facebookmetapixel
Advertisement
केजरीवाल को आबकारी नीति मामले में कोर्ट से क्लीन चिट: क्या अब बदल जाएगी 2026 की राजनीति?भारत विभाजन का गवाह ‘जिन्ना हाउस’ होगा नीलाम, ₹2600 करोड़ के इस बंगले की लगेगी बोलीफरवरी में UPI लेनदेन में मामूली गिरावट, कुल 26.84 लाख करोड़ रुपये का हुआ ट्रांजैक्शनGST की शानदार रफ्तार: फरवरी में शुद्ध राजस्व 7.9% बढ़ा, ₹1.61 लाख करोड़ पहुंचा संग्रहफिनो पेमेंट्स बैंक के CEO की गिरफ्तारी से हड़कंप, गेमिंग और सट्टेबाजी के अवैध लेनदेन पर बड़ी कार्रवाईबाजार की गिरावट में भी चमके वायर शेयर: पॉलिकैब और KEI इंडस्ट्रीज ने बनाया नया रिकॉर्डईरान-इजरायल युद्ध का बाजार पर दिख सकता है असर, सोमवार को सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट का डरपेंट दिग्गजों पर दोहरी मार: महंगे कच्चे तेल और कड़ी प्रतिस्पर्धा ने बिगाड़ा एशियन पेंट्स का गणितएमेजॉन इंडिया का बड़ा धमाका: 12.5 करोड़ उत्पादों पर रेफरल शुल्क खत्म, विक्रेताओं की होगी भारी बचतVolvo India का यू-टर्न: 2030 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनने का लक्ष्य बदला, अब बाजार तय करेगा रफ्तार

Explainer: हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की बंद हो जाए फेडरल फंडिंग तो क्या होगा?

Advertisement

फेडरल सिविल राइट्स कानूनों के उल्लंघन के आरोपों के चलते हार्वर्ड की सरकारी फंडिंग पर संकट, ट्रंप प्रशासन ने दी कड़ी चेतावनी

Last Updated- July 03, 2025 | 4:16 PM IST

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रशासन का कहना है कि हार्वर्ड ने कैंपस में यहूदी विरोधी गतिविधियों (एंटी-सेमिटिज़्म) को गंभीरता से नहीं लिया और न ही इन घटनाओं पर उचित कार्रवाई की।

सोमवार को भेजे गए एक औपचारिक नोटिस में ट्रंप प्रशासन ने यूनिवर्सिटी पर अमेरिकी फेडरल सिविल राइट्स कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया। इस नोटिस में साफ कहा गया है कि अगर हार्वर्ड ने तुरंत सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो उसकी सारी सरकारी फंडिंग बंद कर दी जाएगी और उसका अमेरिकी सरकार से रिश्ता भी प्रभावित होगा।

यह नोटिस उस समय आया है जब हार्वर्ड और अमेरिकी प्रशासन के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है, जिसमें रिसर्च फंडिंग, विदेशी छात्रों का नामांकन और कोर्ट में कई मामले शामिल हैं। हालांकि हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से कुछ नरमी के संकेत भी मिले थे, जिससे रिश्तों में सुधार की संभावना बनी थी।

नोटिस में अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की सिविल राइट्स चीफ हरमीत कौर ढिल्लों ने हार्वर्ड के प्रेसिडेंट एलन गार्बर को यह भी लिखा कि, “हार्वर्ड चाहें तो बिना सरकारी सहायता के काम करना जारी रख सकता है, और शायद यही आज़ादी उसे फिर से श्रेष्ठता की ओर ले जाए।”

 

Advertisement
First Published - July 3, 2025 | 4:16 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement