facebookmetapixel
Advertisement
अब सिर्फ ‘Hello’ लिखकर जानें PF बैलेंस और क्लेम स्टेटस, EPFO ने शुरू की व्हाट्सएप पर नई सुविधाअमेरिका से लेकर जापान तक… क्यों टूटे शेयर बाजार? मगंलवार को भारतीय बाजारों पर रहेगी नजरभारत-कनाडा के बीच व्यापार समझौते पर फिर बातचीत शुरू, 2030 तक 50 अरब डॉलर कारोबार का लक्ष्यअगस्त में महंगाई का झटका: खुदरा दर बढ़कर 4.82% पर, खाने-पीने की चीजें हुई महंगीवरिष्ठ नागरिकों को बीमा खरीदते समय किन बातों का रखना चाहिए ध्यान? ऐसे बचें मिस-सेलिंग सेइंश्योरेंस कंपनी पर ₹1 करोड़ का जुर्माना! 88 साल के बुजुर्ग को बेच दिया गलत बीमा, क्या है पूरा मामला?स्मॉल कैप फंड्स के लिए बढ़ी दिलचस्पी! मिला करीब 20% तक रिटर्न, बस इन बातों का रखें ध्याननए ई-कॉमर्स नियमों से बदल जाएगा ऑनलाइन शॉपिंग का पूरा तरीका, लेकिन आपके लिए क्या बदलेगा?निवेश घटने के बावजूद क्यों मजबूत है हाइब्रिड फंड्स का आउटलुक? किस कैटेगरी में दिख सकती है तेजीप्रणव कंस्ट्रक्शंस IPO ने मचाया धमाल! 121 गुना सब्सक्राइब, लिस्टिंग से पहले 36% प्रीमियम

फिनो पेमेंट्स बैंक के CEO की गिरफ्तारी से हड़कंप, गेमिंग और सट्टेबाजी के अवैध लेनदेन पर बड़ी कार्रवाई

Advertisement

अवैध गेमिंग और सट्टेबाजी लेनदेन में भुगतान एपीआई के दुरुपयोग को लेकर फिनो बैंक सीईओ की गिरफ्तारी के बाद अब कई अन्य पेमेंट फर्में जांच के घेरे में हैं

Last Updated- March 01, 2026 | 10:38 PM IST
Rishi Gupta, managing director and chief executive officer, Fino Payments Bank
फिनो पेमेंट्स बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) ऋषि गुप्ता की गिरफ्तारी हुई है

प्रतिबंधित रियल मनी गेमिंग सेक्टर में भुगतान एपीआई से संबंधित लेनदेन को लेकर जांच का दायरा व्यापक हो सकता है। सूत्रों ने कहा कि कथित अनियमितताओं को लेकर फिनो पेमेंट्स बैंक के प्रमुख की गिरफ्तारी के बाद कई और डिजिटल पेमेंट फर्में और छोटे बैंक जांच के दायरे में आ सकते हैं। 

उद्योग को पेमेंट एग्रीगेटर और गेटवे जैसे मध्यस्थों की गहन जांच की उम्मीद है। साथ ही इस जांच का दायरा छोटे बैंकों तक भी बढ़ सकता है, जिन्होंने पहले इस तरह के लेनदेन किए हों। 

अधिकारियों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि भुगतान एपीआई को मध्यस्थों और बैंकों के साथ जोड़ा गया था, फिर बेटिंग की आय का लेनदेन करते समय स्वचालित रूप से थोक भुगतान भेजने के लिए इसका दुरुपयोग किया गया, जबकि लेनदेन वैध नजर आता है।  एक भुगतान कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर कहा, ‘जो लोग इस तरह के लेनदेन करना चाहते हैं, जानते हैं कि कौन सी इकाई उनका काम कर सकती है और इस तरह के बैंकों और पेमेंट एग्रीगेटरों को जोड़ सकती है।’

इस तरह की गतिविधियों पर तब नजर पड़ी, जब जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) द्वारा की गई जांच के कारण फिनो पेमेंट्स बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) ऋषि गुप्ता की गिरफ्तारी हुई है।

सूत्रों ने कहा कि मर्चेंट के रूप में पेश करने वाली संस्थाओं के साथ बैंक और गैर-बैंक एकीकरण को सक्षम करने वाली इस तरह की व्यवस्था आमतौर पर बिक्री या मर्चेंट हासिल करने के चरण में होती है और इसमें आवश्यक रूप से बैंक प्रमुख शामिल नहीं होते हैं।

एक अन्य सूत्र ने कहा, ‘सोशल मीडिया समूह हैं, जहां कुछ ब्लैक लिस्टेड मर्चेंट को व्हाइट लिस्टेड के रूप में लेबल करने के लिए कहा जाता है, ताकि वे भुगतान स्वीकार करना शुरू कर सकें और भुगतान एपीआई का उपयोग कर सकें। ऐसे लेनदेन में कई और पेमेंट एग्रीगेटर शामिल हैं, साथ ही एक और छोटा बैंक शामिल है जिसकी जांच होने की संभावना है।’ 

उद्योग के सूत्रों ने कहा कि कई छोटे बैंक जटिल डिजिटल भुगतान व्यवस्था के लिए नए हैं और जरूरी नहीं कि कमजोर जोखिम मूल्यांकन तंत्र वाले इन बैंकों के पास इस तरह के लेनदेन से निपटने की बारीकियां हों। उन्होंने कहा कि इस तरह के लेनदेन बैंकिंग व्यवस्था के भीतर चलना चुनौती है, जो देखने में कानूनी लगते हैं और जब तक कोई भुगतान का कोई पैटर्न, जैसे देर रात को बड़े भुगतान या  अलग अलग आकार के भुगतान जैसे मामले न आएं, इन्हें चिह्नित नहीं किया जा सकता है।  

 उपरोक्त सूत्रों में से एक ने कहा, ‘इसमें शामिल लोग जानते हैं कि किन बैंकों व पेमेंट एग्रीगेटरों का अनुपालन कमजोर है। इस तरह के लेनदेन करने को इच्छुक गेमिंग कंपनियों और एकीकरण करने वालों के बीच गठजोड़ है। यह उस स्तर तक जाता है, जिसमें सबका हिस्सा बंधा हुआ है।’

Advertisement
First Published - March 1, 2026 | 10:38 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement