी मिल जाती है। यह व्यवस्था MSMEs के लिए इसलिए फायदेमंद है, क्योंकि इसमें पुराने नुकसान के विस्तृत रिकॉर्ड की जरूरत नहीं होती, इसे समझना आसान होता है और आपदा के समय तुरंत पैसा मिल जाता है।”
यादव का कहना है कि जब किसी आपदा के तुरंत बाद पैसे मिल जाते हैं, तो व्यापारी जल्दी मरम्मत करा सकते हैं, नया सामान ला सकते हैं और दोबारा काम शुरू कर सकते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास भी बना रहता है कि मुश्किल हालात में भी वे फिर से खड़े हो सकते हैं।
क्लाइमेट इंश्योरेंस को अब सिर्फ एक अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों के लिए एक बुनियादी सुरक्षा उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिए। यह न सिर्फ उनकी आमदनी की रक्षा करता है, बल्कि आपदा के बाद जल्दी संभलने में भी मदद करता है। अचानक आने वाले जलवायु से जुड़े झटकों के बावजूद कारोबार को जारी रखने में यह अहम भूमिका निभाता है।
नेहा यादव का कहना है कि बदलते मौसम और बढ़ती अनिश्चितताओं के दौर में छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के लिए क्लाइमेट इंश्योरेंस एक ऐसा सहारा बन सकता है, जो मुश्किल समय में उन्हें पूरी तरह टूटने से बचाए और फिर से आगे बढ़ने का भरोसा दे।