भारती एयरटेल ने वोडाफोन आइडिया को दी गई छूट की तरह अपने समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाया पर रोक लगाने की मांग दूरसंचार विभाग से नहीं की है। इसके बजाय एयरटेल ने बकाया के पुनर्मूल्यांकन और पुन: गणना के संबंध में कर्जग्रस्त दूरसंचार कंपनी (वी) जैसी समानता पर जोर दिया है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
दूरसंचार कंपनी ने विभाग को जो प्रतिवेदन दिया है, उसकी जानकारी से अवगत एक सूत्र ने कहा, ‘मोरटोरियम यानी छूट नहीं मांगी जा रही है, सिर्फ पुनर्मूल्यांकन की बात की जा रही है।’ भारती एयरटेल से पूछे गए सवालों का रविवार रात तक कोई जवाब नहीं मिला।
कार्यकारी उपाध्यक्ष गोपाल विट्टल ने शुक्रवार को कहा कि कंपनी को अभी भी विभाग से इस संबंध में कोई जवाब नहीं मिला है, जबकि उसने कई क्षेत्रों में समानता की मांग करते हुए कई अनुरोध किए हैं। इनमें गणना की गलतियां, आंकड़े संबंधित गलतियां और चूक शामिल हैं, जिनका आकलन वी के साथ किया गया। वी के बकाया का फिर से आकलन किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पिछले साल दिसंबर में दूरसंचार विभाग ने 87,695 करोड़ रुपये पर रोक लगा दी थी। वी को अगले 10 साल में अपने कुल बकाया में से 1,144 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद दूरसंचार विभाग की एक समिति फिर से आकलन करेगी और फिर उसका वास्तविक एजीआर भुगतान शुरू होगा।
भारती एयरटेल का एजीआर बकाया 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा होने का अनुमान है। उसका कहना है कि उसने करीब 18,000 करोड़ रुपये पहले चुका दिए हैं। लेकिन बकाया राशि लगातार बढ़ती रहेगी, क्योंकि सरकार भुगतान न करने पर मूलधन पर ब्याज, जुर्माना और जुर्माने पर ब्याज लगा
रही है।
आईआईएफएल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2026 के स्तर से पूंजीगत खर्च में मामूली गिरावट, स्पेक्ट्रम की किस्त और एजीआर लाभ न मिलने पर भी, हम वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2028 में 1.2 लाख करोड़ रुपये का कुल फ्री कैश फ्लो (एफसीएफ) हासिल होने का अनुमान लगा रहे हैं, जो बताता है कि कंपनी बकाया भुगतान करने में सक्षम है।’